शादी किसी की चुदाई किसी की

दोस्तो, अन्तर्वासना पर यह मेरी पहली सेक्स स्टोरी है जो मेरी मौसी की लड़की की चुदाई की कहानी है. यह घटना आज से करीब दो साल पहले हुई थी. उस वक्त मैं एक शादी में गया था जहां पर मैं अपनी मौसी की लड़की से मिला.

इस हिन्दी सेक्स स्टोरी को आगे बढ़ाने से पहले में आपको अपने बारे में कुछ बताना चाहता हूं.
मेरा नाम शरद है और मैं बिलासपुर, छत्तीसगढ़ का रहने वाला हूं. मेरी हाइट 5 फीट 5 इंच है. रंग गेहुंआ है और शरीर सामान्य है.

मेरी रीयल सेक्स स्टोरी उस वक्त घटित हुई जब मैं एक दूर के रिश्तेदार की शादी में गया हुआ था. उस वक्त मैं कॉलेज में अपने द्वितीय वर्ष के एग्जाम देकर शादी में गया था. शादी में मेरी मौसी की लड़की भी आई हुई थी जिसका नाम था श्वेता.

श्वेता अपने कॉलेज के फर्स्ट इयर में पढ़ रही थी. उसकी उम्र 20 के करीब थी और उसकी हाइट लगभग 5’ 2″ रही होगी. मैंने उसके बदन को देखा तो वो काफी हॉट लग रही थी. उसका साइज 34-26-36 का था. शरीर का रंग गेहुंआ था मगर देखने में सेक्सी लग रही थी.

शादी वाले दिन की बात है. आपको तो पता ही है कि शादी में बहुत सारे रिश्तेदार इकट्ठा हो जाते हैं और सबको कहीं न कहीं एडजस्ट करना होता है. सब लोग रात को सोने के लिए जगह देख रहे थे. मैंने अपनी जगह छत पर देख ली थी.

गर्मियों के दिन थे और मौसम सुहावना था. मैं छत पर जाकर लेट गया. छत पर काफी रोशनी थी. कुछ देर के बाद श्वेता ऊपर आई. उसको भी कहीं पर सोने के लिए जगह नहीं मिल रही थी.

वो मुझसे आकर कहने लगी- शरद, मैं तुम्हारे पास ही सो रही हूं. मुझे कहीं और जगह नहीं दिखाई दे रही है.
मैंने कहा- ठीक है. सो जाओ.
उसके पास आते ही मेरा पप्पू राजा मेरी पैंट में मुंह उठाने लगा था.

श्वेता ने अपनी नाइट ड्रेस पहन रखी थी जो उसके बदन से बिल्कुल चिपकी हुई थी. वैसे तो हम दोनों में काफी खुले तौर पर बात हो रही थी लेकिन अभी तक इतने भी नहीं खुले थे कि बात सेक्स तक पहुंच जाये.

इससे पहले जब मैं और वो मिले थे तो मुझे मौसी की लड़की की तरफ इतना आकर्षण नहीं हुआ था. मगर आज तो मेरा मूड ऐसा कर रहा था कि उसकी चूचियों को मसल ही दूं. मेरा लंड मेरी पैंट को फाड़ने के लिए उतारू था.

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एक कारण यह भी था कि इससे पहले श्वेता कभी मेरे इतने करीब नहीं आई थी. वो मेरे पास ही आकर लेट गई. कुछ देर तक हम दोनों में इधर-उधर की बातें होती रहीं. उसने बताया कि उसके कॉलेज के एग्जाम महीने भर बाद शुरू होने वाले हैं.

मैंने उससे पूछा कि तुम यहां पर क्यों सो रही हो. उसने बताया कि नीचे सब जगह हाउस फुल हो गया.
यही सवाल उसने मुझसे किया तो मैंने भी कह दिया कि जिस तरह तुम्हें जगह नहीं मिली, उसी तरह मुझे भी नीचे सोने की नहीं मिली.

वो बोली- तो एक बार दोबारा से ट्राई करते हैं. क्या पता नीचे सोने की जगह मिल जाये! यहां पर बहुत मच्छर हैं. रात को नींद नहीं आयेगी.
उसकी बात मुझे सही लगी. मैं भी उसके साथ चलने के लिए तैयार हो गया.

