लुंड की प्यासी भाभी

उसने चूस-चूस कर मेरे लंड को लाल कर दिया. फिर जब मुझसे कंट्रोल नहीं हुआ तो मैंने उसको दोबारा से नीचे लिटा दिया और उसकी टांगों को चौड़ी करके उसकी चूत के छेद पर अपने लंड का टोपा रख कर उसको रगड़ने लगा.

वो तड़प उठी और बोली- बस करो, अब डाल भी दो अंदर अजय. मैं तुम्हारा लंड लेने के लिए मरी जा रही हूँ।

मैंने भाभी की चूत पर दो-तीन बार लंड को ऊपर नीचे किया तो मुझे तो जैसे स्वर्ग का सा मजा मिला. मेरा लंड भी बुरे तरीके से तना हुआ था. नसें फटने को हो रही थी. मैंने उसकी चूत पर लंड को रखा और उसके ऊपर लेटता चला गया. आह्ह … जैसे-जैसे उसकी चूत की गहराई में लंड उतरता गया मेरा मजा डबल होता चला गया. इतना सुखद अहसास कभी नहीं महसूस किया था मैंने।

मैंने पूरा लंड उसकी चूत में उतार दिया और फिर अपनी कमर को हिलाते हुए उसकी चूत की चुदाई करने लगा. आह उम्म्ह… अहह… हय… याह… आह्ह … की आवाजें दोनों के ही मुंह से निकलने लगीं. मैं तेजी से उसकी चूत को चोद रहा था. फट-फट की आवाज होने लगी. उसकी चूत की चुदाई करते हुए जन्नत में पहुंच चुका था मैं.

पांच-सात मिनट की चुदाई के बाद ही मेरा पानी निकलने की कगार पर पहुंचने को हो गया. अब मेरे लिये रूकना नामुमकिन था. मैंने तेजी से दो-तीन धक्के उसकी चूत में लगाये और मेरे लंड ने अपना माल उसकी चूत में फेंकना शुरू कर दिया. आह्ह … ओह्ह … करते हुए मैंने पूरा माल उसकी चूत में भर दिया.

फिर मैं हाँफते हुए उसके ऊपर लेट गया. वो मेरी पीठ को सहलाने लगी. मेरा लंड उसकी चूत में ही था. अभी भी मजा उतना ही था. लेकिन अब लंड का तनाव धीरे-धीरे कम होने लगा था.

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फिर जब मेरा लंड पूरा सिकुड़ गया तो मैं उसके ऊपर से उठा और मैंने देखा कि उसकी चूत से माल बाहर की तरफ बहकर आ रहा था. वो उठ कर वॉशरूम में चली गई.

तब तक मैंने अपने कपड़े पहन लिये और जब वो आई तो उसने अपने बदन पर एक तौलिया लपेटा हुआ था. वो हाथ-मुंह धोकर आई थी. फिर उसने अपने कपड़े भी पहन लिये. लेकिन जब रात को वो मेरी बांहों में लेटी हुई थी तो मैंने फिर से उसको नंगी कर दिया.

मैंने दूसरी बार बीस मिनट तक उसकी चूत चोदी. अबकी बार वो भी झड़ गई. फिर उसने कपड़े नहीं पहने और हम नंगे ही सोने लगे. फिर सुबह के करीब चार बजे मैंने उसकी चूत फिर से चोद डाली. इस तरह से उस रात मैंने तीन बार उस भाभी की चूत चोदी और वो खुश हो गई.

सुबह हुई तो उसका पति घर वापस आ गया. उस दिन वो खुशी-खुशी अपने पति की सेवा करने में लगी हुई थी.

फिर मैं अपने काम के लिए निकल गया. मगर वापस आते हुए मैं सीधा जयपुर ही निकल आया.

उसने मुझे फोन करके कहा कि जब भी मैं दिल्ली आऊं तो उससे मिल कर ही जाऊं. मैंने उसको वादा किया कि मैं जरूर मिल कर जाऊंगा.

उसके बाद मैंने लगभग चार बार उसकी चूत चोदी है. चूंकि वो दिल्ली में है और मैं जयपुर में इसलिए ज्यादा चुदाई हो नहीं पाती है लेकिन जब भी होती है मैं उसकी चूत की प्यास मस्त तरीके से बुझाता हूँ.

तो दोस्तो, यह थी मेरी आपबीती। आपको मेरी यह क्सक्सक्स कहानी पसंद आई या नहीं … मुझे मेल जरूर करें. कहानी पर कमेंट करके बतायें कि कहानी लिखने में कोई ग़लती न हो गई हो. मैं आपके लिए आगे भी ऐसी ही अपनी सच्ची कहानियां लेकर आता रहूंगा.

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