पंजाबी जवान चुत की मस्त चुदाई

हम दोनों एसे ही एक दूसरे की बाँहों में बांहें डालकर पड़े रहे।

उसके चेहरे पर संतुष्टि के भाव थे और वो मेरे चेहरे को चूमे जा रही थी.
वो बोल रही थी- आई लव यू मेरी जान!

उसके जिस्म की गर्मी से मेरा लंड फिर से बेकाबू होने लगा और मैं उसके बदन को चूम रहा था.

वो भी गर्म होने लगी. उसकी चूत ने पानी छोड़ना शुरू कर दिया. मैंने उसकी चूत को काफी देर तक चाटा और उसका सारा पानी पी गया.
‘क्या स्वाद था उसके चूतरस का!’

जब मैंने अपना लंड उसकी चूत में डाला तो इस बार पूरा लंड एक बार में ही चूत में समा गया.

थोड़ी देर बाद उसे मैंने घोड़ी बनने को बोला और चूत को पीछे से चोदने लगा. चुदाई की कामुक आवाजें पूरे कमरे में गूँज रही थी।

इस बार वो जैसे पागल हो गयी. वो अपनी गांड को वो जोर जोर से आगे पीछे कर रही थी और लंड का स्वाद अपने अन्दर तक महसूस कर रही थी।

वो जोर जोर से सिसकारी लेने लगी- आअह्ह ह्ह्ह ओह हह्ह याह्ह हह्ह सीईईई ईईई’ वो तेजी से हिलते हुए झड़ गयी.
अभी मेरा हुआ नहीं था.

मैंने भी अपनी रफ़्तार को तेज कर दिया. कुछ मिनट की भरपूर चुदाई के बाद मैंने अपना लावा छोड़ दिया और उसके ऊपर ही निढाल हो गया।

सुबह के 4:30 बज चुके थे. एक लम्बे चुम्बन और आलिंगन के बाद मैं वापिस अपने कमरे में आ गया। उस रात की चुदाई के बाद तो जैसे मुझे चुदाई का चस्का लग गया। जब भी हमें मौका मिलता, हम दोनों खूब चुदाई किया करते।

उसके बाद तो जैसे उसके यौवन में चार चाँद लग गये. वो दिल खोल कर मुझसे चुदाई करवाती, दिन–रात जब भी मौका मिलता।

उसके कुछ महीनों बाद वो चंडीगढ़ चली गयी.
कैसे मैंने चंडीगढ़ जाकर उसको और उसकी सहेली को चोदा, वो आपको आगे की कहानी में बताऊं

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