पति फ़ौज में पत्नी मौज में

मेरा नाम सिमरन है, जैसा की आप सभी जानते है की हम रोज़ाना एक नयी कहानी के साथ सभी को अंदर से खुश करने के लिए आते है। तो दोस्तों, आज की कहानी कुछ ज्यादा ही मज़ाएदार होने वाली है जिसमे मैं आपको बताउंगी की किस तरह से मैं अपने बॉयफ्रेंड से दबा के चुदी थी। कहानी शुरू होती है जब मैं घर पर अकेली रहा करती थी और हम शहर में नए थे। मेरे पति नेवी में थे तो वो ज्यादातर घर से बहार ही रहते थे। मेरे रहने के लिए उन्होंने यह बहुत कुछ इंतेज़ाम कर रखा था। लेकिन बस एक ज़रुरत थी मेरी जो मुझे मेरे पति से बहुत दूर ले गयी। बात है उस दिन की जब हम यह आये थे, पूरा मोहल्ला मेरे फिगर और बड़े स्तनों को देख कर लार टपका रहा था।

लेकिन मैंने किसी को भी भाव नहीं दिया। सभी लोग मेरे पति को देख कर बहुत दर रहे थे क्योकि वो पहाड़ जैसे मज़बूत शरीर वाले मर्द थे। सभी लड़को ने उन्हें देखने के बाद मेरी तरह नज़र भी नहीं डाली। यह देख कर मुझे रानी जैसा महसूस हुआ लेकिन मैं बस एक आम औरत थी। कुछ दिनों के बाद ही मेरे पति को वापिस अपनी नौकरी पर जाना पड़ा। मैं अपना मन बहलाने के लिए बाहर घूमने चली जाया करती थी लेकिन जब भी मैं बहार जाती तो मर्दो की संख्या बढ़ जाती और सभी बस मुझे देखते रहते थे। हालांकि किसी में इतनी हिम्मत नहीं थी की कोई मेरे पास आकर मुझसे मेरा नाम भी पूछ ले।

मेरे पति का खौफ सब में इतना अंदर तक बैठा था की किसी ने हिम्मत ही नहीं करि मुझसे कभी बात करने की। तभी एक रोज़ मैं बाजार से घूमके लौट रही थी और बेहद ही परेशां थी क्योकि मेने अपना पर्स खो दिया था जिसमे तकरीबन सात हज़ार रुपए थे। मैं घर आयी और अपने नौकरो को मेरा पर्स ढूंढने के लिए बोला। वो सभी मान गए और मेरा पर्स ढूंढने चले गए। तभी सभी के जाने के बाद एक लड़का मेरे घर आया और उसके पास मेरा पर्स था। मेने उससे पूछा की उसके पास मेरा पर्स कहा से आया तो उसने बताया की जब मुझसे पर्स गिर गया था तो उसने उठा लिया था। उसने मुझसे पीछे से आवाज़ भी दी थी लेकिन मेने सुनी नहीं। वो लड़का मुझे जानता था इसीलिए उसने मेरे घर आकर पर्स लौटना सही समझा।

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वो जब मुझे पर्स लौटने आया तो मैं घर पर अकेली थी मेने उसे अंदर चाय पीने के लिए बुलाया और उसने पहले मना कर के मान गया। हम दोनों ने साथ में चाय पी और काफी बात भी करी। बातो बातो में हम दोनों ने एक दूसरे का नंबर भी ले लिया और अब हमारी बाते रोज़ रातो को होती है। कुछ दिनों हम लगातार बात करते रहे और तभी मेने उसे अपने घर आने के लिए कहा। उसका नाम मोहित था और भी मेरे पति की तरह सख्त लेकिन मेरे पति से ज्यादा जवान था उम्र में भी और हवस में भी। जब भी मैं उससे बात करते थी तो मुझे उसकी आँखों में हवस साफ़ साफ़ नज़र आती थी लेकिन मैं उसे छेड़ने की लिए और ज्यादा हरकते करती थी।

