पैसे वसूल किया चुत छोड़ कर पड़ोसी भाभी की

अपना अण्डरवियर उतारकर मैंने अपने लण्ड पर हाथ फेरा और ढेर सी क्रीम लण्ड पर चुपड़ कर मैं रेखा की टांगों के बीच आ गया. रेखा की मांसल जांघें और ताजा ताजा शेव की गई डबलरोटी जैसी चूत मुझे आमंत्रित कर रहे थे. चूदाई का भरपूर मजा लेने के लिए मैंने रेखा के चूतड़ों के नीचे एक तकिया रखा. रेखा की चूत के होंठ फैला कर मैंने अपने लण्ड का सुपारा रखा और पूरा लण्ड एक ही बार में पेल दिया.

अपने चूतड़ चलाकर लण्ड को अपनी चूत में सेट करके बड़ी ही मादक आवाज में रेखा बोली- तुम अब तक कहाँ थे, विजय? मेरी शादी को 20 साल हो गये हैं लेकिन ऐसा लग रहा है, जैसे पहली बार चुद रही हूँ.

माहौल को सेक्सी बनाने के मकसद से अपना लण्ड रेखा की चूत के अन्दर बाहर करते हुए मैंने पूछा- पहली बार चुदी थी तो कैसा लगा था?
अपने चेहरे पर कुटिल मुस्कान लाते हुए रेखा ने बताया कि पहली बार तो मैं बिना चुदे ही चुद गई थी. चुदवाने के दो महीने बाद मैं समझ पाई थी कि मैं तो चुदी ही नहीं थी.

“बड़ी रहस्यमयी बात कर रही हो कि तुम चुद गई और दो महीने बाद तुमको पता लगा कि तुम चुदी ही नहीं थी. ऐसा कैसे हो सकता है?”
अपने चूतड़ उछाल उछाल कर मेरे लण्ड का मजा लेते हुए रेखा विस्तार से बताने लगी:

ये बात तब की है, जब मेरी शादी की डेट फिक्स हो गई और अपनी पारिवारिक मान्यता के अनुसार मैं शादी से पहले अपने ननिहाल गई, हम लोगों में शादी से पहले लड़की ननिहाल जाती है और ननिहाल के सारे खानदान से मिलकर आती है. ननिहाल के सब लोग लड़की को उपहार आदि देते हैं.

इसी परम्परा का निर्वाह करने के लिए मैं अपनी मां के साथ अपने ननिहाल गई थी. मेरे मामा बहुत साधारण व्यक्ति थे और अपने घर के बाहर वाले हिस्से में परचून की दुकान करते थे.

जब से मेरी शादी तय हुई थी, अक्सर सपनों में एक राजकुमार आता था और मेरे जिस्म से खेलता था. उन्हीं सपनों के सहारे मैं अपनी सुहागरात का तानाबाना बुना करती थी.

मामा के यहां आये हुए आज तीसरा दिन था, कल सुबह हमें वापस चलना था. मां और मामी हमारे लिए सामान खरीदने बाजार गईं तो मैं सो गई, रात को टीवी पर देर तक पिक्चर देखी थी और सुबह मां ने जल्दी जगा दिया था इसलिए मुझे नींद आ रही थी.

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सोते ही सपनों के सागर में खो गई, मेरा राजकुमार आया और हमेशा की तरह मेरे जिस्म से खेलने लगा. वो कभी मेरी चूचियों को सहलाता तो कभी मेरी चूत पर हाथ फेरता. सपना देखते देखते मैं इतना उत्तेजित हो गई कि मेरी चूत गीली हो गई. इतनी गीली हो गई कि मेरी आँख खुल गई.

आँख खुली तो मैं चौंक गई क्योंकि मैं जो सपना देख रही थी, वो महज सपना नहीं था बल्कि हकीकत था, मामा मेरे बगल में लेटे हुए थे, उनका एक हाथ मेरी चूची पर था और दूसरा मेरी पैन्टी के अन्दर था. मेरी सलवार का नाड़ा खुला हुआ था और मेरी पैन्टी में हाथ डालकर मामा मेरी चूत सहला रहे थे.

मैंने चौंकते हुए पूछा- ये क्या कर रहे हो, मामा?
“तुझे चोदने की तैयारी कर रहा हूँ.”
“दिमाग तो सही है? तुम्हें पता है, क्या कह रहे हो?”
“मुझे सब पता है, शायद तुझे नहीं पता कि शादी से पहले तेरी मां की सील भी मैंने ही तोड़ी थी.” इतना कहते कहते मामा ने अपनी उंगली मेरी चूत में डाल दी.

मैंने ना-नुकुर तो किया लेकिन हकीकत है कि मुझे अच्छा लग रहा था और मैं चुदवाने के लिए तैयार हो गई थी.

