चिकिनी ताज़ा चुत की चुदाई 1

उसकी चूत से चिपचिपा पानी निकल रहा था. उस चिपचिपे पानी से मादक खुशबू आ रही थी. मैंने अपना मुंह तुरंत उसकी चूत के ऊपर रख दिया और उसकी प्यारी सी चूत को चाटने लगा. प्रीति को जैसे परम सुख का आनंद मिल रहा हो!
दोस्तो, इससे पहले कभी भी प्रीति ने ऐसा काम नहीं किया था.

प्रीति मदहोश सी होने लगी. मैं अच्छी तरह से प्रीति की चूत को चाटे जा रहा था प्रीति के मुँह से ‘आह उम्म्ह… अहह… हय… याह… ओह हअआह’ निकल रहा था.

अब मैंने अपना लंड को उसे मुंह में लेने के लिए बोला. तो वो मना करने लगी. मेरे जोर देने पर अपने मुँह में लिया और थोड़ा सा चाट कर बस कहने लगी.

तब मैंने अपना लंड उसकी चूत के मुँह पर रखा और अपना मुँह उसके मुँह पे रख दिया ताकि उसकी चीख बाहर ना जाए.

तब मैंने एक जोरदार शॉट मारा तो प्रीति दर्द से तड़प उठी. उसकी चीख मेरे मुँह में ही दब कर रह गई. उसकी आँखों से आंसुओं की धार बहने लगी. वो तड़पने लगी.
मेरा आगे का टोपा उसकी प्यारी सी चूत में घुस चुका था, उसकी चूत की सील टूट चुकी थी. उसकी चूत और मेरे लंड पर उसकी चूत का खून साफ साफ दिखाई दे रहा था.

मैं ऐसे ही थोड़ी देर पड़ा रहा. प्रीति का दर्द जब थोड़ा कम हुआ तो प्रीति हल्के हल्के अपनी गांड को हिलाने लगी. मैं समझ गया कि अब प्रीति पूरी तरह से तैयार है. मैंने थोड़ा झटका देना चालू किया.
धीरे धीरे 10-12 झटके के बाद प्रीति की चूत में मेरा आधा लंड घुस चुका था. बैड की चादर में थोड़ा खून का दाग लग गया था. मेरा लंड अपने पूरे रंग में हरकत करना चालू कर दिया. प्रीति को धीरे धीरे मजा आने लगा, प्रीति कहने लगी- ओ संजय, मेरे संजय … अपनी प्रीति की आग को बुझा दो! चोद कर मुझे तृप्त कर दो मेरे संजय!

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मैंने उसकी चूत को चोदना चालू रखा. मैं प्रीति को चोदने में इतना मगन था कि प्रीति मेरी पीठ पर अपना नाखून धंसा दिये और मुझे मालूम भी नहीं पड़ा. प्रीति के मुँह से सिसकारियाँ निकल रही थी ओओओ मे ऐ ऐ री चू उ उ त फट गयी.

मैं इतना मदहोश हो गया था उसकी चुदाई में कि मैं भूल गया था कि कहां पर हूं, मैं बस उसे चोदे जा रहा था.

इतने टाईम तक वो दो बार झड़ चुकी थी. बस में उसे चोदे जा रहा था और प्रीति मेरा पूरा साथ देकर चुदवा रही थी.
मैंने चोदते समय प्रीति से कहा- कैसा लग रहा है मेरी जान?
प्रीति ने कहा- बस चोदो मुझे!

अब मैं भी चरम पर था, मैंने प्रीति से कहा- प्रीति, मेरा निकलने वाला है.
प्रीति चुदाई मका मजा ले रही थी और बोली- मेरा भी होने वाला है. तुम अपना पानी मेरी चूत में ही गिराओ. मैं तुम्हारे वीर्य को अपनी चूत में महसूस करना चाहती हूं.
इतना बोलते ही प्रीति झड़ गई.

उसके बाद मेरा भी वीर्य प्रीति की चूत में निकल गया और हम दोनों एक दूसरे से चिपक कर सो गए.

जब आँख खुली तो दो बज रहे थे. मैंने प्रीति को जगाया तो प्रीति शर्माती हुई उठी और अपने को पूरी नंगी देख कर अपनी चूत को छिपाने की नाकाम कोशिश करने लगी.
हम दोनों बैड से जब नीचे उतरे तो देखा कि बैड पे जो चादर थी उस पर खून और वीर्य लगा था.

प्रीति ने कहा- संजय, तुमने मुझे आज बहुत मज़ा दिया. अब मैं तुम्हारी हूं.
वो उठ कर बाथरूम की ओर चलने लगी तो प्रीति से चला नहीं जा रहा था.

मैं उसे उठा कर बाथरूम ले गया और प्रीति की चूत को अच्छी तरह से धोया. उसकी चूत सूजी हुई थी.

तो दोस्तो, यह थी मेरी कहानी.
धन्यवाद.

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