वो मुझसे काफी बाते छुपता था जैसे की जब भी वो मुझे देखता तो उसकी पेंट में जो हरकत होती थी वो मुझे साफ नज़र आती थी लेकिन वो मुझे कुछ भी नहीं बताता था। कुछ दिनों की इस दोस्ती ने बहुत गहरे सम्बन्ध बना लिए थे और हम दोनों एक दूसरे को अच्छे से जानने लगे थे। तभी मोहित का जन्मदिन आया और मैं उसे मुबारक बात देने के लिए उसके घर चली गयी। हलाकि वो उस वक़्त अपने घर पर नहीं था उसके पापा ने दरवाज़ा खोला और मुझसे बात करी। उसके पापा मुझे जानते थे क्योकि वो पति के अच्छे दोस्त थे। उन्होंने मुझसे पूछा की मैं मोहित को कैसे जानती हु तो मेने उन्हें पूरी पर्स वाली बात बताई। यह बता के मैं वह से जाने ही वाली थी लेकिन उन्होंने मुझे रोक लिया यह कह कर की वो खाना खिलाये बिना मुझे वह से जाने नहीं देंगे।

मैंने भी उनकी बात मान ली और मैं वही रुक गयी। कुछ देर बाद अंकल को वह से जाना पड़ा और मैं घर पर अकेली थी तभी मोहित वह आ गया और मैंने उसे गले से लगा के जन्मदिन की मुबारक बात दी। मेने उसे गले लगा ही रखा था की मुझे बहुत अच्छे से उसकी पेंट में हुयी हरकत महसूस हुई। उसकी लम्बाई मेरे बराबर ही थी तो उसकी वो हरकत सीधा मेरी चुत पर महसूस हुयी और मुझे मदहोशी सी छाने लगी। मेने उसे तुरंत ही छोड़ दिया और कुर्सी पर बैठ गयी। तभी मोहित के पापा वह आ गए और मोहित को शाबाशी देने लगे पर्स वाली बात पर। मैं थोड़ी सी घबराई हुयी थी क्योकि मेने पिछले तीन महीनो से सम्भोग नहीं किया था। और उस हरकत के बाद मुझे सेक्स करने का बहुत मन हुआ। उसके घर खाना खाने के लिए मैं वह से जाने लगी और मोहित मुझे मेरे घर तक छोड़ने आया।

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जब मैं घर पहुंच ही गयी तो मोहित एक बार फिर से मुझसे कस के गले लगने के लिए बेताब था और मैं उससे दबा के चुदने के लिए। मेरे घर के दरवाज़े के बहार उसने मुझे बहुत ही हवस से भरी आँखों से देखा और मैं भी उसे कुछ इस तरह ही देख रही थी। तभी उसने मुझे गले से लगा लिया और मैं उसे एक बार भी रोक नहीं पायी। इस बार उसने मुझे बस गले से नहीं लगाया था बल्कि वो मुझे छोड़ने के लिए बिलकुल भी राज़ी नहीं था। वो मेरी नंगी कमर को अपने हाथो से मसल रहा था और मैंने भी उसके कंधो को पकड़ रखा था तभी उसने मुझे मेरी गर्दन पर चूमा और चूमता रहा। मैं दर गयी और मेने उसे धक्का मार के पीछे कर दिया। वो पीछे हटा और मुझसे माफ़ी मांगने लगा। हालांकि पुरे मोहल्ले में हम दोनों बस अकेले ही खड़े थे उस वक़्त लेकिन फिर भी मैं तुरंत अपने घर के अंदर चली गयी।

मोहित भी इसके बाद अपने घर चला गया। अगली सुबह वो मेरे घर आया बहुत उदास था लेकिन मैं बस उसी वक़्त नहा के निकली थी मेरे बाल पुरे गीले थे मेने बहुत ही पतली साड़ी पेहेन रखी थी मेरा ब्लाउज भी बहुत छोटा था जिसमे से मेरी कमर पूरी नंगी दिख रही थी और मेरे स्तन उछाल रहे थे जब मैं चल रही थी तो। उसने मुझे देखा और उसका विशाल और सख्त लंड खड़ा हो गया। वो पाजामे में था तो मेने उसके लंड को छोटे से बड़ा होते साफ़ साफ़ देखा। उसने एक बार फिर मुझे हवस भरी नज़रो से देखा और मेरी तरफ बढ़ा। इस बार मैं भी उसकी तरफ बढ़ी लेकिन मेने उसे धक्का देके पहले दरवाज़ा बंद किया और फिर मैं उस से ऐसे चिपट गयी जैसे मानो मैं हवस की भुकी हु। मैंने उसे कस के गले से लगा लिया और उसे लगातार चूमती रही। वो कभी मेरी नंगी कमर पर हाथ फेरता तो कभी मेरे स्तनों को कस के दबाता।

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