लुंड की प्यासी भाभी

उस दिन मैंने उनसे वादा किया कि वो अपना दोस्त समझ कर कभी भी मुझसे फोन पर बात कर सकती हैं. मैंने उसको विश्वास दिलाया कि वो मुझसे सब बातें शेयर कर सकती है। फिर उसने मुझसे तभी पूछ लिया- क्या आपने कभी किसी के साथ सेक्स किया है?

उसके इस सवाल पर एक बार तो मैं चुप सा हो गया लेकिन फिर कह दिया- नहीं, मैंने अभी तक किसी के साथ सेक्स नहीं किया है.
वो हंसते हुए बोली- तुम 22 साल के हो चुके हो, तो क्या तुमने अभी तक जवानी के मजे लिये ही नहीं?
मैंने कहा- अभी तक मौका ही नहीं मिला.

फिर उसने एकदम से मेरे लंड पर हाथ फेरते हुए कहा- और अगर कभी मौका मिल जाए तो?
उसका हाथ लगते ही मेरा लंड एकदम से तन गया. वैसे भी वो बहुत देर से इस टॉपिक पर बातें कर रही थी इसलिए मैंने खुद को रोका हुआ था. मगर अब जब उसने खुद ही पहल कर दी थी तो मेरा लंड खड़ा होते हुए देर नहीं लगी.

उसने मुझे देखा और मैंने उसे. हम दोनों ही सेक्स के लिए तैयार हो चुके थे. फिर वो धीरे से अपने होंठों को मेरे होंठों के पास लाई और अपने होंठों को मेरे होंठों पर रखते हुए उनको चूम लिया. मैंने भी बदले में उसके होंठों को चूसना शुरू कर दिया. देखते ही देखते दोनों के अंदर सेक्स की गर्मी बढ़ने लगी. फिर मैं जोर से उसके होंठों को काटने लगा.

मैंने उसकी पीठ पर हाथ फिराना शुरू कर दिया. उसकी ब्रा की पट्टी मुझे अपनी उंगलियों पर महसूस हो रही थी. उसके चूचे मेरी छाती पर लगे थे. मेरा लंड उसकी जांघों पर उछल-उछल कर वार कर रहा था. दोनों ही गर्म होते जा रहे थे.

फिर मैंने उसको नीचे लिटा दिया. उसकी साड़ी का पल्लू उतार दिया. उसके ब्लाउज में भरे हुए चूचे एकदम मस्त लग रहे थे. मैंने उसकी साड़ी को उसके पेट से खोल दिया. उसकी साड़ी को उतार कर एक तरफ डाल दिया. अब भाभी ब्लाउज और पेटीकोट में मेरे सामने लेटी हुई थी.

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उसके ब्लाउज के ऊपर से ही मैंने भाभी के चूचों को दबाना शुरू कर दिया.

उसके पेटीकोट को जांघों तक उठा चुका था मैं. भाभी की नंगी जांघें देख कर मन कर रहा था कि उसकी चूत को अभी फाड़ कर रख दूं लेकिन अभी उसके मजे ले रहा था.

मैंने उसे ब्लाउज उतारने के लिए कहा तो उसने ब्लाउज उतार दिया. अब वो ब्रा और पेटीकोट में थी. उसके सांवले से बदन पर लाल रंग की ब्रा बहुत ही मस्त लग रही थी. फिर उसने मेरे कहे बिना ही अपनी ब्रा भी खोल दी.

उसके मस्त चूचे नंगे होकर लटक गये. मैंने उसके दोनों चूचों को अपने हाथों में भर लिया और उनसे ऐसे खेलने लगा जैसे कोई बच्चा बॉल से खेलता है. उनको हाथ में भर कर दबाने लगा. बहुत ही नर्म चूचे थे उसके. उसके निप्पल गहरे भूरे रंग के थे. मैंने उसके निप्पलों को अपनी एक उंगली और अंगूठे के बीच में दबा कर मसला तो वो उसके मुंह सिसकारी निकल गई. आह्ह … फिर मैंने उसको नीचे लिटा दिया और खुद उसके ऊपर लेट कर उसके चूचों को अपने मुंह में भर लिया. उसके निप्पलों को चूसने-काटने लगा.

