पहला प्यार और पहली चुदाई हमेशा याद रहता है 1

फैजल और केशा अब हमारी सलवार के अंदर हाथ डाल कर हमारी चूत से भी खेलने लगे। पहले तो हमें डर लगा के सरेआम सड़क पर कोई लड़का हमारी सलवार में हाथ डाल कर खड़ा है. और ऊपर से कोई आ जाए तो क्या हो।
मगर दो दिन बाद हालात ये थे कि अगर उन्होंने हमारे सलवार में हाथ डाल रखा था, तो हमारे हाथ भी उनकी पैन्ट के अंदर थे। पहली बार किसी मर्द का कड़क लंड मैंने अपने हाथ में पकड़ कर देखा।

फैजल बोला- अभी तो सिर्फ हाथ में है, डार्लिंग। बहुत जल्दी ये तुम्हारी इस गुलाबी चूत के अंदर तक घुस कर चोदेगा तुझे। फिर देखना क्या मज़ा आता है।
मुझे भी बड़ी एक्साइटमेंट थी कि जब मैं पहली बार सेक्स करूंगी तो कैसा लगेगा।

फिर कुछ दिन बाद हमारे रिश्तेदारी में एक शादी आ गई। दुल्हन रिश्ते में मेरी बड़ी बहन लगती थी। हम शादी में गए, तो मैं सारा वक्त दुल्हन के साथ ही रही।

वहीं पर जब दुल्हन को तैयार कर रहे थे, तब आस पास बैठी कुछ औरतों ने हँसते हुये दुल्हन से ठिठोली करी- अरी शबाना, तैयार हो जा सुहागरात मनाने के लिए। दूल्हे मियां ने उस दिन बिल्ली मारनी है।
सब हंसने लगी।

मुझे समझ में नहीं आया कि यार सुहागरात को तो दूल्हा दुल्हन सेक्स करते हैं। ये साला बिल्ली मारने का क्या गेम है। बाद में पता चला कि चूत मारने को ही बिल्ली मारना कहते हैं।

फिर एक औरत ने सीख भी दी- ऐसा करना बन्नो, थोड़ा सा तेल लगा लेना, अंदर भी और बाहर भी। दूल्हा पूछे तो कहना कि मेहंदी वाली ने लगाया है। मगर तेल लगाने से तुझे आसानी होगी, आराम से काम हो जाएगा।

मैं फिर सोचने लगी, अब ये साला तेल कहाँ लगाना है। पहले तो सोचा आंटी से पूछ लूँ, फिर अम्मी भी पास में ही बैठी थी डर भी लगा कि कहीं अम्मी से ही मुझे डांट न पड़ जाए। मैं चुप रही और सबकी बातें सुनती रही।

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एक आंटी बोली- अरे रहने दे, लड़की को डरा मत, कुछ नहीं होगा बेटा, सब आराम से हो जाएगा।
दुल्हन ने थोड़ा घबरा कर उस आंटी की ओर देखा, सच में डर उसके चेहरे पर भी झलक रहा था. और उस से ज़्यादा मेरे … क्योंकि मुझे उनकी आधी बातें समझ नहीं आ रही थी. और जो समझ आ रही थी, वो मेरे मन में भी डर पैदा कर रही थी क्योंकि फैजल ने कुछ दिन मुझे सेक्स करने के लिए बोला हुआ था. जिस दिन मौका मिल गया, उसी दिन फैजल और केशा ने मुझे और शमीम को चोदने की प्लानिंग कर रखी थी।

मैं यहाँ बैठी यह जानना चाहती थी कि जब सुहागरात को दूल्हे मियां दुल्हन के साथ सेक्स करेंगे तो दुल्हन को कितना दर्द होगा।
क्योंकि मैं तो अभी तक कभी अपनी पतली सी उंगली भी अंदर डाल कर नहीं देखी थी और फैजल का मोटा और लंबा लंड मैं उसकी पैन्ट में कई बार पकड़ कर देख चुकी थी। अगर वो लंड मेरी चूत में घुसेगा तो यकीनन मेरी तो जान ही निकल जाएगी। कहीं मैं मर ही न जाऊँ।

मगर एक आंटी बोली- अरे सुन मैं बताती हूँ, कभी तुम्हें कब्ज़ हुई है?
दुल्हन ने डरते डरते हाँ में सर हिलाया।
तो आंटी मुस्कुरा कर बोली- बस उतनी सी तकलीफ होगी। कब्ज़ में सामान अंदर से बाहर आता है और सुहागरात को सामान बाहर से अंदर जाता है।
सब की सब औरतें हंसने लगी।

मगर मैं सोचने लगी ‘यार मुझे तो कभी कब्ज़ भी नहीं हुई, मैं कैसे जानूं कि सच में कितना दर्द होगा। मैं बड़े पाशोपेश में थी। मगर साली किसी औरत ने यह नहीं बताया कि सही में कितना दर्द होगा।
ये सब ने हामी भर दी कि दर्द तो होगा।

अब दर्द से मुझे हमेशा ही बहुत डर लगता है। मैं तो कभी सुई भी नहीं लगवाती थी, हमेशा डॉक्टर से खाने की गोली मांगती। चलो सुई भी छोटी सी बारीक सी होती है। मगर फैजल का लंड तो बड़ा भयंकर था।
मेरी तो गांड ये सोच सोच कर ही फटी जा रही थी कि फैजल को मज़ा आयेगा, तो वो चोद चाद कर परे होगा, मेरा क्या होगा, मैं उस दर्द को कैसे बर्दाश्त करूंगी।

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बाद में एक औरत ने ये भी कहा- चलो दर्द तो कोई बात नहीं, अगर थोड़ा बहुत खून भी निकला तो घबराना मत। पहली बार में होता है।

खून … !!!? मैं तो बुरी तरह से घबरा गई, पहली चुदाई में खून भी निकलता है। अब तो पक्का हो गया कि मैं न फैजल से चुदवाती। साला इतने मोटे लंड से अपनी चूत फड़वा कर खून निकलवा कर मुझे क्या मिलेगा।
मैंने सोच लिया, फैजल के नीचे नहीं पड़ना … चाहे कुछ हो जाए।

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