ये में कैसी माँ हु

ये जो सेक्स कहानी मैं लिख रही हूँ, वो मेरी सहेली सोनी की है. उसने मुझसे अपनी इस सेक्स कहानी का जिक्र किया और अन्तर्वासना के माध्यम आप सभी तक पहुंचाने के लिए कहा. आइए, उसी के शब्दों में उसकी सेक्स कहानी को पढ़िए और गर्म हो जाइए.

मेरा नाम सोनी राज है, मैं भोपाल की रहने वाली हूँ. मेरी उम्र 40+ हो गई है. मैं तलाकशुदा महिला हूँ. कविता मेरी बचपन की बेस्ट फ्रेंड है, उसके पति की मृत्यु के बाद हम दोनों मिले थे.

कविता ने पति जाने के बाद अपना जीवन व्यवस्थित कर लिया था और फिलहाल वो अपने बेटे वंश के साथ बहुत खुश थी. हालांकि उसे इतना प्रसन्नचित्त देख कर मुझे थोड़ा अजीब सा लगा. उन दोनों का इस मस्ती से रहना, मैं समझ नहीं पा रही थी.

जब मुझसे नहीं रहा गया तो आखिर मैंने कविता से पूछ ही लिया कि जीजू के जाने के बाद भी तुम दोनों इतना खुश कैसे हो? क्या तुम्हें जीजा जी के जाने का कोई गम नहीं है?
उसने बोला कि पति को मैं वापस नहीं ला सकती हूँ. फिर वंश है ना मेरे साथ.

मैं बोली- वंश है, वो तो ठीक है … मगर जीजू की वो कमी तो दूर नहीं कर सकता ना.
उसने बोला- नहीं … वो मेरी हर कमी दूर करता है.

उसके मुँह से इतनी बिंदास बात सुनकर मैं शॉक्ड हो गई. मैंने उससे सीधे सीधे पूछने का तय किया और पूछा- सेक्स के लिए क्या कहोगी?
कविता बोली- अब तुझसे क्या छुपाना … वंश ही मेरा सब कुछ है.

मैं एकदम अवाक होकर उसकी तरफ देखने लगी. मैंने उससे इस बात को विस्तार से जानना चाहा, तो उसने सारी बात मुझे बता दीं.

उसकी बात सुनकर मुझे बहुत अच्छा लगा. क्योंकि मुझे भी पति से अलग होने के बाद जिस्म की आग परेशान करती थी. मेरा भी बेटा है, तो मैंने सोचा मैं भी कविता के जैसे कर सकती हूँ.

पर ये सब कैसे होगा, इसी उधेड़बुन में मैं सोचती रही. कविता ने मुझे काफी कुछ तरीके बताए थे, मगर ये सब इतना आसान होता, तो शायद मैं इतना न सोचती.

फिर मैं वापस भोपाल आ गई.

मेरा तलाक हुए दस साल हो गए थे. जब मेरा तलाक हुआ था तब मेरा बेटा आदि दस साल का था, जो अब 20 साल का गबरू जवान हो चुका है.

और कहानिया   माँ बेटे का प्यार भाग 1

हालांकि मैंने पति से अलग होने के बाद अब तक कई बार कॉलब्वॉय बुला कर या उसके साथ कहीं जाकर अपनी चुत की खुजली मिटवाई है और मैं नए नए जवान हुए लौंडों के साथ सेक्स एन्जॉय करती रहती हूँ. पर कविता की बात सुनकर मैं एकदम से भौचक्की थी कि खुद अपने बेटे के साथ सेक्स कैसे करूं.

हालांकि कविता ने खुद के बेटे के साथ सेक्स करने के पीछे कई कारण भी बताए थे, जो कि कहीं न कहीं सही थे. जैसे सबसे पहले तो गोपनीयता बनी रहेगी. पैसे भी बचेंगे और जब मन हुआ, तब एन्जॉय भी कर सकती थी.

मगर अपने बेटे के लिए खुली किताब हो जाने के किये कैसे उसे तैयार करूं … मेरी समझ में नहीं आ रहा था. मैं काफी सोच विचार करती रही. कभी मुझे लगता था कि उसके साथ सेक्स सम्बन्ध न बनाऊं. फिर कविता के उसके बेटे के साथ सेक्स रिलेशन को सोच कर मुझे भी अपने बेटे के जवान लंड की चाहत होने लगती.