देखते ही देखते भाभी के चूचे टाइट से हो गये. उनमें कसाव सा आ गया. अब उनके साथ खेलने में मुझे ज्यादा मजा आ रहा था. फिर मैंने उसके पेटीकोट को पूरा का पूरा ऊपर कर दिया. उसने नीचे से पैंटी पहनी हुई थी. मैंने भाभी की टांगों को चौड़ी कर दिया. उसकी चूत पर पैंटी के ऊपर से ही एक किस कर दिया.

फिर मैंने भाभी का पेटीकोट उतरवा दिया. वो केवल पैंटी में मेरे सामने पड़ी हुई थी. मैंने उसकी पैंटी को खींच कर भाभी की चूत को नंगी कर दिया. फिर मैंने उसकी टांगों को खोल कर उसकी चूत को बड़े ही ध्यान से देखा.

उसकी चूत से रस सा निकल रहा था. मैंने उसकी चूत को सूंघ कर देखा तो उसमें से अजीब सी गंध आ रही थी. वो मुझे न अच्छी लगी और न बुरी. यह मेरा पहला एक्सपीरियंस था इसलिए मैं हर चीज को खोलने की कोशिश कर रहा था.

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मैंने भाभी की चूत की फांकों को छेड़ा तो वो सिहर उठी. उसकी चूत पर अपनी हथेली से मालिश करने लगा और वो पागल सी हो उठी. उसने उठ कर मुझे नीचे गिरा लिया और मेरी शर्ट के बटन खोलने लगी. फिर मेरी बनियान ऊपर उठा दी और मेरी छाती के निप्पलों को चूसने लगी.

स्स्स … पहली बार किसी महिला का मुंह मेरे निप्पलों पर लगा था. मुझे बड़ा मजा आया. फिर उसने मेरे पेट को चूमा. मैंने उठ कर अपनी शर्ट निकाल दी और फिर बनियान भी उतार दी. वो दोबारा से मेरे होंठों को चूसने लगी.

मेरी नंगी छाती पर उसके नंगे चूचे अब टच हुए तो सेक्स की आग और भड़क गई. मैंने जोर से उसके होंठों को काट लिया. उसकी गांड पर मेरे हाथ पहुंच गये थे. मैंने उसकी गांड के छेद को अपने उंगली से टटोला और फिर उसकी गांड में उंगली डाल दी तो वो उचक गई.

मेरा लंड पैंट के अंदर ही अंदर पागल हो चुका था. फिर उसने मेरी पैंट का बटन खोला और जिप खोल कर पैंट को नीचे निकलवा दिया. मेरे कच्छे में मेरा लौड़ा तना हुआ था. मेरे लौड़े ने उछल-उछल कर पानी छोड़ दिया था जो कच्छे पर भी लगा हुआ दिखाई दे रहा था.

भाभी ने मेरे कच्छे को भी खींच डाला और मेरा सात इंच का लौड़ा एकदम से उछल कर बाहर आ गया. उसने मेरे लंड को अपने हाथ में पकड़ा तो मेरे मुंह से सिसकारी निकल गई. स्स्स् …. चूस लो इसे भाभी।

मेरे कहते ही उसने मेरे लंड को अपने मुंह में भर लिया और तेजी के साथ उसको चूसने लगी. उसका मुंह तेजी के साथ मेरे लंड पर चलने लगा. आह्ह … आह्ह … हाय … बहुत मजा दे रही थी वो चुदासी भाभी. वो जिस तरह से लंड को चूस रही थी उससे ऐसा लग रहा था कि बेचारी कई सालों से लंड की प्यासी है.

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