अंकल ने मेरी चुत का सील तोड़ा

मैं तू पहले ही यह सब ड़ख चुकी थी. मैं आने वेल मज़े को सोच
बिना झिझक पुर कपड़े उतार नंगी हो गयी. मसली गयी चूचियाँ और
छाती गयी छूट बहुत खूबसूरत लग रही थी. अब यकीन था की नीना
की तरह खुलकर मुझे भी मज़ा देगा. तभी वा नीना के साथ वापस
आया. नीना मुझे नंगी देख मुस्करती हुई पास आई और बोली, “हाए
इतना शर्मा क्यों रही हो? मेरे पापा बहुत आचे हैं. हमलोगो को खूब
मज़ा देते हैं. अब हम तुम आपस मैं करेंगे तू खूब मज़ा आएगा.”

जब नीना ने मेरी पीठ पर हाथ फेर कर कहा तू मेरा मॅन उमंग से
भर गया. तभी उसका बाप मेरी कमर मैं हाथ डालकर मेरी चूची
को चाटते हुवे बोला, “हाए नीना देखो इसकी कितनी गोरी गोरी हैं.”

इसपर नीना मेरे आयेज बैठकर मेरी छूट को चूमकर बोली, “हन पापा
छूट भी अच्छी है.” “छातो बेटी अपनी सहेली की, अब जो आएगा उसको
टुंदोनो की काली और इसकी गोरी छोड़ने मैं खूब मज़ा आएगा.”

फिर वा मेरी चूचियाँ चूस्टे हुवे अपनी लड़की को मेरी छूट चाटने
लगा. मैं मस्त थी. कुच्छ देर बाद वा मेरे पीच्चे आया आया और अपने
मरियल लंड को मेरी गांद से लगा दोनो चूचियों को मसालने लगा.
मैं इस मज़े को पा जवान हो गयी थी. तभी नीना बोली, “श पापा
बहुत टेस्ट है इसकी छूट मैं श पापा आप भी छातो ना.” उसकी बात
सुन अंकल भी नीचे बैठे और मेरी छूट मैं जीभ डाला तू नीना
मेरे पीच्चे जेया मेरी गांद का च्छेद चाटने लगी. मैं हवा मैं उड़
रही थी. कुच्छ देर बाद वा अपनी उंगली से मेरी छूट छोड़ने लगा तू
मुझे नया मज़ा मिला. उसने 60-70 बार फिंगर फक किया था की मैं
अपनी जवानी का पहला कुँवारा पानी बहाने लगी जेसी दोनो बाप-बेटी
फ़ौरन जीभ से चाटने लगे. दोनो ने एक एक बूँद पी लिया. वाइ दोनो
अभी मेरा रस छत ही रहे थे की बड़ी वाली सरिता भी रूम मैं आ
गयी. उसके आने से ज़रा भी शरम नही आई. अब दोनो ने मुझे छ्चोड़ा
तू सरिता पास आ मेरी चूचियाँ पकड़ कर बोली, “मज़ा आया?”

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“हन दीदी.”

“अगर रात मैं पापा कोई लड़का लाए तू तुम भी ऊपर आ जाना तू
तुम्हारी भी टेल लगवाकर छुड़वा देंगे.”

मैं इसके बाद कपड़े पहनकर नीचे आ गयी. बहुत दीनो तक अंकल कोई
लड़का नही ला पाए तू मैने सोचा क्यों ना अपने बड़े भाई को ही
फँसाया जाए. वैसे भी बाहर का लड़का होगा तू बदनामी का दर्र है.
यह सोचकर मैं अपने भाई के चक्कर मैं पद गयी और भगवान ने
मेरी सुन भी ली और एक मौका मिल ही गया भाई को फँसाने का.

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