सराफत की देवी

दूसरी बात मेरी बहन जो अपने को बहुत शरीफ समझती थी सोचती थी कि मेरे बारे में कोई कुछ नहीं जानता और सच था पूरे मोहल्ले और  स्कूल में उसको बहुत सीधी और शरीफ लड़की में गिनती होती थी लोग मेरी बहन के उदाहरण आज भी देते हैं इतनी सीधी शरीफ लड़की वह थी इतनी शरीफ गांव में बहुत कम लड़कियां हैं मेरी मां तो उसको शरीफ की देवी समझती थी.
आज तक मैंं भी इसी भ्रम में पड़ा रहा कि मेरी बहन बहुत शरीफ है इसीलिए मैं उससे डरता भी था लेकिन मेरा दिमाग अब धोखा खा गया था, जो लड़की किसी लड़के से इतनी बात कर सकती है, जरूर उसकेे साथ कोई नाा कोई नाजायज रिश्ता जरूर रखती होगी. मुझे इस बात का दुख नहीं था कि मेरी बहन मेरे बड़े पिताजी के नाती से गलत रिश्ता रखती है बल्कि मैै देखनाा चाहता था उनका रिश्ता कहां तक पहुंचा है. मैंं उन लोगों को रंगे हाथ पकड़ कर अपना बदला लूंगा और अपनी बहन जो शरीफ बनती है उसको उसकी औकात बताऊंगा मैं  स्कूल के बाद, सारा टाइम अपनी बहन के ऊपर ध्यान देने में लगा दिया अपनी माल यानी सीमा को को भी बता दिया तुम्हारा भाई लगता है सपना को चोदता है वह बोली मुझे भी  शक होता है, लेकिन वह इतनी शरीफ हैं कोई विश्वास भी नहीं कर सकता.
मैं देखने लगा कि विनोद मेरी बहन खाना बनाती थी उसके पास बैठकर इधर उधर की बातें करता था चुपके से पहुंच जाता था मेरी बहन जब नहाने जाती थी तो विनोद छत पर चला जाता था मैं अक्सर देखता था मेरी बहन बाल्टी में पानी लाकर आंगन में नहाती थी विनोद छत से आंगन में बहन को नहाते हुए देखता था , हाथ में किताब लिए रहता था , मैं उसको जान चुका था कि वह मेरी बहन को नहाते हुए रोज देखता है किताब तो एक बहाना था मेरे और मेरे ताऊ की छत आपस में सटी होने के कारण मैं कुछ कह भी नहींं सकता था, अगर मैं कुछ कहताा भी और देख भी लिया था लेकिन मैंं इसलिए नहीं कहां की विनोद को  भगा भी दिया जाय यहां से, लेकिन इससे  मेरी बहन इसमेंं साफ साफ बच जाएगी.
अपनी बहन के साथ उसे रंगे हाथ पकड़ना था लेकिन मेरा या ख्वाब लगता था कि पूरा नहीं होगा लगभग छह-सात महीने बीत गए मैंं भी मान लिया था कि मेरी बहन शरीफ है.  उसके पीछे विनोद ही  पड़ा है और ऐसी बातें normally मुझेेेे सुधारने के लिए कहती होगी और मां से बताती है लेकिन कहते हैं ना अगर धुआं उठा है तो आग जरूर लगी  होगी मेरा सक हकीकत में बदल गया लगभग 8 महीने बााद मुझे या सफलता भी मिल गई.
उस दिन मेरे मामा के लड़की की शादी थी मम्मी को पापा मामा के यहां पहुंचाने गए थे मैं गेहूं का खेत की सिंचाई कर रहा था मेरे दिमाग में यह बात आई कि आज मैं भी नहीं हूं घर ,,पापा कहीं शाम को आएंगे मैं टेबल को बंद किया और घर चला आया बड़े पिताजी के लड़के अपनी मां को दवा दिलाने चले गए थे और सीमा सिलाई सीखने पड़ोस के घर में चली गई थी मुझे घर पर कोई नहीं दिखा मेरी बहन आगे और पीछे दोनों दरवाजे बंद कर दिए थे.
दोस्तों एक बात बताना भूल गया मेरा और मेरे बड़े पिताजी का घर ऐसा बना है कि सामने से अलग अलग दो गेट लगे थे और पीछे सेे एक दूसरे के घर में जा सकते थे तीसरा जाने का रास्ता अगर दोनों गेट बंद थे तो हम छत पर चढ़ कर एक दूसरे केेे घर में आ जा सकतेे थे लेकिन केवल लड़का ही जा सकता है क्योंकि ऊपर जाने के लिए जीना नहीं था देवाल के सहारे चढ़ना पड़ता था.
मैं सीधे दरवाजे को ना खटखट आते हुए छत पर चढ़कर घर में घुस गया और दबे हुए पैर धीरे धीरे नीचे वाले फ्लोर में आ गया. मैं देखा विनोद नंगा बिना कपड़ों के, मेरी बहन भी बिना कपड़ोंं के पीछे वाले रूम में बेड पर सोए हुए थे विनोद मेरी बहन के चुचियों को पी रहा था उस समय नोकिया  कैमरे वाला मोबाइल मेरे पास था वह बहुत ज्यादा वीडियोो तो नहीं बना सकता था लेकिन 5-5 मिनट के कई वीडियो मैं खिड़की के पास छिपकर आराम से बना रहा था विनोद मेेेरी बहन की चुचियों को पी रहा था, मेरी बहन की लंबाई बहुत नहीं थी लेकिन उसकी गांड पीछे की तरफ निकली हुई और चूची काफी बड़ी बड़ी थी.
विनोद का लन्ड 6 इंच से कम नहीं था मेरी बहन को रगड़ रगड़ सारे रस का मजा ले रहा थाथा मेरी बहन नशे में चूर थी, मैं बहुत अच्छेे टाइम पर पहुंचा था यह लोग अभी अभी चुदाई शुरूू किए थे. विनोद मेरी बहन की चूत पर अपने  मुंह को ले गया चूत** के बाल काफी बड़े बड़े थे लेकिन विनोद को चूत चाटने में कोई फर्क नहीं पढ़ रहा था विनोद मुंह चूत पर रखते ही मानो मेरी बहन पागल हो गई हो अपने मुंह से आवाज निकालने लगी विनोद और जोर जोर से चूत* को चाटने लगा बहन विनोद के सिर को चूत** में पकड़कर दाब रही थी विनोद चूत** को ऐसे चाट रहा है जैसे कोई आइसक्रीम हो और मेरी बहन जोर जोर से सिसकियां मारकर आवाज निकाल रही थी.

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