मैंने सोचा कि मेरा बेटा आदि अब जवान हो गया है … और आज नहीं तो कल अपने लिए छेद तो ढूंढेगा ही. मैं उसके लंड का धागा अपनी चुत में फंसा कर ही तुड़वाने का मन बनाने लगी थी.

नए और जवान लंड की चाहत में मेरी खोपड़ी बड़ी तेजी से इस पर काम करने लगी थी कि आदि को कैसे पटाया जाए.

तभी मेरे दिमाग में एक आइडिया आया और मैं एक नया फोन और सिम लाई. उसमें व्ट्सऐप डाउनलोड किया और आदि को हाय लिखा भेजा.

कुछ पल बाद उसका रिप्लाई भी आ गया- हैलो आप कौन?
मैं बोली- मैं कविता आंटी.
उसने बोला- हैलो आंटी … कैसी है आप?

मैंने उससे ठीक है लिखते हुए उसका हाल चाल पूछा और उससे बाय बोल दिया.

अब मैं रोज उससे बातें करने लगी और थोड़ी बहुत बात करके उसे बाय बोल देती थी.

एक दिन मैंने उसको हाय बोल कर चैट बंद कर दी और उसे अपने रूम में बुला लिया. इस वजह से वो कविता आंटी को रिप्लाई नहीं दे सका. मतलब मुझे उसने जबाव नहीं लिखा.

मैंने उससे कुछ देर इधर उधर की बात करके उससे जाने को बोल दिया.

और कहानिया   ये क्या होरहा है भाग 2

कुछ ही देर बाद उसका रिप्लाई आया- हैलो.
मैं बोली- कहां बिजी हो गया था … कोई गर्लफ्रेंड के साथ लगा था क्या?
वो बोला- नहीं आंटी … मेरी कोई गर्लफ्रेंड नहीं है.
मैं बोली- चल झूठा.
वो बोला- सच में आंटी … मॉम की कसम.
मैं बोली- वो तेरी मॉम है, कोई गर्लफ्रेंड नहीं … जो तू उसकी ऐसे कसम खा रहा है.
वो बोला- सॉरी.
मैं बोली- कोई बात नहीं!

मेरे बेटे को पता ही नहीं था कि वो अपनी मॉम से ही बात कर रहा है.

फिर मैंने उससे कविता आंटी बनकर पूछा- कैसी गर्ल फ्रेंड चाहिए तुझे?
पहले तो वो शरमाया, कहने लगा- अरे आंटी आप भी कैसी बात कर रही हैं.
मैंने उससे कहा- क्यों अब तुझे गर्लफ्रेंड की जरूरत नहीं होती क्या? मेरे बेटे की गर्लफ्रेंड तो मेरे घर तक आती है. वो मेरे सामने ही उसे किस वगैरह कर लेता है.

इतना सुनकर वो मुझसे थोड़ा खुला. उसने कहा- आंटी फिलहाल तो मेरी कोई गर्लफ्रेंड नहीं है … लेकिन कुछ लड़कियां जरूर मुझे पसंद करती हैं. मगर मैं ही उन्हें लिफ्ट नहीं देता.
मैंने पूछा- क्यों … उनमें से कोई तुझे पसंद नहीं है या तेरी ख्वाहिश कोई और लड़की को लेकर है?
वो बोला- नहीं आंटी मुझे उन लड़कियों में से एक भी पसंद नहीं है.

मैंने उससे पूछा- तो वही तो पूछ रही हूँ कि तुझे कैसी गर्लफ्रेंड चाहिए?
वो बोला- मॉम के जैसी.
मैं बोली- बेवकूफ है क्या … मॉम के जैसी क्यों चाहिए?
वो बोला- मेरा मतलब नेचर से, देखने से उसकी तरह केयरिंग हो.
मैं बोली- अच्छा … ये मतलब था.
वो बोला- हां.

फिर मैं बोली- मैं एक बात कहूँ, तू कुछ बुरा तो नहीं मानेगा न?
वो बोला- नहीं आंटी … आप बोलिए न!
मैं बोली- तूने बोला कि गर्लफ्रेंड देखने मैं भी मॉम टाइप की हो … मैं ये बात समझी नहीं.
वो बोला- अरे आंटी आप मेरी मॉम से मिली ही हो न … वो बहुत सुंदर हैं न … इसलिए मैंने उनके जैसी कहा.
मैं बोली- मतलब तुझे गर्लफ्रेंड में मॉम चाहिए या मॉम में गर्लफ्रेंड … हैं न!
वो बोला- नहीं आंटी … आप समझी नहीं.

Pages: 1 2 3