तीन सलियो के सात रासलीला

क्रमशः
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जल्दीही मेरी सगाई कि तैयारीयां शुरू हो गयी|

सगाई आशा के घर में थी| तो हम उनके घर दोपहर १२ के करीब पहुँच गए| सगाई गार्डन में थी| १२:३० को मोहरत था|

में तो तैयार था और जब आशा को गार्डन में लाया गया तो मैं उसे देखता ही रह गया| उसने गुलाबी रंग की साडी पहनी थी जो सेमी ट्रांसपेरेंट थी| उसने साडी को नाभी के थोडासा नीचे तक पहना था| जिसकी वजहसे उसकी कमर के दीदार हो रहे थे| उसपे मैचिंग कलर का “V” शेप का ब्लाउज पहना था| मगर उस ब्लाउज में से उसके उभारोंके बीचमे से उसका क्लीवेज दिख रहा था| और क्या गजबका क्लीवेज दिख रहा था मेरी नज़र तो हट ही नहीं रही थी| उसने बाल खुले छोड़े थे जिस वजहसे कुछ जुल्फे उसके चेहरेपे आ रही थी| जो उसे परेशान कर रही थी और वो बार बार उसे पीछे किये जा रही थी| उसने अपने लबों पर हलके गुलाबी कलर की लिपस्टिक लगायी थी| गालोंपे हल्का गुलाबी फाउंडेशन लगाया था| हाथोंमे गुलाबी कलर की चूड़ीयां पहनी थी|

उसके इस लिबास को मैं भूल नहीं सकता| मैं उसे तब तक देखता रहा जब तक वो मेरे पास आके नहीं बैठी| रसम शुरू हो गयी| घर की औरतोंने हमारा तिलक किया| बाद में हमने एक दुसरे को रिंग पहना दी| इस तरह से हमारी सगाई हो गई| इसके बाद आशा घर के अन्दर चली गई| उसके हमारी आवभगत शुरू हुई| तक़रीबन १:३० बजे हम सब ख़तम करके घर लौट आये|

सगाई तो हो गई लेकिन आज जब से मैंने आशा को देखा था मेरा तो कही दिल भी नहीं लग रहा था| हर वक़्त मेरी नज़र के सामने सिर्फ आशा का चेहरा ही दिखाई दे रहा था| मुझे दो हफ्ते बाद अपनी बैंक ज्वाइन करनी थी| तो अगले हफ्तेमे मेरी शादी थी| घर के सभी लोग शादी की तैयारी में लग गए|

मेरी सगाई तो हो गई थी| मेरी शादी को अभी दो (२) महीने बाकी थे| और मुझे बैंक ज्वाइन करने में भी अभी एक (१) महिना शेष था| मैं और आशा एक ही शहरमे रहते थे| तो एक दिन मेरी सालियोंने मुझे उनके घर आने के लिए मुझे फ़ोन कर न्योता दे दिया|

ज्योती – नमस्ते जीजू|

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मैं – नमस्ते डॉक्टर साहिबा| आज हमें कैसे याद किया|

ज्योती – (शरमाते हुए) बस याद आ गयी तो मन किया की चलो अपने प्यारे जीजू से कुछ बाते की जाये| वैसे आप तो हमें कभी याद ही नहीं करते| अरे हाँ आप का हमसे कोई काम तो नहीं है ना!

मैं – (ज्योती की ऐसी बाते सुन चौंकते हुए) क्यों जी ऐसी क्या बात हुयी जो आप ऐसे कह रही है| क्या हमने आप से कहा है या हमारे हाव भावों से ऐसा प्रतीत हुवा की हमें आप से कुछ काम होगा तो ही आप से बात करेंगे नहीं तो नहीं करेंगे|

ज्योती – अरे जीजू शायद मेरी बात से आप को बुरा लगा| मगर क्या आप को नहीं लगता की आप मुझे सच मैं भूल गए है| (और ज्योती हँसाने लगाती है|)

मैं – (कुछ परेशान होते हुए|) यार मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा की मैं क्या भूल गया हूँ| अरे कुछ समझ में आये इस तरह से बात करो ना|

ज्योती – क्या जीजू आप को आशा ने कुछ बताया नहीं क्या?

