पति को मेरा तोहफा भाग 1

वो बोले- पहले वादा करो कि मुझे श्वेता की चूत दिलावाओगी, किसी भी कीमत पर?
मैंने कहा- हां, वादा करती हूं.
वो बोले- तो फिर ठीक है मेरी रानी, अब मेरा मूसल लेने के लिए तैयार हो जाओ.

इतना कह कर मेरे पति मनोज ने मेरी टांगों को चौड़ी कर दिया. अगले ही पल पैंट और अंडरवियर उतार कर नीचे से नंगे हो गये और अपने मोटे लंड को मेरी चूत के मुंह पर रख दिया.

उनके सात इंची मूसल लंड का गर्म सुपारा जब मेरी चूत पर लगा तो मैंने खुद ही उनको अपनी तरफ खींच लिया. जोर से उनके होंठों को चूसने लगी और नीचे से उनका लंड मेरी तपती हुई चूत में उतरने लगा.

जब पूरा लंड चूत में उतर गया तो मुझे तृप्ति का अहसास मिलना शुरू हो गया. अब उन्होंने अपनी गांड का रिदम बनाते हुए मेरी चूत को चोदना शुरू कर दिया. पति के लंड से चुदते हुए मेरी वासना शांत होने लगी.
हमारा यह घमासान बीस मिनट तक चला और मनोज से पहले ही मेरी चूत ने ही पानी फेंक दिया.

पच-पच की आवाज के साथ दो मिनट बाद तक वो मेरी गीली चूत को चोदते रहे और फिर वो भी मेरी चूत में पिचकारी मारते हुए मेरे ऊपर निढाल हो गये.

अगली सुबह जब उठी तो काफी फ्रेश महसूस कर रही थी. सुबह ही श्वेता की सास ने कह दिया कि हम लोग दस बजे निकल जायेंगे. मनोज को भी चलने के लिए कह देना.

मैं बोली- नहीं मौसी, मनोज की तबियत कुछ ठीक नहीं है. उनको आज थोड़ा आराम करने दो. आप मेरे जीजा जी को लेकर चली जायें.
उसकी सास ने कहा- अच्छा ठीक है. तो फिर तुम श्वेता और उसके बच्चे का ध्यान रखना. हम लोग कोशिश करेंगे की शाम होने से पहले लौट आयें.

दस बजे नाश्ते के बाद श्वेता की सास उपहार खरीदने के लिए निकल गई. घर में मैं, श्वेता और मेरे पति ही रह गये. अब मेरे लिए श्वेता को अपने जीजा यानि मेरे पति मनोज के साथ सेक्स करने के लिए मनाने की एक और चुनौती थी. मैं सोच ही रही थी कि श्वेता ने आवाज दे दी.

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उसके कमरे में गयी तो वो काम में लगी हुई थी. मुन्ना दूसरे कमरे में सो रहा था. मैं भी उसके साथ काम में हाथ बंटाने लगी. एक घंटे तक दोनों साफ सफाई के काम में लगी रहीं. उसके बाद दोनों हांफने लगी और श्वेता बोली- बस अब थोडा़ आराम कर लें.

वो कुर्सी लेकर बैठ गई. उसके स्तनों से उसका पल्लू हटा हुआ था. मैंने उसके कंधे पर हाथ रखते हुए कहा- अभी इतना काम करना ठीक नहीं है तेरे लिये, ला मैं तेरे कंधे की मसाज कर देती हूं. थोड़ा आराम मिल जायेगा.

मैं अपनी छोटी के बहन के ब्लाउज के ऊपर से ही उसके कंधों को सहलाने लगी. वो रिलेक्स होने लगी. थोड़ी ही देर में उसकी आंखें बंद होना शुरू हो गईं. मैंने अब अपने हाथों को थोडा़ नीचे तक ले जाना शुरू कर दिया.

