सेक्सी भाभी को मेरा लुंड बहुत पसंद आया

आज जो मैं कहानी आप लोगों को बताने जा रहा हूं वो मेरी पड़ोसी भाभी की कहानी है. मेरे बारे में तो आप सब लोग जानते ही होंगे. जिन लोगों को मेरे बारे में नहीं पता है उनके लिए मैं बता दूं कि मेरा नाम शुभम है और मैं नोएडा का रहने वाला हूं.

यह कहानी आज से 6 महीने पहले की है. किन्हीं कारणों के चलते मैं अपने घर से अलग रहने लगा था. जहां मैंने रूम ले रखा था वहां पर एक जोड़ा पहले ही रहता था.

उनकी शादी अभी कुछ महीने पहले ही हुई थी. बाद में बात करने पर मुझे पता चला था कि उनकी शादी 8 महीने पहले हुई थी. आते जाते उस जोड़े से मेरी जान पहचान होने लगी. उनको मैं भैया बुलाता था. वो एक कंपनी में काम करते थे. वो मुझे कभी कभी ही दिखायी देते थे.

उनकी पत्नी को मैं भाभी कह कर बुलाता था. उनसे पूछने पर पता चला कि भैया 10-12 दिन तो बाहर ही रहते हैं. उनका काम ही ऐसा था.

मुझे भाभी का व्यवहार बहुत अच्छा लगता था. वो अच्छे से बात करती थी. धीरे धीरे मेरा मन बहकने लगा था. मन करने लगा था कि भाभी की चुदाई का मौका मिल जाये तो मजा आ जाये. मगर ये ख्याल अभी मेरे मन तक ही सीमित थे.

मैं भाभी से ज्यादा खुल कर बात नहीं कर पाता था. जब भी भैया घर पर नहीं होते थे तो भाभी मुझे कभी मार्केट चलने के लिए और कभी सब्जी लाने के लिए कहती थी. मैं भी उनको बिल्कुल भी मना नहीं करता था. उनके साथ जाने के लिए हमेशा तैयार रहता था.

धीरे धीरे मेरा झुकाव भाभी की ओर बढ़ने लगा था. मैं भाभी को चाहने लगा था लेकिन डर भी लगता था इसलिए कुछ कह नहीं पाता था, जबकि भाभी मुझसे काफी खुल कर बातें किया करती थी. वो मुझसे मेरी गर्लफ्रेंड के बारे में पूछा करती थी. मैं उनको मना कर देता था कि मेरी कोई गर्लफ्रेंड नहीं है.

मैंने आपको भाभी के बारे में काफी कुछ बता दिया लेकिन उनका फिगर नहीं बताया. भाभी का नाम शिवानी (बदला हुआ नाम) था. उनका फिगर 34-30-32 का रहा होगा. उनकी उम्र भी ज्यादा नहीं थी. वो मात्र 24 साल की थी. देखने में बहुत ही मादक लगती थी. अधिक सरल भाषा में कहूं तो एकदम से सेक्सी पटाखा लगती थी.

और कहानिया   12 क्लास का लड़का अपनी भाभी का दीवाना

उनको देख कर हर किसी के मन में यही ख्याल आता था कि एक बार ये मेरे नीचे आ जाये तो पटक पटक कर चोद दूं. इसके लिए तो कुछ भी कर जाने को जी चाहता है.

कुछ ऐसा ही हाल मेरा भी था. शिवानी भाभी का सेक्सी फिगर देख कर मेरा मन भी भाभी की चुदाई के मचलने लगा था. मैं भी उनको चोदने के सपने देखता रहता था.

हम दोनों अब काफी वक्त साथ में बिता रहे थे. जितना ज्यादा मैं भाभी के करीब आ रहा था मेरी और मेरे लंड की प्यास उस सेक्सी भाभी के लिये जोर पकड़ती जा रही थी.

कभी कभी मैं भाभी को मूवी दिखाने के लिए ले जाता था. घूमना तो हर तीसरे दिन का काम हो गया था.

एक दिन मैंने भाभी से कहा- मैं आपसे एक बात बोलना चाहता हूं.
भाभी बोली- हां बोलो, क्या बोलना चाहते हो?
मैंने कहा- अगर आप बुरा न मानो तो कहूंगा.
वो बोली- शुभम, इसमें बुरा मानने वाली क्या बात है, बताओ क्या बोलना चाहते हो.