मैं – लेकिन किस बारे मैं?

ज्योती – अरे बाबा क्या उसने नहीं बताया आज के बारे में?

मैं – नहीं मेरी उससे दो दिन से बात ही नहीं हुयी| अच्छा अब पहेलिय बुझाना बंद करो और तुम ही बतावो की आज क्या ख़ास बात है जो आप ने हमें फ़ोन करने की जेहमत उठाई| और हमें यूँ परेशान किया इतना उलझी बाते कर के|

ज्योती – पहले तो हम आप से माफी मांगते है अगर आप को बुरा लगा हो तो|

मैं – नहीं मेरे कहने का ये मतलब नहीं था| लेकिन मैं सच कह रहा हूँ की मेरी और आशा की दो दिन से बात ही नहीं हुयी| शायद वो मुझ से कुछ नाराज है|

ज्योती – तभी मैं कहूं की आशा इतनी उदास क्यों है कल से| क्या कुछ जागदा हुवा है क्या आप दोनों मैं कहे तो मैं आप की मदद कर सकती हूँ|

मैं – हाँ यार वो मैंने कुछ बोल दिया था गुस्से मैं तो वो नाराज हो गयी कल सुबह में| पर तुम मेरी मदद क्यों करोगी इस बात में? तुम्हे भी तो गुस्सा होना चाहिए था इस बात पर की मेरा आशा से झगडा हुवा है| मुझपे इतनी मेहरबानी करने की वजह| क्या मुझसे से कुछ चाहिए क्या?

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ज्योती – चाहिए भी और नहीं भी| हाँ अगर आप चाहे तो मैं आपकी मदद कर दूँगी|

मैं – चलो ठीक है तो कर दो मदद| पर ये कैसे संभव है?

ज्योती – वो बात आप मुझपे छोड़ दीजिये| बस आप को एक काम करना होगा|

मैं – बोलिए क्या करना होगा| आप जो कहेंगी वो करने के लिए तैयार हूँ मैं| चाहे तो मैं आप से प्रोमिस करता हूँ|

ज्योती – ठीक है तो प्रोमिस है| आप को घर आना होगा आज शाम को|

मैं – आज! आज कुछ खास है क्या?

ज्योती – अरे मैं बातो बातों में भूल गयी आपको| आज मेरा जन्मदिन है| और मैंने आप को यही बताने के लिए फ़ोन किया है|

मैं – ज्योती सबसे पहले जन्मदिन की ढेर साडी शुभकामनाये| और मैं बिना भूले आज शाम को घर आ जाऊंगा|

ज्योती – शुक्रिया जीजू| अब मैं फ़ोन बंद करती हूँ| मुझे बहोत साड़ी तैयारियां करनी है|

मैं – अगर तुम्हे कुछ मदद चाहिए तो मैं अभी आ सकता हूँ|

ज्योती – ठीक है तो आ जाईये| मैं आप का इन्तजार करती हूँ|

इतना बोल ज्योती ने फ़ोन बंद कर दिया| और मैं भी १० मिनट में तैयार हो के आशा के घर की तरफ चल दिया|

जाते जाते मुझे एक ख्याल आया| क्यों ना कुछ मिठाई ली जाए| तो मैं एक मिठाई की शॉप में चला गया| मैंने उस शॉप से रस मलाई ली और आशा की घर की और चल दिया|

घर जाते ही ज्योती ने दरवाज़ा खोला| जैसे ही मैंने उसे देखा मेरा मूह खुला का खुला रह गया| ज्योतीने जो कपडे पहने थे उसे देख मैं हैरान ही रह गया| उसने सिर्फ एक टॉप पहना हुवा था जो उसकी जांघों को भी छुपा नहीं पा रहा था|शायद उसने अंदरसे कुछ पहना भी नहीं था| क्यों की उसके टॉप के उपरसे ही मुझे उसके उरोजों के तने हुए काले चुचक साफ़ दिख रहे थे| और टॉप के आगे कोई बटन भी नहीं था और उसके टॉप से उसके उरोजों के बीच की दरार दिख सकती थी| और उसके उरोजों के कुछ कुछ दर्शन भी हो रहे थे|

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