रूम पार्ट्नर और मकान मलिक ने मेरी मा को छोड़ा

मेरा नाम मनीष है, आगे 19 है और मई अभी 12त मे पढ़ता हू. पटना मे रूम रेंट पर लेकर रहता हू. मेरे साथ रूम मे मेरा एक पार्ट्नर रहता है, उसका नाम विकाश है, आगे 19 है. शरीर से मोटा ताज़ा और एक दम बलवान है, मई उसके सामने कुछ भी नही.

हम दोनो पटना मे 12त की पढ़ाई के लिए एक रूम रेंट पर लिया. मकान मलिक बहुत अच्छे थे. उनका नाम शिवम था, आगे 65+ होगी. वो आर्मी के जवान थे, वो हमसे काफ़ी अच्छे से बात करते थे. हम उन्हे अंकल कहते थे.

हमारा घर गाओं मे था. विकाश भी हमारे ही गाओं का था. गाओं मे मेरी मा और भाई और बेहन रहते है. पापा विदेश मे कमाते है और साल मे एक बार आते है.

मेरी मा का नाम सुनीता है, आगे 38 है. मा एक हाउसवाइफ है जो सारा दिन घर का काम करती है. और हमारा कुछ खेत भी है उसका भी देख भाल करती है. पर खुद नही करती. इतना टाइम नही होता है खेती करने का.

अब कहानी पर आते है.

पटना मे मई विकाश एक रूम मे रहते थे और अंकल अकेला हमारे अगले रूम मे रहते थे. अंकल के घर वेल भी कही गाओं मे रहते थे. अंकल यहा अकेले ही रहते है.

एक दिन मे बातरूम मे नहाने के लिए गया था. तभी मेरा फोन बजा तो मैने विकाश से कहा की देख लो कों है. और मई नहाने लगा.

जब मे नहा कर निकला तो वो अभी तक बात कर था जैसे उसकी गफ़ का फोन हो. मैने विकाश से कहा अरे विकाश कों है किस से बात कर र्हे हो? उसने झट से फोन काट दिया और मुझे दे दिया. मई हैरान था आख़िर मेरे फोन से किससे इतनी देर बात कर रहा था.

मैने अपना फोन चेक किया फोन मा का था. मई हैरान था की मेरी मा से ये क्या बात कर रहा था.

फिर एक दिन मेरी तबीयत थोड़ी खराब हो गयी तो मई कोचैंग नही गया, सिर्फ़ विकाश गया. विकाश मोबाइल रूम पे ही छ्चोड़ कर चार्जिंग पर लगा कर चला गया. मुझे बोला चार्ज हो जाए तो निकल देना, मैने ओक कहा.

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मेरी मोबाइल की बॅटरी भी लो था तो मैने अपना मोबाइल चेंजिंग पर लगाया और उसका मोबाइल चलाने लगा.

मैने उसका कॉल लिस्ट चेक किया तो पता चला उसने मेरी मा की नंबर अपने फोन मे लेकर घंटो तक बात किया है. मैने उसका कॉल रेकॉर्ड सुना तो पता चला बात बहुत आयेज बढ़ गयी थी. दोनो अब सेक्स की बाते भी करने लगे थे.

विकाश मेरी मा को छोड़ना चाहता था और मा भी अब चूड़ने को रेडी थी.

अब उन्न दोनो को अब मौका मिल चुका था. मेरी तबीयत खराब था तो विकाश ने मा को फोन कर बीटीये दिया की मेरी देख भाल की ज़रूरत है. और मा अगले सुबह आ गयी.

मा मेरा पूरा ख़याल रखने लगी. विकाश भी अब खुश था. हमारे पास सोने के लिए जगह कूम थी. हमने ज़मीन पर बेड लगाया और पहले मा फिर मई फिर विकाश तीनो एक साथ सो गये.

जब सुबह जगा तो देखा मा जाग चुकी थी. उन्होने नहा धो कर खाना बना बना ली थी और विकाश कोचैंग के लिए रेडी हो रहा था.