मेरी तरफ से ज्यादा विरोध न होते देखकर मामा ने अपना कमीज पायजामा उतारा और किचन से तेल की कटोरी लेकर आ गये. मामा ने अपना जांघिया उतारा और हथेली में तेल लेकर अपने लण्ड पर मलने लगे.
उस समय तो मुझे समझ नहीं थी लेकिन बाद में जान गई कि लण्ड पर तेल मल कर लण्ड की खाल को आगे पीछे करते हुए लण्ड को हिला हिलाकर मामा अपना लण्ड खड़ा कर रहे थे.

जब मामा का लण्ड टाइट हो गया तो मामा ने मेरी सलवार व पैन्टी उतार दी. मेरी चूत में चींटियां रेंगने लगी थीं. मामा मेरी टांगों के बीच आ गये और मेरी टांगें फैला कर मेरी चूत खोल दी. मामा ने अपना लण्ड हिलाते हुए मेरी चूत पर रखा. चूंकि हम लोग बुनी हुई चारपाई पर लेटे हुए थे इसलिए चारपाई में बीच में गड्ढा सा बन गया था, इस कारण मामा का लण्ड ठीक से चूत पर सेट नहीं हो रहा था, मामा ने मुझे जमीन पर खींच लिया और चटाई पर लिटा दिया.

चटाई पर लिटा कर मामा ने मेरी टांगें अपनी जांघों पर खींच लीं और मेरी चूत का मुंह अपने लण्ड के करीब ले आये. अपने लण्ड का सुपारा मेरी चूत के लबों पर रगड़ कर मामा मुझे भी उत्तेजित कर रहे थे और अपना लण्ड भी टाइट कर रहे थे.

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तभी चारपाई की तरफ हाथ बढ़ा कर मामा ने तकिया उठा लिया और मेरे चूतड़ों के नीचे रखकर मुझे लिटा दिया. घुटनों के बल खड़े मामा ने कटोरी से तेल लेकर अपने लण्ड पर लगाया और मेरी चूत के लब खोलकर अपने लण्ड का सुपारा रखकर मेरी कमर पकड़ ली.

तभी मामा के लण्ड से पिचकारी छूटी, लण्ड का सुपारा चूत के मुंह पर दबाते हुए मामा ने अपने वीर्य से मेरी चूत भर दी. यद्यपि मुझे कोई खास मजा नहीं आया था, फिर भी चुदवा लेने की बड़ी खुशी थी.

फिर मेरी शादी हो गई और सुहागरात को मीतेश कमरे में आया, दरवाजा बंद किया और अपने सारे कपड़े उतारकर बेड पर आ गया. मीतेश ने मेरी सलवार और पैन्टी उतारकर मेरी टांगें फैला दीं. मैं जब तक कुछ समझती, मीतेश ने मेरी चूत पर अपना लण्ड रखकर ठोकर मारी. मीतेश का लण्ड मेरी चूत में नहीं घुस पाया तो मीतेश ने अपने हाथ पर थूका और थूक को अपने लण्ड पर मल कर फिर से ठोकर मारी तो मीतेश का लण्ड मेरी चूत के अन्दर चला गया.
अब मुझे समझ आया कि मैं चुद गई हूँ, मामा तो कुछ करने से पहले ही टपक गये थे.

मीतेश के साथ 20 साल हो गये हैं. महीने, पन्द्रह दिन में जब उसकी इच्छा होती है, अपनी गर्मी उसी तरह से उड़ेल जाता है जैसे पीकदान में लोग थूक कर चल देते हैं. मीतेश से चुदवाना मेरे लिए वही कहावत सार्थक करता है कि खाया पिया कुछ नहीं, गिलास तोड़ा बारह आना.

रेखा की कहानी सुनने के दौरान मेरा लण्ड रेखा की चूत पर पहलवानी जारी रखे हुए था. रेखा की चूचियों से खेलते हुए मैंने उससे घोड़ी बनने को कहा तो पलटकर घोड़ी बन गई, रेखा के पीछे आकर उसके चूतड़ों को फैलाकर मैंने अपना लण्ड उसकी चूत में पेल दिया और आगे की ओर झुककर उसकी चूचियां दबोच लीं.

अपने चूतड़ आगे पीछे करते हुए रेखा मेरे लण्ड का पूरा मजा ले रही थी. रेखा की हरकतों से मुझे भी जोश आ गया और मैंने फुल स्पीड से चुदाई शुरू दी. दोतरफा धक्कमधक्का चुदाई से रेखा की चूत ने पानी छोड़ दिया, अब मेरा लण्ड फच्च फच्च की आवाज के साथ चोदने लगा. मेरे लण्ड से फव्वारा छूटा तो मैंने चुदाई रोकी नहीं बल्कि डिस्चार्ज की आखिरी बूंद तक पिस्टन चलता रहा.

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