पडोसी शादीशुदा नीतू से चुदाई जब बीवी बहार

मेरे शरीर में भी वासना भड़कने लगी, मैंने अपने दोनों हाथ उसके कंधे पर रख दिए और अपनी ओर खींचा तो वह अमरबेल की तरह मुझसे लिपट गई, उसके दोनों हाथ मेरी पीठ पर लिपट गए और मुझे भींचकर अपने स्तनों को मेरे सीने से दबाने लगी। उसका सर मेरे कंधे पर था, होंठ और नाक मेरी गर्दन पर गरम साँस छोड़ रहे थे जो मुझे रोमांचित कर रहे थे। फिर दोनों हाथों से मैं उसका सर थाम कर गालों पर माथे पर फिर होंठों पर चुंबन करने लगा अपने होठो में उसके होंठ दबाकर मसलने लगा। अब उसके सिसकारने की आवाज कमरे की शांति भंग कर रही थी, उसका शरीर ऐसे ढीला पड़ गया था कि यदि मैं उसे छोड़ देता तो वह रस्सी की तरह नीचे गिर जाती।
मैंने एक हाथ से उसकी साड़ी खोल दी और गोद में उठा लिया। उसने दोनों बाहें मेरे गले में डाल दी, उसे ले जाकर अन्दर के कमरे में पलंग पर लिटा दिया मैंने, फिर बाहर आकर उसके कमरे पर बाहर से ताला डाला और अपने कमरे को अन्दर से बंद कर लिया, वो इसलिए की यदि कोई उसके यहाँ आये तो यही समझे कि शायद नीतू कही गई होगी, हमारे यहाँ किसी के आने का कोई सवाल ही नहीं था, अब मैं निश्चिंत होकर कमरे में गया और पलंग पर पड़ी नीतू जो पलंग में सर को छुपाकर उलटी सो रही थी, यानि पीठ और गाण्ड ऊपर थी।
मैं अपने कपड़े उतारकर सिर्फ जांघिए में पलंग पर आकर उसके पास आकर लेट गया और उसकी पीठ को चूमने लगा, एक हाथ से उसके साये को ऊपर खींचकर उसके उन्नत और मांसल नितम्ब सहलाने लगा जो उसनी पेंटी में समा नहीं रहे थे।
अगर मैं गाण्ड मारने का शौकीन होता तो, तो सबसे पहले गाण्ड ही मारता लेकिन मैंने दोनों नितंबों को सहलाने और मसलने के साथ उनको पप्पी करने लगा।
अब फिर उसकी आह निकलने लगी।
फिर नीतू को चित्त लेटाकर उसका ब्लाऊज़ निकाल दिया, काली ब्रा में उसके मस्त बड़े बड़े स्तन हीरोइन नीतूसिंह के चूचों को भी मात दे रहे थे।
मैं उनको सहलाने लगा, उसने अपना हाथ आँखों पर रख लिया, शायद पहली बार उस बेशर्म को शरमाते देखा था।
फिर उसके होंठों को चूमते हुए कान और गले के आसपास गर्म होंठों से जो चुम्मे लिए तो वो मछली की तरह तड़पने लगी।
फिर मैंने उसकी ब्रा को अलग करके एक हाथ से एक संतरे को दबाकर निचोड़ना शुरु किया, दूसरे हाथ से साये के ऊपर से ही चूत का नाप लेने लगा।
काफी फूली हुई थी उसकी चूत, एकदम डबलरोटी की तरह !
