रैल्गाड़ी में हुआ कुँवारी बहेन की चुदाई

वो अब तक बहुत गर्म हो गयी थी और उसके मुँह से मादक सिसकारियां निकलने लगी थीं.

कुछ ही मिनट में ही बहन की चूत ने पानी छोड़ दिया और मेरा हाथ पूरा गीला हो गया. मैंने हाथ बाहर निकाला और चाट कर साफ कर दिया.

बहन झड़ कर रिलेक्स हो गयी थी. मैंने कहा- तेरा तो हो गया, मेरा कैसे होगा?
वो बोली- जैसे आप कहोगे, मैं वैसे कर दूंगी.
मैंने कहा- मुझे तो चोदना है.
वो बोली- यहां नहीं, पहली बार है तो मैं दर्द सहन नहीं कर पाऊँगी और सब खून से खराब भी हो जाएगा.

मैंने कहा- फिर कैसे करोगी? चुदाई ही करवा लो.
वो बोली- नहीं भाई, चूत में लंड में डालने के अलावा जो बोलोगे, मैं कर दूंगी.
मैंने बोला- लंड को मुँह में ले लो और चूस लो. तुम अपनी चूत मेरे मुँह पर रख दो मैं भी तेरी चूत का मजा ले लूंगा.

वो राजी हो गई. अब हम दोनों 69 के पोज़ में आ गए.

मैंने हम दोनों के ऊपर एक चादर ओढ़ ली और उसकी सलवार को ढीला करते हुए पैंटी को नीचे सरका दी.

उसने भी मेरे लोअर और चड्डी को नीचे करते हुए मेरे लंड को हाथ में ले लिया.

मैंने उसकी दोनों टांगों को कुछ इस तरह से फैला दिया कि बहन की चूत मेरे मुँह से लग गई. मैं अपनी बहन की चूत को जीभ से चाटने लगा और वो भी मेरे लंड को अपने मुँह में लेकर चूसने लगी.

मुझे अपनी बहन से लंड चुसवाने में बेहद मजा आ रहा था. मैं अपनी गांड को हरकत देते हुए अपनी बहन के मुँह में अन्दर तक लंड देते हुए लंड चुसवाई का मजा लेने लगा था.

इधर नीचे बहन की चूत का नमकीन रस भी मुझे मस्त किए दे रहा था.

कोई पांच मिनट तक मस्त चुसाई हुई.

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फिर जैसे ही वो झड़ने वाली थी, उसकी अकड़न को महसूस करते ही मैं समझ गया था कि इसका दूसरी बार झड़ना होने वाला है. ये समझते ही मैंने बहन की चूत को चाटना छोड़ दिया.

नज़मा तड़फ कर बोली- चाटो न भाईजान … क्यों रोक दिया?
मैं- साली रंडी, भाई मत बोल … और कुछ बोल ले … नाम ले ले या जान बोल ले. साली इधर किसी ने सुन लिया तो सब गड़बड़ हो जाएगी.
वो जिद करते हुए बोली- जानू मेरी चूत चूसो न … क्यों रुक गए.

मैंने कहा- अब मुझसे मुँह से नहीं हो रहा है … तू कहे तो लंड डाल दूं?
वो बोली- डाल दे.
मैंने कहा- दर्द होगा, आवाज मत करना.
वो बोली- मेरी पेंटी मेरे मुँह में ठूंस दो और जल्दी से लंड चूत के अन्दर डाल दो.

मैंने सीधे होते हुए उसकी सलवार नीचे करते हुए उतार दी और उसकी पेंटी को निकाल कर उसके मुँह में ठूंस दिया.

वो अब नीचे से नंगी थी. मैंने उसे अपने नीचे लिटाया और लंड को बहन की चूत की फांकों पर रखकर लंड सैट कर दिया. फिर मैंने बहन से कहा- अब झेलना … मैं लंड पेल रहा हूँ.

उसकी ‘हूँ..’ की आवाज आई.

मैंने एक जोरदार धक्का मार दिया. मेरा आधा लंड बहन की चूत की झिल्ली को फाड़ता हुआ अन्दर घुस गया.
बिना कोई परवाह करते हुए मैंने एक और धक्का दे दिया. तो मेरा लंड बहन की चूत के अन्दर पूरा घुसता चला गया. मेरी बहन की तड़फ मुझे समझ आ रही थी. मैं पूरा लंड पेलने के बाद रुक गया और उसकी चूचियों को सहलाने लगा. कुछ देर बाद मेरी बहन ठीक हो गई.

मैंने बहन के मुँह से पेंटी निकाली, तो उसको बहुत दर्द हो रहा था.

वो कराहते हुए बोली- फाड़ दी मेरी चूत तूने साले बहनचोद.
मैंने उसे चूमते हुए कहा- साली बहनचोद रंडी … एक न एक दिन तो तेरी चूत फटनी ही थी … साली आज मेरे लंड से फट गयी, तो क्या हो गया.

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वो दर्द भरी हंसी हंस दी.

मैंने कहा- सच बता कैसा लग रहा है.
वो बोली- लंड बहुत मोटा है … अन्दर तक मेरी फाड़ते हुए घुस गया है.
मैंने एक ठोकर मारी और पूछा- कितनी अन्दर घुसा है मेरी जान.
वो मुझे समेटते हुए बोली- आह कुछ मत पूछो जान … बस चोदते रहो.

फिर मैंने धीमे धीमे लंड को अन्दर बाहर करना शुरू कर दिया. दस बारह झटकों के बाद मेरी बहन को भी मजा आने लगा. वो गांड उठाते हुए कामुक सिसकारियां लेने लगी.

मैंने उससे बोला- बहनचोद ये क्या हल्ला कर रही है … चुप रह … कोई सुन लेगा.
वो बोली- ठीक है … आप चोदते रहो.

फिर दस मिनट की चुदाई के बाद हम दोनों एक साथ झड़ गए. मैंने अपना सारा रस उसकी चूत में भर दिया.

मैंने पूछा- मजा आया?
वो बोली- मजा तो बहुत आया … पर आप बहुत बड़े बहनचोद हो … ट्रेन में ही चोद दिया.

मैंने कहा- मैं भेनचोद भाई तो नहीं था … लेकिन बहन की चूत चोदने मिल गई, तो बहनचोद बन ही गया हूँ. अब बता हनीमून पर चलेगी या नागपुर रूम पर ही चलना है.
वो बोली- हनीमून पर. उधर खुल कर मजा ले लेंगे. नागपुर में उतना मजा नहीं आएगा, जितना गोवा में आएगा.

मैंने अपनी बहन नज़मा को चूम लिया और उसके बाद हम दोनों एक एक करके बाथरूम में जाकर खुद को साफ़ करके आ गए.

अगली सेक्स कहानी में आप मेरी और मेरी बहन का सेक्स गोवा में हनीमून मनाते हुए लिखूंगा.

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