ट्रैन में घपाघप

मैंने नई-नई बैंक जॉब ज्वाइन करी थी और ट्रेनिंग लेकर कोलकाता से वापस आ रहा था। शालीमार से चलकर कुर्ला तक जाने वाली ट्रेन थी. मेरा फर्स्ट एसी में रिजर्वेशन था, 2 बर्थ का केबिन था, जो कोलकाता से खाली चल रहा था.

टीटी आया तो उससे मैंने पूछा.
उसने कहा- टाटानगर से कोई लेडी चढ़ने वाली है।

मैं भी निश्चिंत होकर मूवी देखने लग गया. मैंने सोचा कि जब आएगी तब देखा जाएगा कि क्या होता है।

टाटानगर आया. मैंने खाना नहीं खाया था तो खाना खाने के लिए नीचे उतर गया. इसी बीच वो लेडी कूपे में आकर बैठ गई और मैं बिना खाना खाए ट्रेन में आकर बैठ गया क्योंकि ट्रेन चलने लगी थी.
मैं जैसे ही कूपे के अंदर घुसा, सामने उस लड़की को देखकर, उसे मैं लेडी नहीं कहूंगा क्योंकि वह 25-26 साल की खूबसूरत लड़की ही थी. लगता था जैसे भगवान ने बड़े प्यार से बहुत ही समय देकर उसके एक एक अंग को तराशा हो.
ऐसा लग रहा था जैसे कोई आसमान से परी उतर कर मेरे साथ उस कूपे में बैठ गई है।

उसकी काली आंखें, तीखी नाक … मुस्कुराती थी तो ऐसा लग रहा था जैसे होंठों से फूल झड़ रहे हों.
मैंने उसका अभिवादन किया और कूपे का दरवाजा बंद करने का आग्रह किया. उसने बिना किसी संकोच हामी भर दी।

फिर हम दोनों ने खाना खाया. चूंकि मेरे पास तो कुछ था नहीं, उसने ही मुझे खाना आफर किया।

माफी चाहूंगा मैं उसका नाम बताना भूल गया, उसका नाम पूर्णिमा था, 32-30-36 का फिगर था, रंग गोरा काले लंबे बाल, और गहरे गुलाबी कलर के कुर्ते से साथ जामुनी सलवार और दुपट्टा ली हुई थी।
वो टाटा से अपने ससुराल मुम्बई जा रही थी और मैं रायपुर तक जा रहा था।

लगभग 11 बज रहे थे, मैं मूवी देखने लगा वो भी मेरे साथ मूवी देखने लगी, हम दोनों ऐसे बैठ गए थे जैसे पति पत्नी हों.
मैंने पूर्णिमा से कहा- मुझे कपड़े पहन के नींद नहीं आती, कपड़े बदल के आता हूं.

तो उसने कहा- कहाँ जाएंगे, लाइट बन्द कर के यहीं बदल लीजिए।
मैंने भी कहा- ठीक है!
और कपड़े उतार के सिर्फ बरमूडा पहन लिया।

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चूंकि वो इतनी हॉट थी मेरा लन्ड बैठने का नाम ही नहीं ले रहा था, और नाईट बल्ब की हल्की रोशनी में शायद उसे एहसास हो गया था. मैंने बनियान भी नहीं पहना था जानबूझ कर, ताकि वो मेरी छाती देख कर थोड़ी तो बहके।

और वो असर हुआ, उसने कहा- मुझे भी चेंज करना है!
तो मैंने कहा- चेंज क्या करना है, मेरी तरह उतार कर बैठ जाओ, हम दोनों के अलावा कौन आने वाला है।

तभी अचानक दरवाजा बजा, मैंने खोला तो टीटी था.
उसने टिकट चेक किया और मुझे ‘गुड नाईट सर’ बोल कर चला गया.

मैंने डीएनडी का लोगो लगाया और दरवाजा बंद कर के पूर्णिमा से बोला- लो अब तो टीटी भी चला गया, अब तो कोई नहीं आने वाला!
उसने मुझे गुस्से से देखा. फिर अचानक से मेरे लन्ड को दबा कर बोली- देखो यार, तुम मुझे चोदना चाहते हो; ये तो मुझे समझ में आ रहा है. पर क्या तुम जानते हो कि मुझे भी तुमसे चुदवाने का मन है?
मैंने पूछा- कैसे? क्या बात कर रही हो?