दूसरे संतरे को मुंह में लेकर चूसने लगा तो वो मेरे गर्दन और पीठ पर जोरों से हाथ रगड़ने लगी।
फिर मैंने साये का नाड़ा खोलकर जैसे ही शरीर से उसे अलग किया तो उसकी चिकनी, बेदाग, दूधिया गठी हुई जांघों को देखकर तो मैं अपने होश ही खो बैठा, लगा कि इसकी चूत मारने से पहले ही लण्ड वीर्य की पिचकारी मार देगा। गनीमत थी कि कुछ देर पहले ही मुठ मार ली थी तो अब इतने जल्दी होने का डर नहीं था।
मैंने संतरों को छोड़ जांघों पर चुम्बन करना शुरु किया तो पैर के अंगूठे तक पूरा ही चूम डाला। फिर पेंटी के बगल से ही चूत पर उंगली फिराने लगा। किशमिश जैसे दाने को उंगली से रगड़ने लगा तो नीतू ने हाथ बढ़ाकर मेरी चड्डी अलग करके मेरा सात इंच का लण्ड हाथ में पकड़ लिया और उसे जोर से भींचने लगी।
मैंने कहा- नीतू जानू, जरा धीरे से पकड़ो, नहीं तो यह घायल हो जायेगा।
फिर वह धीरे धीरे सहलाते हाथ को ऊपर-नीचे करने लगी, बोली- यह तो मोटा है, मुझे दर्द होगा !
मैंने कहा- तुम चिंता मत करो ! तुम्हें दर्द का अहसास भी न होगा !
अब मैंने उसकी पेंटी को निकाल दिया और 69 की अवस्था में आकर उसकी चूत को देखने लगा। चूत एकदम गोरी थी उस पर चावल के दाने जितने लम्बे बाल थे, शायद 6-7 दिन पहले ही बनाये होंगे, ज्यादे घने नहीं थे सो गोरी खाल पर बड़े ही सुन्दर दिख रहे थे। चूत पर दाना बाहर को निकलता हुआ दिख रहा था, नीचे की फांकें ऐसे लग रही थी जैसे रस में सराबोर मुरब्बा हो !
मैंने उंगली से किशमिश जैसे दाने को छेड़ना चालू किया तो नीतू ने मेरे लिंग को जीभ से चाटना शुरु कर दिया। मैंने धीरे से दूसरे हाथ की उंगली को फांकों पर फिराते हुए उंगली को चूत के गुलाबी छेद में डाल दिया। नीतू की सीत्कार निकल गई।
अब एक हाथ से मणिमर्दन करते हुए दूसरे हाथ की उंगली छेद में अन्दर-बाहर करने लगा, उधर नीतू ने कब मेरे लण्ड को अपने मुँह में लेकर लॉलीपोप की तरह चूसना चालू कर दिया मुझे पता ही नहीं चला।
अब मेरे लण्ड ने ठुमके मारना चालू कर दिया था, नीतू बहुत गर्म और उत्तेजित हो गई थी, कहने लगी- रोनी, अब मुझसे रहा नहीं जाता, प्लीज़ डाल दो अन्दर और फाड़ दो मेरी बुर को !तो मैं घूम कर अपने चेहरे को नीतू के चेहरे के करीब ले आया और उसके रसभरे होंठों पर अपने होंठ सटा दिए, जीभ उसके मुँह में डाल दी, एक हाथ से लण्ड को पकड़कर सुपारा नीतू की चूत की गीली रसयुक्त फांकों पर फिराकर चिकना किया, फिर दाने पर रगड़ने लगा।
अब नीतू नीचे से गाण्ड उठाकर लण्ड को अपनी चूत में डालने की कोशिश करने लगी।
फिर मैंने लण्ड को चूत के छेद पर टिका करके धीरे से झटका लगाया तो नीतू की हल्की चीख निकल गई, बोली- जरा धीरे से डालो ! दर्द होता है !
मैं दूध दबाते हुए चूसने लगा, दो मिनट बाद मैंने एक जोर का झटका लगाया तो लण्ड जड़ तक चला गया।
अबकी बार नीतू दर्द को बर्दाश्त करके बोली- इतना मोटा रमेश का नहीं है, इसलिए जरा सा दर्द हो रहा है।
मैंने कहा- जानेमन, तुम्हारी चूत इतनी भी नाजुक नहीं है, यह तो इससे दोगुना मोटा लण्ड भी निगल सकती है।
अब उसका दर्द ख़त्म हो गया और गाण्ड को उचकाने लगी। मैंने भी अन्दर-बाहर करना शुरू कर दिया, साथ ही चुचूक को, जो पहले ज्यादा तनकर कड़क हो गए थे, मुँह में लेकर चूस रहा था।
उसकी सीत्कार तेज, और तेज होती जा रही थी। 2-3 मिनट में ही वो अपनी टांगें मेरी कमर से लपेटकर बदन को अकड़ाने लगी, बोली- रोनी, बहुत ही अच्छा लग रहा है ! मैं जाने वाली हूँ !
