मेरी शादी की रात सारी रस्में खत्म होने के बाद मेरी ननद मुझे एक कमरे में ले कर गई.. जो पहले से फूलों और दूसरी सजावटी चीजों से सजा हुआ था, साथ ही उस कमरे में से एक अलग ही खुशबू आ रही थी।
मुझे कमरे में छोड़ कर मेरी ननद चली गई और फिर मैं अपना घूँघट काढ़ कर बिस्तर पर बैठ गई और पति का इंतजार करने लगी।
उस समय मेरी हालत बहुत बुरी हो रही थी क्योंकि उस रात में किसी और की होने वाली थी, अन्दर से थोड़ा डर भी लग रहा था और उत्साह भी था कि आज मेरी चुदाई होने वाली थी।
कुछ समय मैं कमरे में अकेली ही बैठी थी.. पर थोड़ी देर बाद कमरे के बाहर से लड़कियों की हँसने की आवाज आई.. फिर मेरे कमरे का दरवाजा खुला और मेरे पति ने कमरे में अन्दर आकर दरवाजा बन्द कर दिया।
मेरे पति मेरे पास आकर बैठ गए और मेरा घूँघट उठाने लगे, मैं शर्म के मारे अपनी आँखें बन्द करके बैठी थी।
फिर मेरे पति ने मेरी ठोड़ी को उठा कर मेरा चेहरा अपनी ओर घुमाया.. तो मैंने धीरे से उनकी आँखों में देखा, उनकी आँखों में मुझे एक अलग ही किस्म की शरारत दिख रही थी, मैं भी हल्के से मुस्कुरा उठी।
फिर थोड़ी देर तक वे मेरे साथ प्यार भरी बातें करने लगे.. और इसी दौरान उन्होंने मुझे धीरे से अपनी बांहों में भर लिया, मैंने भी समर्पण करते हुए उनका साथ दिया।
अब उन्होंने अपने हाथों से मेरे शरीर को सहलाना शुरू कर दिया और फिर मेरी ओर अपना मुँह लाकर पहले मेरे सर पर चूमा और फिर गालों पर किस करते हुए मेरे होंठों को चूमना चालू कर दिया।
उनके चुम्बन के दौरान मैंने भी अपने हाथों को उनके गालों पर सहलाते हुए किस करने में उनका साथ देना चालू कर दिया।
फिर धीरे से किस करते हुए वो आगे बढ़ने लगे और मेरी गर्दन पर चुम्बन करने लगे। इसी दौरान उन्होंने मेरी साड़ी का पल्लू हटा कर मेरे ब्लाउज पर से ही मेरे मम्मों को दबाना चालू कर दिया और मेरे गर्दन पर और जोर से किस करने लगे। इस सब में मुझे कुछ अलग ही मजा आ रहा था और धीरे धीरे मैं गर्म भी हो रही थी।
कुछ पलों बाद वो मेरे गले में से मेरे गहने निकाल कर बाजू में रखने लगे.. साथ ही साथ वे मेरे शरीर को किस भी करते जा रहे थे। कुछ मिनट में ही उन्होंने मेरे सारे गहने निकाल दिए.. फिर मेरी साड़ी को निकाल कर मुझे ब्लाउज और पेटीकोट में ला दिया।
मुझे अब थोड़ी अधिक शर्म आ रही थी.. तो मैंने अपनी आँखें बन्द कर दीं। वो मुझे बांहों में भरके मुझे फिर से किस करने लगे। मुझे भी थोड़ा जोश आ रहा था.. तो मैं भी उनके शरीर पर किस करने लगी।
उन्होंने मुझे बिस्तर पर लिटा दिया और वो मुझ पर छा गए। इसके बाद वो मेरे होंठों को किस करते हुए अपने हाथों से मेरे मम्मों को दबाने लगे। मुझे भी मजा आने लगा, वो बहुत जोर-जोर से मेरे मम्मों को मसलने लगे।
मुझे कुछ दर्द सा होने लगा था.. इस वजह से मेरे मुँह से आवाज निकलने लगी, पर वो मेरे होंठों को अपने होंठों से बन्द करके मेरी आवाज को दबा दे रहे थे। मुझे दर्द तो हो रहा था पर साथ में मजा भी आ रहा था।