हम नीचे दूसरे कमरे में गये, जहां सामान भरा हुआ था. उस कमरे में थोड़ी सी जगह दिख रही थी कि एक व्यक्ति लेट सके. वहां पर कुछ फालतू गद्दे चादर वगैरा भी पड़े थे.
मैंने उससे कहा कि तुम्हारे लिये तो जगह मिल गई है. तुम तो यहाँ जमीन पर बिस्तर बिछा कर सो जाओ.
इतना बोल कर मैं जाने लगा तो वो बोली- फिर तुम कहां पर जा रहे हो?
मैंने कहा- मैं वापस छत पर चला जाता हूं. यहां पर एक ही के सोने की जगह दिखाई दे रही है.

वो बोली- अरे अब रात के 1 बज गये हैं. थोड़ी ही देर की तो बात है. मेरे साथ ही लेट जाओ. हम दोनों यहीं पर एडजस्ट कर लेंगे.
उसकी बात सुन कर मेरे मन में भी हवस सी जाग गई. सोचने लगा कि शायद किस्मत भी यही चाहती है. इसलिए मैं उसकी बात पर सहमत हो गया.

जगह बहुत कम थी और हम दोनों का चेहरा आमने-सामने था. उसको सहज नहीं लगा तो वो बोली कि शरद तुम जरा ये लाइट बंद कर दो. मैं भी यही चाह रहा था. मैंने फटाक से उठ कर लाइट ऑफ कर दी.

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अभी मैं किसी तरह की पहल करने से डर रहा था क्योंकि मुझे भरोसा नहीं था कि श्वेता का रिएक्शन क्या होगा. सोचते सोचते मुझे नींद आ गयी. रात को 3 बजे के करीब अचानक से मेरी आंख खुल गई.

मैंने देखा कि श्वेता ने अपने पैरों को मेरे पैरों के ऊपर रखा हुआ था. उसकी नाइट ड्रेस जोकि एक गाउन जैसी थी, नीचे से उठ कर उसकी जांघों तक आ गयी थी. उसकी कोमल जांघें देख कर मेरा खुद पर कंट्रोल करना भारी हो गया.

धीरे से मैंने अपने हाथ को उसकी कोमल जांघों पर रख दिया. जगह कम होने के कारण हम दोनों लगभग एक दूसरे के साथ सटे हुए थे. कुछ देर तक मैंने अपने हाथ को उसकी कोमल जांघ पर ऐसे ही रखा. मेरे लंड का तन कर बुरा हाल होने लगा.

अब मैंने उसके गाऊन को धीरे से ऊपर खिसका लिया. उसकी कमर तक ले गया मैं उसके गाऊन को. उसकी कमर पर हाथ ले जाकर मैंने हाथ को वहीं पर रख दिया. मैं मन ही मन खुश हो रहा था कि मैं अपनी कोशिश में कामयाब हो रहा हूं. साथ ही इस बात की खुशी भी थी कि उसकी तरफ से कोई विरोध नहीं हो रहा था.

श्वेता अब धीरे से मेरे बदन के और करीब आ गयी और मेरे बदन के साथ चिपकने लगी. हम दोनों इतने पास आ गये कि उसका चेहरा मेरे चेहरे के करीब आ गया. मुझे उसकी सांसें अपने चेहरे पर महसूस होने लगीं. हमारे होंठ एक दूसरे के नजदीक थे.

मगर अचानक ही उसकी नींद खुली और उसने मेरे हाथों को अपने बदन से अलग कर दिया. वो उठ गयी और बाथरूम की तरफ जाने लगी. मैं सोने का नाटक करने लगा. कुछ देर के बाद वो आयी और दोबारा से मेरे पास आकर लेट गयी.

मैं अभी भी आंखें बंद करके लेटा हुआ था. मेरी गांड फट रही थी कि कहीं इसको मेरी हरकत का बुरा न लग गया हो. मैं ऐसे ही लेटा रहा. फिर कुछ देर के बाद उसका हाथ मेरे सीने पर आ गया. अब मेरी जान में जान आयी. मैंने सोचा कि वो सो रही है.

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