सेक्सी चची की चुत फाड़ दी

हैल्लो दोस्तों.. मेरा नाम रवि है और मेरी उम्र 22 साल है और में आज अपनी पहली कहानी आप सभी के सामने रख रहा हूँ.. वैसे मैंने इस साईट पर बहुत सी सेक्सी कहानियाँ पढ़ी है और वो मुझे बहुत अच्छी लगी और आज में उम्मीद करता हूँ कि यह मेरी कहानी भी आप सभी को बहुत पसंद आएगी. में एक छोटे से शहर का रहने वाला हूँ और मुझे सेक्स करना बहुत अच्छा लगता है. अब में सीधा अपनी कहानी पर आता हूँ. दोस्तों यह बात उन दिनों की है जब में गर्मियों की छुट्टियों में अपने गावं जाया करता था और चाचा के यहाँ भी जाया करता था. में कुछ दिनों के लिए चाचा के यहाँ पर ठहर गया.. मेरे चाचा ने दो शादियां की थी और वो अपनी दूसरी बीवी के साथ मतलब छोटी चाची के साथ दूसरे गावं में रहते थे और बड़ी चाची दूसरे गावं में रहती थी. बड़ी चाची दिखने में एक बहुत सुंदर औरत थी.. बड़े बूब्स, गदराया हुआ बदन, पतली कमर और मंत्रमुग्ध कर देने वाली उनकी गांड.

चाचा के दो लड़के है और वो बाहर दूसरे गावं में रहते है.. तो चाची अकेली ही गावं में रहती है और बस मेरी दादी ही उसके साथ रहती है. फिर हुआ यूँ कि एक दिन में सुबह जल्दी उठा और पेशाब के लिए बाथरूम जाने लगा तो उस समय सुबह के करीब 4 बजे होंगे और बाथरूम की लाईट चालू थी और में बिना कुछ सोचे अंदर घुस गया. तभी मैंने देखा तो सामने चाची पेशाब कर रही है और उसकी बड़ी गांड मुझे साफ साफ दिख रही थी और में बेसुध होकर देखता ही रह गया.

फिर चुपके से बाहर आया और थोड़ी देर वो खूबसूरत नज़ारा देखा और जब वो बाहर निकालने लगी तो अंजान बनकर मैंने दरवाजा खोल दिया. तो वो मुझे देख रही थी और में उन्हे. फिर मैंने होश संभाला और कहा कि मुझे पेशाब करना है. तो वो चली गयी.. लेकिन उस दिन मैंने ठान लिया कि मुझे चाची की चुदाई ज़रूर करनी है और मुझे उसकी गांड को मसलना है.. उसके बूब्स पीना है और उसकी चूत को अपने लंड से चोदना है.

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फिर सुबह उस दिन मुझे चाय देते वक़्त उनका पल्लू गिर गया और मुझे उनके बूब्स के थोड़े दर्शन हो गये और मेरा लंड खड़ा हो गया. तभी उसने कहा कि चलो चाय खत्म करो पानी गरम है चलकर नहा लो. तो मैंने कहा कि ठीक है.. तभी मैंने कहा कि आप ही मुझे नहला दो बचपन में भी आप ही करती थी. तो उसने हाँ कर दिया और में बहुत खुश हो गया और जब में नहाने बैठा तो मेरा लंड खड़ा था. तो उसने मुझसे पूछा कि क्या बात है बड़े गरम होकर आए हो तुम? तो मैंने पूछा कि कैसे? तो वो बोली कि मुझे सब समझ में आता है. मैंने फिर पूछा कि कैसे? तो उन्होंने कुछ नहीं कहा और वो मेरे बदन पर साबुन लगा रही थी और फिर मेरा लंड काबू में नहीं था.

तो उन्होंने मुझसे खड़ा होने को कहा.. मेरा लंड तो तनकर सलामी दे रहा था. तो मैंने उनको सॉरी कहा तो वो बोली कि जवानी में यह सब होता है और वो मेरे पैरों को धो रही थी. तभी अचानक उनका हाथ मेरे लंड पर पड़ा और वो बोल उठी.. हे राम इतना बड़ा तो तेरे चाचा का भी नहीं है. तो मैंने कहा कि आपने तो देखा भी नहीं है क्या मेरा देखोगी?

पहले तो वो मना करने लगी और फिर अचानक मेरा अंडरवियर नीचे करके देखने लगी तो मैंने कहा कि चाची प्लीज मुझे भी आपको देखना है.. मुझे आपकी गांड को मसलना है.. बूब्स को दबाना है और तो वो बोली और क्या करना है? तो मैंने कहा कि आपकी जांघो के बीच जो छोटी सी प्यारी सी जन्नत है उसे चाटना है. वो बोली कि नहीं. फिर मैंने कहा कि हाँ प्लीज चाची.. चाचा तो आपके साथ रहते नहीं है फिर आपको भी तो कुछ सेक्स करने के लिए चाहिए..

आप चिंता मत कीजिए आज से में ही आपकी सेवा करूंगा. तो उन्होंने कहा कि ठीक है.. लेकिन अभी नहीं रात में. फिर में बड़ी बेसब्री से रात होने का इंतज़ार कर रहा था और फिर दोपहर को खाना खाने के बाद दादी सो गयी और मैंने सही मौका देखकर उनकी गांड को पीछे से पकड़कर अपने लंड के नज़दीक लाकर मस्त तरीके से रगड़ा और अपने दोनों हाथों से दबाया.. फिर ब्लाउज को खोलकर बारी बारी से एक एक बूब्स को भी पिया. मुझे बहुत मज़ा आ रहा था.. लेकिन इसके आगे हमने कुछ नहीं किया.

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हमे पूरा मज़ा तो रात में आने वाला था और फिर धीरे धीरे शाम हो गयी और में थोड़ी देर बाहर घूमने गया और वापस आया तो मैंने देखा कि उस समय लाईट जा रही थी और चाची ने दिया जला रखा था और वो रसोई में खाना बना रही थी और दादी अपनी खटिया पर लेटी हुई थी. तो में चुपके से चाची के पीछे गया और उनकी कमर पर हाथ रख दिया.. वो एकदम से डर गयी और पीछे मुड़कर देखा. फिर मुझे देखते ही वो बहुत खुश हो गयी.. वो बोली कि और शरारत रात में.. अभी नहीं.

तो मैंने कहा कि प्लीज दरवाज़ा बंद है और दादी सोई है प्लीज़ मुझे तुम्हारी गांड दबानी है यह एकदम मस्त है. तो उसने कहा कि नहीं.. लेकिन में नहीं माना और मैंने अपना लंड बाहर निकाला और उसकी गांड पर रखकर दबाने लगा और वो भी मज़े लेने लगी. तो मैंने कहा कि में तुमसे बहुत प्यार करता हूँ और मुझे अभी तुम्हारी चूत चाटनी है. तो उसने कहा कि नहीं.. लेकिन में नहीं माना और साड़ी के अंदर घुस गया और उसकी पेंटी को सूंघने लगा.

दोस्तों वाह क्या खुश्बू थी और फिर में उसकी चूत को पेंटी के ऊपर से ही चाटने लगा तो वो मदहोश होने लगी और जांघो को मेरे सर पर दबाने लगी और वो मोन कर रही थी.. मैंने फिर उसकी पेंटी को थोड़ा साईड में किया तो उसकी दोनों जांघे मेरे मुहं तक पहुंच गई. मैंने फिर आराम से उसकी झांटो को दूर करके उसकी प्यारी सी चूत को चाटना शुरू किया वो और मोन करने लगी और में चाटे जा रहा था.

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