फिर वो मेरे ऊपर से हटे और मुझे बिठा कर मेरा ब्लाउज निकालने लगे। मैं थोड़ा शर्माने लगी.. फिर भी उन्होंने मेरा ब्लाउज़ निकाल दिया और अब मैं ब्रा में रह गई।
उन्होंने भी अपनी शर्ट और बनियान निकाल दी और ऊपर से नंगे हो गए।
उनके खुले शरीर को देख कर मुझे कुछ कुछ होने लगा था.. लेकिन मुझे साथ में बड़ी शर्म भी आ रही थी। मैं अपनी ब्रा को हाथों से छुपा रही थी.. तो वो मेरे हाथों को खोलने की कोशिश कर रहे थे।
जब उनकी हाथ हटाने जोर बढ़ा तो मैंने उनसे लिपट गई और उनकी गर्दन पर किस करने लगी।
अब मुझसे भी रहा नहीं जा रहा था.. तो मैं उनका साथ देने लगी और वो भी मेरी गर्दन पर किस करते हुए मेरी ब्रा का हुक खोलने लगे।
फिर उन्होंने मेरी ब्रा का हुक खोल कर मेरी ब्रा को हटा दिया मेरी चूचियाँ नंगी हो गई और हम दोनों ऊपर से पूरे नंगे हो गए थे।
इसके बाद उन्होंने गालों पर किस करते हुए मेरे मम्मों को चूमना चालू कर दिया। फिर मेरे निप्पलों को अपने दांतों से हल्का-हल्का काटने लगे.. और साथ में मेरे मम्मों को जोर-जोर से मसलने लगे।
इस सब में मुझे बहुत मजा आ रहा था तो मैं अपने हाथ से उनका सर मेरी नंगी चूची पर खींचने लगी.. और इससे वो भी बड़े जोश में आकर मेरे मम्मों से खेलने लगे।
थोड़ी देर मेरे मम्मों के साथ खेलने के बाद वो अपना एक हाथ धीरे से मेरी चुत की ओर ले गए और पेटीकोट के ऊपर से ही मेरी चुत को अपने हाथ से मसलने लगे।
फिर उन्होंने मुझे इशारे से कहा- इसे निकाल दो..
मैं तुरंत खड़े होकर अपना पेटीकोट निकालने लगी.. और इसी समय उन्होंने भी अपनी पैंट निकाल दी।
अब हम दोनों अब सिर्फ अंडरवियर में आ गए थे।
इतनी देर के प्रेमालाप में हम दोनों एक-दूसरे के साथ खुल गए थे और मेरी शर्म भी अब चली गई थी।
पेटीकोट निकालने के बाद मैं सिर्फ पेंटी में ही बिस्तर पर लेट गई और वो मेरे पास आकर बैठ कर मुझे किस करते हुए अपने एक हाथ से मेरे मम्मों को दबाने लगे और दूसरे हाथ से मेरी चुत को सहलाने लगे।
मैंने पहले से ही अपनी चुत के बालों को साफ करके रखा था.. इसलिए वो बहुत खुश हुए और मुझसे अपनी खुशी जाहिर करते हुए उन्होंने मेरे हाथ को अपने अंडरवियर पर रख दिया।
उनकी अंडरवियर गीली हो गई थी और मैं उनके कड़क लंड को अंडरवियर के ऊपर से महसूस कर सकती थी। उनके बड़े लंड को अंडरवियर के बाहर से महसूस करने के बाद मैं अंडरवियर के अन्दर हाथ डाल कर उनके लंड को मसलने लगी।
तभी मेरे मुँह में से निकल गया- अब नहीं रहा जा रहा है.. इस मेरे अन्दर डाल दो!
फिर क्या था.. वो भी इसी बात का इंतजार कर रहे थे और फिर उन्होंने बिस्तर के नीचे से एक पैकेट निकाला, जो कि कंडोम का था। उस पैकेट से एक कंडोम निकाल कर उन्होंने मेरे हाथ में रख दिया और कहा- लो तुम ही पहना दो इसे!
मैंने उनकी अंडरवियर निकाल दी और उनके 7 इंच के लंड पर कंडोम लगाकर थोड़ी देर हल्के हाथों से लंड को मसलने लगी।
अब उन्होंने मुझे बिस्तर पर चित लेटा कर मेरी पेंटी निकाल दी और मेरी नंगी चूत को सहलाने लगे, फिर अपनी एक उंगली डाल कर मेरी चूत में उंगली को अन्दर-बाहर करने लगे।