मई जब बातरूम से आ रहा था तो देखा मेरा दोस्त मा को बाहों मे भर के किस कर रहा था. मा कह रही थी छ्चोड़ो मनीष आ जाएगा.

विकाश बोला की आने दो और देखने दो की उसकी मा को मई कैसे छोड़ता हू. फिर विकाश ने कहा रात मे तापटा रहा गया. आज छोड़ के ही रहूँगा. तुम अपनी तरफ बेड पर जगह रखना, मई वाहा आ जौंगा और तुम्हे छोड़ कर अपनी जगह पर आ जौंगा.

फिर मा बोली ठीक है पर अब छ्चोड़ो वो तुम्हारा मेरे पिच्चे चुभ रहा है. ऐसे बात सुन कर विकाश ने ज़ोर से मा को जाकड़ कर लंड पिच्चे से धक्का दे दिया. मा उूुुुुुुउउइई उूुुुउउफफ़फगफ़ आआअहह करने लगी. फिर विकाश उसे छ्चोड़ दिया और कोचैंग चला गया.

मई रूम मे आया और मा से कहा मई बाहर दावा लाने जा रहा हू. आप अंकल के रूम उनसे बात करके टाइम पास कीजिए. और मई बाहर चला गया. मई बाजार से दावा और दो छ्होटे कॅमरा लिया और रूम पर आ गया.

मा अभी भी अंकल से बात कर रही थी. मा काफ़ी घुल मिल गयी थी अंकल से. मई रूम मे जाकर च्छुपाकर कॅमरा लगा दिया और दूसरा बातरूम मे लगाया.

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रात मे मई बीच मे सोया एक चादर ओढ़ कर लिया जिसमे से मई कॅमरा का रेकॉर्डिंग देख साकु. रात मे लगभग 12 भजे विकाश मेरे पास से उठा और बातरूम मे गया. मई उस हलचल से उठ गया. फिर वो बाहर से आया और मा के बगल मे लेट गया.

मा उसके तरफ मूह घूम गयी, मा भी जागी हुई थी. विकाश ने झट से मा को बहो मे जाकड़ लिया और लीप किस करने लगा. मा भी उसका साथ दे रही थी. दोनो एक दूसरे के सरीर को सहला र्हे थे. मा अब गरम हो चुकी थी, साँसे दोनो की तेज चलने लगी.

विकाश मा की बूब्स दबाने लगा. मा उस वक्त निघट्य पहनी हुई थी, अंदर ब्रा पनटी नही पहनती है. फिर विकाश ने मा की चुचि को उपर से निघट्य मे से बाहर निकाला और चूसने लगा.

मा अपना पैर विक्ष के पैर पर रग़ाद रही थी. ओए मा के अंदर पूरी तरह आग लग चुकी थी. मा विकाश के बाल सहला रही थी. विकास का एक हाथ मा के छूट मे था.

फिर उसने मा की निघट्य जाँघ तक उठा दिया था. मा ने झट से विकाश का पंत नीचे की और उसका लंड सहलाने लगी. दोनो एक दूसरे को चूसने और चाटने लगे.

विकाश ने मा की निघट्य पूरा उपर तक किया और मा को सीधा लिटा कर मा के छूट को निहारने लगा. उसके बाद अपना लंड मा के छूट पर रखा और धीरे से घुसा दिया.

मा का मूह खुला का खुला रह गया, मा की छूट एकदम गीली थी इसलिए एक ही झटके मे लंड मा की छूट मे समा गया. जिससे मा आआआअहह उूुुुुुुुउउफफफफफफफफफफ्फ़ आआअहह.. विकाश धीरे करो, कर रही थी.

मा के दोनो पैर उपर थे और विकाश बीच मे लेट कर मा की छूट मे लंड आयेज पिच्चे कर रहा था.

मा उूुुुुुुुउउफफफफफफफफफफ्फ़ आआआआआअहह आआआआऐययईईईईईईई धीरे धीरे सस्स्सिईईईईईईई कर रही थी.

लगभग 1 घंटे बाद मा के छूट मे ही झाड़ गया और मा को चूमने लगा. मा आआहह विकाश आज तृप्ति मिली मुझे विकाश मे खुश हो गयी.

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