दोस्तों के बीच सिस्टर्स का एक्सचेंज भाग 1

पूर्वी शर्म से हमसे नज़र नहीं मिला सकती थी. बोले बिना उस ने हाँ कही.
समीर: यश, इन दोनों ने हमारी चुदाई देख ली है क्या करेंगे उनका?
पूर्वी : दूध ले आ?
पूर्वी ज़ोर से हँस पड़ी.

समीर : नेहा, दूध की ज़रूरत नहीं है जहाँ क्रीम बनता है वो फेक्टरी ओवर टाइम काम करती है अभी काफ़ी क्रीम पड़ा है चाहिए तुझे?
नेहा ने अपना चेहरा ढक दिया. आश्चर्य से पूर्वी की आँखें फट गयी वो बोली : मैंने कहा था ना? समीर भैया को मत उकसाना? सुन लिया जवाब?
मैं: मेरे पास भी काफ़ी क्रीम है किस को चाहिए?
लड़कियों के मुँह से सेक्स की बातें सुन कर हमारे लौड़े खड़े होने लगे थे. उन दोनों की नज़रें बार बार उस तरफ़ जाती थी. दोनों के चेहरे लाल लाल हो गये थे.
मैं बनावटी मुँह लंबा कर के बोला : समीर ये तो बुरा हुआ. नेहा तो कँवारी नहीं है उस के लिए चुदाई नयी चीज़ नहीं है लेकिन पूर्वी?
अब की बारी थी समीर की खड़ खड़ हँसने की. वो बोला: पूर्वी, तू कँवारी है?
पूर्वी नज़र नीची कर बोली: ऐसे भी क्या पूछ रहे हैं भैया? आप जानते तो हैं.

ज़ाहिर हुआ कि पूर्वी को भी किसी ने चोदा था. मैं मन ही मन ख़ुश हुआ कि चलो इस लड़की को चोदना आसान होगा. मैंने प्रार्थना की हे! भगवान एक मौक़ा दे दे मुझे इस कुड़ी को चोदने का.
समीर : नेहा, ये बता कि तुझे किसने चोदा पहली बार?
पूर्वी ने मेरी ओर इशारा कर दिया. समीर बोला: अच्छा तो ये है बहन चोद. कहाँ और कब?
नेहा: मंजुला भाभी के घर उसी वक़्त.

समीर: उसी वक़्त? वाह रे मेरे शेर, तूने दो दो चूत मार दी एक साथ. लेकिन बदमाश, तू तो कहता था कि तूने अकेली भाभी को चोदा था.
मैं: मैं क्या करता? मुझे भाभी को चोदते देख नेहा गर्म हो गयी और…
समीर: …और तूने उसे भी चोद लिया. शाबाश.
मैं: बात ये है कि… बताऊँ नेहा?
नेहा ने हाँ कहा.

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मैं: बात ये है कि बचपन से ही नेहा जल्दी गर्म हो जाती है मैंने तो तब जाना जब एक दिन…

एक दिन नेहा के घर कुछ मेहमान आए तांगा लिए जैसे तांगा रुका, घोड़े ने अपना दो फुट लंबा लंड निकाला और पेशाब किया. यश और नेहा वहाँ मौजूद थे. बारह साल की नेहा घोड़े का लंड देख उत्तेजित होने लगी उसकी पीकी गीली हो गयी वो अपनी पीकी खुजलाने लगी. रात को जब माताज़ी और पिताजी सो गये तब वो यश के पास जा कर बोली : भैया, मेरी पीकी तो देखो, कितनी सूज गयी है और गीली भी हो गयी है.
यश ने उस दिन पहली बार अपनी बहन की भोस देखी. नेहा के बदन में जवानी खिल रही थी. सीने पर बड़े नींबू की साइज़ के स्तन उभर आए थे. भोस पर काले झांट उग निकले थे. यश को मालूम था क्या करना. नेहा को लेटा कर उसने उगालियों से भोस सहलाई और क्लाइटोरिस मसली. नेहा बोली : भैया बहुत गुदगुदी होती है दो पाँच मिनट में नेहा को ओर्गेज़्म हो गया. इसके बाद बैठकर यश ने उसे समझाया कि लंड क्या है चूत क्या है चुदाई क्या है वग़ैरह.
मैं : याद है नेहा तेरा वो पहला ओर्गेज़्म?