और बल खाती हुई मुझसे लिपट गई।
मैं रुक कर उसके ऊपर पसर गया, दो मिनट बाद मैंने उसको घोड़ी बनाया और गाण्ड को इस तरह से चौड़ा किया कि चूत उभर कर दिखने लगी जिसमें से रस बहकर जांघों तक आ रहा था। अपने लण्ड को उसमे चुपड़कर चूत के छेद पर रखा, फिर दोनों हाथ से मोटी चिकनी गाण्ड को पकड़कर जोर का धक्का लगा दिया। नीतू की हल्की सिसकारी के साथ पूरा का पूरा लण्ड अन्दर चला गया। मैं उसकी गाण्ड पर अपनी जांघों की ठोकर लगते हुए चोदन करने लगा, फिर एक हाथ से उसके स्तन को मसलने लगा, दूसरे हाथ से उसकी चूत के दाने को सहलाने लगा।
लण्ड का अपना काम जारी था, 4-5 मिनट में वह दूसरी बार झड़ गई और वैसी की वैसी पलंग पर गिर गई। मैं भी वैसे ही उसके ऊपर पसरा रहा। लण्ड अभी भी उसकी भोसड़ी में तन्नाया हुआ घुसा था।
मैंने उसको लेकर पलटी लगाई, अब मैं नीचे और नीतू ऊपर !
मैंने कहा- आगे अब तुम करो !
तो वह मेरे दोनों और पैर डालकर घुटने मोड़कर बैठ गई और अपने चूतड़ों को उठा-उठा कर चुदाई करने लगी।
अबकी बारी मेरी थी, मैंने कहा- नीतू, मैं जाने वाला हूँ।
तो बोली- रुको !
फिर वह चित्त लेट गई और अपने पैरों को ऊपर उठा लिया, बोली- तुम ऊपर आ जाओ और अन्दर ही डालकर झरना !
मैंने उसकी टांगों को अपने कंधे पर रखकर जो तीव्रगति से चुदाई की तो दोनों एक साथ स्खलित हो गए और एक-दूसरे से ऐसे लिपट गए जैसे दो बदन और एक जान हो। पूरी चुदाई का कार्यक्रम 20 मिनट चला होगा, लग रहा था जन्मों की प्यास बुझ गई !
थोड़ी देर बाद दोनों अलग हुए, अपने आप को साफ करने के बाद पलंग पर लेट गए, बातें करते हुए एक-दूसरे के अंगों का स्पर्शानन्द ले रहे थे, नीतू मेरा लण्ड सहला रही थी।
दस मिनट बाद मेरा लण्ड फिर खड़ा हो गया, दोनों ने एक बार फिर से चुदाई का कार्यक्रम चालू कर दिया। अबकी बार चुदाई 30 मिनट तक लगातार चली।
नीतू बोली- तुम्हारे साथ मुझे बहुत आनन्द आया और संतुष्टि मिली ! रोनी, तुम्हारा चुदाई करने का तरीका बहुत अच्छा लगा। दोपहर का समय हो रहा है, मैं अपने कमरे जा रही हूँ, रमेश के आने का समय होने वाला है।
यह कह कर वह कपड़े पहन कर चली गई।
मैं भी फिर से नहा कर रमेश के आने से पहले घूमने निकल गया।
उसके बाद मेरी बीवी के लौटने तक हम दोनों रोज छककर चुदाई करते रहे। रमेश के जाते ही नीतू मेरे पास आ जाती मेरे लण्ड से खेलते हुए अपनी चुदाई जी भर के करवाती लेकिन अपनी फरमाइश जरूर बताती और उस हिसाब से मुझसे रूपये ले जाती।मेरी बीवी के आने के बाद जब कभी भी मौका मिलता हम लोग ऐसा मौका कभी नहीं छोड़ते थे।

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