गाओं में रानी के सात एक लम्बी रात

मैंने अपनी जीभ से उसकी रसीली चूत को चाटना शुरू किया तो रानी जोर से चिल्ला उठी- उफ़ ऽऽ…… हाय ….. मर गई ….. इतना मत तड़पाओ न राजा … अब डाल दो अपना लंड मेरी बुर में …और मिटा दो इसकी खुजली …

मगर मैं कहाँ मानने वाला था … उसकी चूत को चूसना और चाटना मैंने नहीं छोड़ा …. गाँव की छोरी की चूत का स्वाद कुछ अलग ही होता है … करारा … !

मैंने अपनी जीभ को उसकी चूत में और अन्दर तक डाला और उसके रस को पीने लगा …

रानी बार-बार अपने चूतड़ उछाल कर मेरे मुँह पर धकेलती और मैं अपनी जीभ उसकी चूत में और अन्दर तक डालता।

मजा आ गया उसकी चूत का स्वाद ले कर .. ऐसा मजा पहले नहीं आया था .. शहर की लड़कियों की चूत , रानी की चूत के सामने कुछ नहीं थी …

बहुत देर तक रानी की चूत का मजा ले कर मैंने सोचा और रानी को अपने मूसल लंड का मजा भी दे दिया जाये ….

मैं पलटा और अपने लंड को रानी के मुँह के सामने ले गया…. बस फिर क्या था, खूंखार शेरनी की तरह रानी ने फ़ौरन मेरे लंड को अपने मुँह में ले लिया और जोर-जोर से चूसने लगी..

मैंने भी अपने लंड को उसके मुँह में पूरा अन्दर तक डाल दिया। रानी बहुत बेकरार थी और मेरे लंड के स्वाद ने उसको और भी बेकरार कर दिया था। वो पूरी तरह पनिया चुकी थी मगर मेरे लंड को बहुत मजे से चूस रही थी।

रानी ! कैसा लगा मेरा लंड?

मस्त है मेरे राजा ! आज तक ऐसा तगड़ा लंड मैंने नहीं चखा है …. आज तो लगता है मुझे बहुत मजा आने वाला है ! रानी ने कहा।

रानी मेरा लंड चूसती जा रही थी और मैं उस एहसास का मजा ले रहा था।

मैंने फैसला कर रखा था कि आज रानी की चूत और गांड दोनों को फाड़ दिया जाये और रानी को ऐसा मजा दिया जाये कि साली सारी जिंदगी याद रखे ….

इधर रानी मेरे लंड को अपनी जीभ से सहला रही थी और मैं उसकी गांड को जोर से मसल रहा था … उसकी चूचियों को तो मैं मसल-मसल कर लाल कर ही चुका था, अब बारी उसकी गांड की थी ….

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बहुत देर तक अपने लंड की चुसवा कर मैंने रानी को पीठ के बल लिटाया और सीधा उसकी केले के तने जैसे चिकनी जाँघों के बीच में आ गया। आज बहुत दिनों के बाद अपने मूसल से लंड को चूत का स्वाद चखाना था। मगर मैं रानी को थोड़ा और तड़पाना चाहता था, मैंने अपना आठ इंच के लंड तो रानी की चूत पर रखा और धीरे धीरे अपने लंड से उसकी पनियायी चूत को रगड़ने लगा.. रानी और भी उत्तेजित हो गई ….और मेरी गाण्ड में अपने नाखून गड़ा दिए…. मैंने मगर अपना लंड उसकी चूत में नहीं डाला…. और फिर से लंड उसकी चूत के ऊपर रगड़ने लगा…. मैं रानी को और भी गर्म करना चाहता था ताकि उसको रगड़ कर चोद सकूँ … पता नहीं मेरा मूसल सा लंड झेल भी पायेगी या नहीं …

लंड को उसकी चूत में रगरते-रगड़ते मैंने एक झटके से अपना आठ इंच उसके अन्दर डाल दिया…

