पुराने आशिक से फिर से मज़े 1

मैं पटना से हूँ. मेरी फिगर साइज 34-32-36 की है, जो कि पहले के मुकाबले अभी थोड़ी बढ़ गयी है. मेरे पति का टूर ट्रेवल का खुद का बिजनेस है. उनका औजार सिर्फ 4 इंच का है और वो मात्र 5 मिनट तक ही चोद सकते है. इसलिए मेरे गैर मर्दों से सम्बन्ध हैं. मैं शादी से पहले 6 लंड से चुदने का मजा ले चुकी हूं, ये सभी लंड काफी बड़े बड़े थे.

ये सेक्स कहानी मेरे तीसरे यार की है जो शादी से पहले मुझे मस्त चोदता था. उसने ही पहली बार मेरी गांड मारी थी. वो पहली बार की गांड चुदाई की कहानी मैं किसी और दिन लिखूंगी. आप अभी की सेक्स कहानी का मजा लीजिए.

ये 6 महीने पहले की बात है. पति का बिजनेस दूसरे सिटी में है, इसलिए वो अधिकतर घर से बाहर ही रहते हैं. एक महीने में 2 से 3 दिन के लिए ही घर आते हैं. उन दिनों पति घर में नहीं थे और मेरी एक साल की बेटी की तबियत खराब थी. मेरी पड़ोसन ने बताया कि अपने मोहल्ले के आगे वाली सड़क पर एक नए डॉक्टर ने बच्चे का क्लिनिक खोला है … सुना था कि वो काफी अच्छा है.

मैं वहां पहुंची व बाहर अपने बच्चे को दिखाने का नंबर लगा कर बैठ गई. मैं अपनी बारी का इन्तजार करने लगी. जब मेरी बारी आई, तो मैं बेटी के साथ अन्दर गयी.

डॉक्टर मुझे देखते ही बोल पड़ा- अरे बिंदू, तुम यहाँ कैसे?

मैं भी एकदम से अवाक रह गयी कि अरे ये बशीर यहाँ कैसे.
एक मिनट तक हम दोनों एक दूसरे को यूं ही देखते रहे. मैं समझ गयी कि ये बशीर डॉक्टर बन गया है.
उसने धीमे स्वर में पूछा- तुम्हारे साथ और कौन आया है?
मैंने कहा- कोई नहीं … क्यों पूछ रहे हो?

फिर उसने अपनी कुर्सी से उठ कर मुझे गले लगा लिया. वो बोला- यार, आज भी तुम बहुत बड़ी माल दिखती हो.
मैं समझ गई कि ‘ये मेरे साथ कौन आया है..’ क्यों पूछ रहा था.

मेरे दिल की तमन्नाएं भी उफान लेने लगी थीं. लेकिन अभी मेरी बेटी की तबियत खराब थी और मुझे उसका इलाज करवाना जरूरी लग रहा था.
मैं बोली- वो सब छोड़ो … पहले मेरी बेटी को देखो … इसकी तबियत बहुत खराब है.

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उसने मेरी बेटी को गोद में लिया और बेड पर लिटा कर उसका चेकअप किया. वो बोला- कुछ नहीं … बस वायरल फीवर है … दो तीन दिन में ठीक हो जाएगी.
मैंने कहा- क्या ऐसे ही ठीक हो जाएगी? कोई दवा नहीं देनी पड़ेगी?
वो हंस दिया और बोला- अबे यार, अभी दवा दे दूँगा … उसी से ये ठीक होगी.
मैं सर हिलाते हुए अपनी मूर्खता पर शर्मिंदगी जताई.

उसने दवा को एक कागज पर लिखते हुए घंटी दबा दी और अपने स्टाफ को बुलाया.
कम्पाउण्डर जैसे ही अन्दर आया, वो बोला- अभी जितने भी पेशेंट हैं, उन सभी को बोलो कि अभी मैं बिजी हूँ. तुम थोड़ी देर बाद में सबको भेजना.

कम्पाउण्डर वहां से चला गया. मेरी बेटी बुखार में तप रही थी और वो अभी सो रही थी. अब हम दोनों बातें करने लगे.

