विधवा शीला का पंडित जी के सात चक्कर 3

शीला- नहीं पण्डित जी.. पहली बार मिला रही हूँ.

शीला भी हल्के हल्के पण्डित की पीठ पे अपनी पीठ रगड़ने लगी.

पण्डित- चलो.. अब घुटनों पे खड़े होकर पीठ से पीठ मिलानी है.

दोनों घुटनों के बल हो गए.

एक दूसरे की पीठ से चिपक गए.. इस पोजीशन में सिर्फ पीठ ही नहीं.. दोनों के हिप्स भी चिपक रहे थे.

पण्डित- अब अपनी बाँहें मेरी बांहों में डाल के अपनी तरफ़ हल्के हल्के खींचो.

दोनों एक दूसरे की बांहों में बांहें डाल के खींचने लगे. दोनों की नंगी पीठ और हिप्स एक दूसरे की पीठ और हिप्स से चिपक गईं.

पण्डित अपने हिप्स शीला के हिप्स पे रगड़ने लगा. शीला भी अपने हिप्स पण्डित के हिप्स पर रगड़ने लगी.

शीला की चूत गरम होती जा रही थी.

पण्डित- शीला.. क्या तुम्हें मेरी पीठ का स्पर्श सुखदायी लग रहा है..?

शीला शरमाई.. लेकिन कुछ बोल ही पड़ी.
शीला- हाँ पण्डित जी.. आपकी पीठ का स्पर्श बहुत सुखदायी है.
पण्डित- और नीचे का..?

शीला समझ गई पण्डित का इशारा हिप्स की तरफ़ है.

शीला- अ..ह्ह..हाँ पण्डित जी..

दोनों एक दूसरे के हिप्स को रगड़ रहे थे.

पण्डित- शीला.. तुम्हारे चूतड़ भी कितने कोमल लगते हैं कितने सुडौल हैं. मेरे चूतड़ तो थोड़े कठोर हैं.
शीला- पण्डित जी.. आदमियों के थोड़े कठोर ही अच्छे लगते हैं.
पण्डित- अब मैं पेट के बल लेटूंगा.. और तुम मेरे ऊपर पेट के बल लेट जाना.
शीला- जी पण्डित जी.

पण्डित ज़मीन पर पेट के बल लेट गया और शीला पण्डित के ऊपर पेट के बल लेट गई.

शीला के चूचे पण्डित की पीठ पर चिपके हुए थे.

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