समीर : तब से ओर्गेज़्म का मजा लेती हो तुम?
नेहा : शुरू शुरू में इतने ज़ोरदार नहीं होते थे.
समीर : अब कैसे होते हैं?
नेहा : मैं क्या कहूँ? आप ही देख लीजिए न.

समीर ख़ुश हो गया. उसके लंड ने पाजामा का तंबू बना दिया.
समीर : पूर्वी तो लंबे अरसे तक बेख़बर रही थी, क्यूं पूर्वी?
मैं : आख़िर किस ने ज्ञान करवाया?
समीर : एक बार ऐसा हुआ कि…
एक बार पूर्वी को साइकिल पर बिठा कर समीर कहीं जा रहा था कि रास्ते में एक गधी दौड़ आई. उसके पीछे गधा पड़ा था. जैसी गधी उनके पास आकर खड़ी हो गयी वैसे ही गधा ऊपर चढ़ गया और चोदने लगा. उसका दो फुट का लंड गधी की चूत में आता जाता पूर्वी और समीर दोनों देखते रहे. पूर्वी घबरा गयी और बोली : ये क्या कर रहा है? गधी मर जाएगी?
समीर ने पूर्वी के कान में कहा : घर जा कर सब समझाऊँगा.

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गधे गधी की चुदाई देख कर समीर का लंड तो खड़ा हो गया लेकिन पूर्वी पर कोई असर पड़ा नहीं. घर पहुँचे तब घर में कोई था नहीं. समीर बहुत एक्साइट हो गया था. पूर्वी की मौजूदगी की परवाह किए बिना वो बाथरूम में गया और मुठ मारने लगा. ताज्जुब हो कर पूर्वी देखती रही. उस ने पहली बार बालिग लंड देखा था, बोली : भैया इतना तेज़ी से घिसते हो तो कहीं लग जाएगा.

समीर जवाब देने के मूड में नहीं था. फ़च्छ फ़च्छ करती वीर्य की चार पाँच पिचकारियाँ छोड़ कर वो झड़ा. समीर ने उस वक़्त पूर्वी को समझाया कि चुदाई क्या है लोग क्यों करते हैं. सुनकर पूर्वी बोली: चलो ना भैया, हम दोनों चुदाई करें?

समीर: न, अभी तू छोटी हो. तेरी चूत सिकुड़ी है तू ज़रा बड़ी हो जाए, तेरी महवारी शुरू हो जाए बाद में तू चुदवा सकेगी, इनसे पहले नहीं.
पूर्वी: ऐसा? लेकिन भैया, जब मैं बड़ी हो जाऊँ तब आप ही मुझे पहली बार चोदना!
समीर: ऐसा हुआ भी सही, क्यों पूर्वी?
नेहा: समीर भैया, पूरी कहानी कही ये. कब, कहाँ, कैसे? आपने हमारी तो सुन ली है अब आपकी सुनाईये.

समीर: वक़्त आने पर कहूँगा. फिलहाल मैं देख रहा हूँ कि यश के बदन में क्रीम का प्रेशर बढ़ गया है उसका कुछ करना पड़ेगा वरना बेचारे की गन फट जाएगी
समीर सच कह रहा था. मेरा लंड तन कर लोहे जैसा हो गया था.
मैं: नेहा, हमारी चुदाई देख तुझे कुछ नहीं हुआ?
नेहा: भैया, कैसी बात करते हैं आप? मैं पत्थर की बनी हूँ क्या?
मैं: तो अब तक तू राह किसकी देख रही है? निमंत्रण चाहिए तुझे? देखती नहीं है समीर का…
समीर बीच में बोला: यश, नेहा लड़की है बुलाए बिना नहीं आएगी, क्यूं नेहा?

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