आऽऽऽहऽऽ…… की जोर से आवाज़ आई और रानी एकदम तिलमिला उठी…… मैंने रानी को कस के पकड़ा और अपना लंड पूरा उसकी चूत में डाल दिया। रानी तड़फ़ती रही और मैंने उसको चोदना जारी रखा… सचमुच बहुत मजा आ रहा था। रानी यूँ तो पहले चुद चुकी थी मगर उसकी चूत एकदम कसी हुई थी और मेरे जैसा मूसल लंड उसमें कभी नहीं गया था… मैंने उसे अपनी बाँहों में जकड़ा और जोर से शॉट मारने लगा… उसकी चिकनी चूत की गर्मी मेरे लंड को और भी मोटा और कड़ बना रही थी.. एक तो कंटाप माल और उसकी कसी चूत…. ऊपर से मेरा मूसल सा लंड …फिर दबा कर चुदाई होनी ही थी… मैं चोदता रहा और रानी चिल्लाती रही..

इतना जोर से मत चोदो.. मैं मर जाऊँगी ….. उफ़्फ़ऽऽऽ…..आऽऽऽहऽऽ ……. ऊई ….माँ ….. ये सब रानी के मुँह से निकलता रहा और मैं उसको कस-कस कर चोदता रहा……. मैंने अपने दांत उसके चुचूकों पर गड़ा दिए और चुदाई चालू रखी ……..मुझे लगा शायद मेरा लंड पूरा अन्दर नहीं जा रहा है, एक तकिया उसकी गाण्ड के नीचे रखा और फिर शुरू हुई- रगड़म चुदाई …

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मैं उसकी चूत के अन्दर तक अपना पूरा लंड पेल रहा था और रानी मजे ले रही थी…..

रानी ने मेरी कमर पर नाखूनों के बहुत निशान बना दिए और मेरा लंड उसके चूत में और अन्दर तक जाता रहा…..

करीब चालीस मिनट की चुदाई के बाद मैंने आसन बदला और ..रानी को अपने ऊपर ले आया….

ले रानी, अब तू मुझको चोद ! देखता हूँ तुझमें कितना दम है …….

अब रानी मेरे ऊपर थी … और इस अवस्था में मेरा पूरा लंड उसकी चूत में एकदम अन्दर तक जा रहा था.. मैंने उसके दोनों झूलते हुए स्तनों को दबाना शुरू किया और रानी मेरे ऊपर अपनी कमर हिला-हिला कर अपनी चूत से मेरे लंड को चोदती रही….. मगर इस आसन में रानी को ज्यादा तकलीफ़ हो रही थी.. मैंने फ़ौरन उसकी गाण्ड को अपने हाथों से पकड़ा और जोर से उसकी चूत को अपने लंड पर दबाना शुरू किया… रानी की तो हालत ख़राब होने लगी….

मैंने कहा- क्यों रानी? अभी तो पूरी रात बाकी है ! अभी तो मुझे सुबह तक तुझे चोदना है ….तेरी कसी चूत और गाण्ड का भोंसड़ा न बना दिया तो कहना …..

रानी बस अपनी गाण्ड हिलाती रही और मुझे चूमती रही…..

थोड़ी देर बाद, मैंने रानी को फिर से पीठ के बल लिटाया और अपना लंड उसकी चूत से निकाल लिया…. तुंरत ..एक दानेदार कण्डोम लिया और अपने लंड महाराज़ को पहना दिया। देखता हूँ अब ये मेरी चुदाई कैसे सहन करती है…

बस जो मैंने उसे चोदना शुरू किया तो पूरा कमरा उसकी सिसकियों से गूंज उठा..

उह.. आह .. माँ …मर गई…धीरे चोद …मैं मर जाऊँगी…

मगर मैं कहाँ मानने वाला था ….. उसे कस कर चोदा …..

एक घण्टे तक मैं उसे चोदता रहा…. मगर अब थोडा थक गया था… मैंने सोचा थोड़ा आराम करते हैं… फिर रानी की गाण्ड मारेंगे …….

मैं कस कर उससे लिपट गया….. रानी तब तक तीन बार झड़ चुकी थी…. और लम्बी-लम्बी सांसें ले रही थी… मैंने अपना लंड बाहर निकाला तो देखा- कण्डोम फ़ट चुका था …… थोड़ा आराम करने के बाद… मैंने बोरोलीन क्रीम ली, अपने लंड पर और रानी की गाण्ड पर खूब अच्छे से लगाई……

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