उसके उभारों को छूकर आने लगे थे अब मेरे हाथ. वो कुछ नहीं बोल रही थी. धीरे-धीरे करके मैंने उसके चूचों को भी सहलाना शुरू कर दिया. फिर एकदम से अपने हाथ को उसके ब्लाउज में डाल कर उनको दबा दिया.
वो बोली- आह्ह … क्या कर रही है साक्षी!
मैंने कहा- छुटकी, तेरी चूचियों को मसाज दे रही हूं ताकि स्तनों में दूध की गांठ न बन जायें.

वो बोली- अच्छा, तो फिर अच्छे से कर ना मसाज!
मैं समझ गई कि उसको मजा आने लगा है.
मैंने उसके स्तनों में हाथ डाल कर उनको दबाना शुरू कर दिया.
उसके मुंह से सिसकारियां निकलने लगीं. अब मेरे हाथ मेरी बहन के चूचों को अच्छी तरह से दबा रहे थे. वो हर पल गर्म होती जा रही थी.

उसके दूध इतने बड़े थे कि मेरे हाथों में समा नहीं रहे थे. इन्हीं दूधों को देख कर उसके जीजा अपनी साली की चूत चुदाई की जिद पर अड़ गये थे, ये बात अब मुझे अच्छी तरह समझ आ गयी थी. श्वेता की आंखें बंद हो रही थीं और उसके होंठ खुलने लगे थे. उसके गुलाबी गालों पर वासनामयी गर्माहट फैल रही थी और उसके होंठों से निकल रही तपती सांसें आस पास के माहौल को और कामुक बना रही थीं.

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मैंने उसके गुलाबी ब्लाउज के ऊपर से ही उसके दूधों को दबाना शुरू कर दिया था. अब मेरी चूत में भी सुरसुरी सी पैदा हो रही थी. मन कर रहा था कि उसके ब्लाउज को उतार दूं. मैं उसकी गर्दन को चूमने लगी और साथ ही मेरे हाथ उसकी चूचियों को मस्ती में दबाने लगे.

अब हम दोनों बहनें एक दूसरे के लिए वासना की प्रतिमूर्ति बन गई थीं. श्वेता के बड़े बड़े दूधों को दबाने में मुझे भी आनंद आने लगा था. अगर मेरी जगह कोई मर्द होता तो अब तक उसके लंड का बुरा हाल हो चुका होता.

उसकी सिसकारियां कुछ इस तरह उसकी उत्तेजना को बयां कर रही थी- आह्ह … दीदी, अह्ह … ये क्या कर रही हो! अम्म … आआहस्स्… तुमने तो मसाज के बहाने मुझे गर्म कर दिया दीदी.
मैं भी सिसकारते हुए बोली- तेरा मर्द भी तो ऐसे ही तेरे दूधों को दबा कर मजे लेता होगा न? मगर आज अपनी दीदी के हाथों से मजा ले ले छुटकी.

श्वेता बोली- मेरे दूधों में पति के हाथों से इतनी मस्ती तो मैंने कभी महसूस नहीं की जितनी इस वक्त मैं महसूस कर रही हूं.
मैंने पूछा- तो फिर तेरी चूत का हाल तो इससे भी बुरा हो गया होगा.
वो बोली- हां, मेरी चूत … आह्ह मेरी चूत … दीदी … मेरी चूत तो चिपचिपी हो चली है.

मैंने कहा- तो अपनी दीदी को दिखाएगी नहीं क्या अपनी चूत?
वो बोली- तुमने गर्म ही इतनी कर दी है कि वो खुद तुम्हारे सामने आ चाह रही है.
मैंने कहा- तो फिर दिखा, मैं भी तो देखूं मेरी बहन की चूत गर्म होने के बाद कैसी लगती है!

श्वेता सिसकारते हुए मुझसे अलग हो गई और मैंने उसके चूचों से हाथ हटा लिए. जब वो उठी तो नागिन के जैसी लहरा कर उठी. मुझे पता लग गया था कि इसकी चूत को अब चुदाई के लिए तैयार करने का यह सही मौका आ गया है.

कहानी अगले भाग में जारी रहेगी.
लेखिका की मेल आईडी यहां पर नहीं दी जा रही है.

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