मैंने कहा- ठीक है मैं आधे घंटे में वापस आता हूं.
वो बोली- नहीं, पहले बता कर जाओ कि क्या बात करना चाह रहे थे.
मैंने कहा- भाभी थोड़ा वेट तो करो, मैं अभी वापस आ जाऊंगा.
उसने हैरानी से मेरी ओर देखा और फिर कहा- अच्छा ठीक है, लेकिन जल्दी आना.
मैंने कहा- ठीक है. बस अभी आया.

बाहर जाकर मैंने एक गुलाब का फूल और एक सोने की अंगूठी ले ली. किसी औरत या लड़की को पटाने का ये सबसे सही तरीका लगता है मुझे. इनको फूल और जूलरी बहुत पसंद होती है. इसलिए मैंने भाभी के लिए दोनों ही चीजें ले ली.

वापस आकर मैंने भाभी से कहा- आप आँखें बंद कर लो पहले.
भाभी आंखें बंद नहीं कर रही थी. बहुत कहने पर उसने अपनी आँखें बंद कीं.
फिर मैं नीचे बैठ गया.
मैंने भाभी के सामने गुलाब का फूल आगे कर दिया और आंखें खोलने के लिए कहा.

और कहानिया   पड़ोसन की चुदाई

भाभी ने आंखें खोल कर देखा और फूल देख कर मुस्कराने लगी. जैसे ही भाभी ने फूल को पकड़ने के लिए हाथ आगे किया तो मैंने भाभी का हाथ पकड़ लिया और उनकी उंगली में वो सोने की अंगूठी डाल दी.
अंगूठी डालते हुए मैंने कहा- भाभी आई लव यू. मैं आपको बहुत पसंद करने लगा हूं.

अंगूठी देख कर भाभी थोड़ा गुस्सा हो गयी. फूल देने तक तो ठीक था. वो सोच रही थी कि मैं नादानी में ऐसा कर रहा हूं लेकिन जब मैंने उनको अंगूठी पहनाई तो वो नाराज हो गयी.
वो बोली- ऐसा नहीं हो सकता शुभम. तुम जानते हो कि मैं शादीशुदा हूं. मैं तुमको पसंद करती हूं लेकिन ये रिश्ता सार्वजनिक नहीं हो सकता है.

मैंने कहा- तो मैं कब कह रहा हूं कि हम सारी दुनिया को बतायेंगे.
वो बोली- ठीक है, लेकिन ये बात केवल तुम्हारे और मेरे बीच में ही रहनी चाहिए.
मैं बोला- भाभी आप चिंता मत करो, किसी को भनक भी नहीं लगेगी हमारे प्यार के बारे में.

मेरी बात सुन कर वो थोड़ी शांत हुई. फिर उसने अंगूठी निकाल दी.
मैंने कहा- क्या हुआ भाभी, आपको मेरा तोहफा पसंद नहीं आया क्या?
वो बोली- पसंद तो बहुत आया लेकिन मैं इसको तुम्हारे भैया के सामने नहीं पहन सकती हूं.

भाभी ने अंगूठी मेरे हाथ में वापस थमाते हुए कहा- तुम इसको अपने पास ही रख लो. जब मुझे पहनने के लिए चाहिए होगी तो मैं तुमसे ले लूंगी लेकिन अभी मैं इसको नहीं पहन सकती हूं.
मैंने कहा- कोई बात नहीं.
अंगूठी को मैंने वापस अपनी जेब के अंदर में रख लिया.

मैं उठ खड़ा हुआ. मैंने भाभी के हाथ को पकड़ लिया. उनका नर्म कोमल हाथ पकड़ कर मेरे लंड में हलचल होने लगी. उनका बदन एकदम से मलाई के जैसा था. मैंने भाभी के हाथ को सहलाया.

वो मेरे हाथ से अपना हाथ छुड़ाने लगी लेकिन मैंने और जोर से पकड़ लिया.
वो बोली- कोई देख लेगा.
मैंने कहा- अभी तो आपके और मेरे अलावा यहां पर कोई भी नहीं है.

Pages: 1 2

Leave a Reply

Your email address will not be published.