डॉक्टर बोला- यार तेरी शादी के बाद तुम्हारी बहुत याद आती थी. तेरी जैसी माल को मैं तेरी शादी के बाद नहीं चोद पाया.
मैं बोली- वो सब पुरानी बातें हैं. अब मैं वैसी नहीं रह गई हूँ.
वो बोला- साली झूठ मत बोल … ऐसे ही तेरे चूतड़ नहीं निकले हैं, सच बोल और बता कि पति के अलावा और किसका ले रही है. अब नौटंकी छोड़ और खुल जा. वैसे भी मैंने और मेरे दोस्तों ने तुझे बहुत चोदा है.

मैं बोली- क्या यार तुम भी … अब रहने भी दो.
वो मेरा हाथ पकड़ कर बोला- मैंने तो आशा ही छोड़ दी थी कि तू मुझे वापस कभी मिलेगी. सच में तुझे मेरे लंड ने बहुत याद किया.
मैं भी तपाक से बोली- मुझे याद कर रहा था या मेरी चूत को?

इस पर वो हंसने लगा और मेरे होंठों पर किस करने लगा. मैं भी उसका साथ देने लगी. वो मेरे होंठों को चूसे जा रहा था और मेरी चूचियों को दबाने में लगा था.
मैं उसके हाथों का मजा लेने लगी. मुझे शुरू शुरू में तो कुछ अजीब सा लगा, पर बाद में मुझे उसके हाथों का स्पर्श अच्छा लगने लगा.
वो बोला- आह … आज कुछ क्विकी सा हो जाए.
मैं बोली- पागल हो क्या … यहाँ कैसे कुछ हो सकेगा? बाहर तुम्हारे इतने सारे मरीज बैठे हैं. उनका तो कुछ ख्याल करो. कहीं तुम्हारा कम्पाउण्डर ही अन्दर न आ जाए.

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हालांकि मैं भी चुदास से भर गई थी. लेकिन तब भी मुझे ऐसा कहना उचित लग रहा था. एक तो मुझे उसके कम्पाउण्डर के आ जाने का खतरा भी दिख रहा था.
डॉक्टर बोला- बात तो तेरी सही है … लेकिन एक काम तो कर दे, देख तुझे देख कर मेरा लंड कैसे टाइट हो गया. जल्दी से इसका कुछ करो.

मैंने देखा कि उसके पैंट में उसका लंड एकदम तम्बू बनाए हुए था.
मैं बोली- मैं कुछ नहीं करूंगी.
वो- साली नखरे मत कर … तू बहुत बड़ी चुदक्कड़ है, मुझे पता है.

मैं बार बार डर रही थी कि कहीं उसका स्टाफ न अन्दर आ जाए. मैंने उससे कहा भी था. उसने भी शायद मेरी इस दुविधा को समझ लिया था. उसने तुरंत उठ कर अन्दर से गेट लॉक कर दिया और दरवाजे पर ही लंड बाहर निकाल कर मुझे दिखाने लगा. उफ्फ्फ क्या मस्त लंड था उसका … मेरे मुँह में पानी आ गया. जब मैं उसके इस लंड से चुदती थी, तब उसका लंड 8 इंच और 2 इंच मोटा था. लंबाई तो अब भी वही थी, पर मोटाई बढ़ी हुई थी. अभी ये करीब 3 इंच मोटा हो गया था.

मैं लंड देख कर मुस्कुराने लगी.

वो समझ गया और बोला- बिंदू, देख तुझे देख कर उछलने लगा है. वो अपना लंड हिलाने लगा, मैं समझ गयी कि मुझे क्या करना है.

वो मेरे पास को आया, मुझे अपने पास वाली कुर्सी पर बैठा कर मेरे होंठों में लंड घिसने लगा.

वो- बिंदू तुझे याद है न … तुमने मेरे साथ कितनी मस्ती की है.
मैंने भी बोल दी- हां … सब याद है.
वो बोला- तो … चल अब शुरू हो जा … आज शनिवार है, कल रविवार. कल मेरा क्लिनिक बंद रहता है, तू कल आ जाना. कल हम दोनों मस्ती करेंगे.
मैं बोली- अभी मैं चलती हूँ.

मुझे उसे तड़पाने में मजा आता है. क्योंकि जब एक बार वो चोदना शुरू करता है, तो बिल्कुल जालिमों की तरह चोदने लगता है.

वो बोला- नहीं बिंदू … प्लीज़ इसको कम से कम शांत तो कर दे.
मैं समझ गयी कि ये मेरे मुँह को जबरदस्त चोदेगा.

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