वो बोली- जैसे ही तुम कूपे में आए थे, मुझे लगा आज मेरी आग शांत हो जाएगी. 3 महीने से मायके में हूं और मेरी चूत तड़प रही है. इनको छुट्टी नहीं मिल रही कि मुझे आ कर ले जायें. मजबूरन अकेले सफर करना पड़ रहा है।

मैं बोला- कोई बात नहीं! अकेले नहीं आज हम दोनों सफर करेंगे!
बोल कर मैंने बरमूडा से अपना लन्ड निकाल कर पूर्णिमा के हाथ में दे दिया और बोला- हिला और चूस!
इतना बोल कर मैंने उसकी कुर्ती को उतार दिया.

अब वो लाल रंग की ब्रा में मस्त माल दिख रही थी और मेरे लन्ड को बड़े प्यार से मुंह में लेकर वो मस्त आइसक्रीम जैसे चूस रही थी और मैं उसके दूध दबाने की नाकाम कोशिश कर रहा था. पर वो कहाँ मानने वाली थी! 3 महीने से बिना चुदी शादी शुदा औरत को जब लन्ड मिल जाए तो वो खा जाने वाली होती है।

उसने मेरा माल निकल जाने तक चूसा और पूरा माल पी गयी। फिर पूरा लन्ड चाट कर साफ कर के बोली- मज़ा आ गया! आज 3 महीने बाद लौड़े का रस पीने को मिला है.
बोलते बोलते भाभी खुद मेरी गोद में बैठ गयी.

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मैं उसके होंठ चूसने लगा और ब्रा में हाथ डाल कर उसके दूध मसलने लगा. उसके कान के पीछे किस करके चाटने लगा. तो वो एकदम से कामुक हो गयी और फिर से मेरे लंड को अपने हाथ में लेकर मसलने लगी.

फिर मैं उसकी सलवार में हाथ डाल कर भाभी की चूत में उंगली करने लगा. तो उसने पैर फैला कर हाथ को जगह दे दी. अब वो मेरे गोद में थी, और हम दोनों किस कर रहे थे, मेरा एक हाथ उसकी चूत मसल रहा था तो दूसरा उसके ब्रा खोलने में लगा था.

ब्रा खोल कर उसके भूरे निप्पल को मसलने लगा औऱ दूध को जोर जोर से दबना शुरू कर दिया.

15 मिनट के खेल के बाद पूर्णिमा खुद पूरी नंगी हो गयी, बोली- मेरी चूत चाट! कुछ तो राहत मिले!
बोल कर बर्थ में पैर फैला कर बैठ गयी.

पूर्णिमा भाभी की चूत में जरा जरा से बाल थे जो उसकी चूत को और आकर्षक बना रहे थे.
मैंने जैसे ही चूत में जीभ लगायी, वो एकदम से सिहर उठी. मैं उसकी चूत चाटने लगा, उसके भगनासे को चाटता, कभी उसकी चूत में जीभ डालता. इन सब से वो और उत्तेजित हो कर अपने दूध खुद मसलने लगती.

औऱ फिर भाभी की चूत ने रस छोड़ दिया.
उससे मैंने पूछा- ये क्या?
तो बोली- जब मैं तुम्हारा लन्ड चूस रही थी, तब से अपना लावा रोक रखा था कि तुम्हारे मुँह में छोडूंगी.

फिर मैं उसको बर्थ में लेटा कर फिर से उसके दूध मसलने लगा. वो और कामुक होकर मेरे लन्ड को दबाने लगी औऱ चोदने को बोलने लगी।
पर मैं उसके गोरे दूध को लाल करने में लगा था।

फिर उसके दूध पीते हुए मैं उसकी चूत में उंगली डाल कर अंदर बाहर करने लगा और वो तड़पने लगी।
औऱ फिर से भाभी की चूत ने पानी छोड़ दिया, जिसको मैंने पूरा चाट कर साफ कर दिया. और अब पूर्णिमा चुदने के लिए पूरी तरह तैयार थी.

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