पडोसी शादीशुदा नीतू से चुदाई जब बीवी बहार

मैं पहले से शहर में किराये का मकान में रहता था, शादी के 2 माह बाद मैं बीवी को लेकर उसी मकान में आ गया। जिस मकान में मैं ऊपर की मंजिल में रहता था, वहाँ एक और दंपत्ति किराये पर रहने कुछ समय पहले ही आये थे, पति रमेश, पत्नी नीतू और एक 5 वर्ष का बच्चा मोनू।
हम दोनों किरायेदारों के पास 2-2 कमरे थे, आगे की ओर छत थी जिस पर एक बाथरूम एक टोयलेट बना था जिसे हम दोनों किरायदार इस्तेमाल करते थे, छत की सफाई भी मिलकर एक एक दिन करते थे। छत पर हमारे कमरों का मुख्य दरवाजा खुलता था जो आगे के कमरा का था दरवाजे के साथ खिड़की भी थी जिससे रोशनी और हवा आती रहती थी। हमारे पड़ोसी किरायेदार रमेश स्कूल में टीचर थे, बच्चा मोनू नर्सरी में पढ़ता था, नीतू घर का काम देखती थी।
नीतू लगभग 24 वर्ष की बहुत ही सुन्दर महिला थी जिसका फिगर 34-28-36 होगा। जितने बड़े मोम्मे उनसे बड़े गाण्ड के बड़े बड़े खरबूजे, जो चलते समय ऐसे मटकते थे कि दिल की धड़कन थम जाये। रंग गोरा, नैन कजरारे लेकिन शक्ल से भोली होने के बाद भी नीतू थी बहुत ही चालाक, अपना काम निकालना उसे बहुत अच्छी तरह आता था।
अक्सर नीतू मुझसे रूपये उधार मांगने आ जाती, मेरे पास अगर हुए तो दे दिए नहीं तो मना कर दिया। परन्तु उसको इसमें कभी शर्म महसूस नहीं हुई। वो मेरी बीवी के पास भी आकर बैठी रहती थी, कभी कभी मुझसे भी बात कर लेती, कभी हल्की-फुल्की मजाक भी कर लेती, जबकि उसका पति बहुत ही सीधा और शरीफ है। नीतू लालची किस्म की औरत थी अक्सर मियां-बीवी में रूपये-पैसे को लेकर झगड़ा होता रहता था, रमेश नीतू की मांग कभी पूरी नहीं कर पाता था।
मेरी बीवी से भी खूबसूरत होने के कारण मेरा मन हमेशा नीतू के दीदार को तरसता रहता था, उसको चोदने के सपने खुली आँखों से देखता रहता था।
उसका मर्द सुबह साढ़े सात बजे बच्चे को स्कूल लेकर जाता और दोपहर 1:30 पर घर लौटता।
एक दिन सुबहे दस बजे मैं नहाने जा रहा था, मेरी बीवी बोली- मैं बजरिया से सब्जी लेकर आती हूँ !
मैंने कहा- ठीक है ! नहाकर बाथरूम से बाहर निकला तो बाहर ही नीतू खड़ी थी, मैं तौलिया लपेटे था, कुछ झिझक सी लगी पर सोचा कि मौका अच्छा है, मैं उसे देख कर हंस दिया तो वो हंस कर बोली- रोनी जी फेरी वाला बहुत ही अच्छी साड़ी लेकर आया है, आप भाभी जी के लिए खरीद लो।
तो मैंने मना कर दिया तो बोली- मुझे साड़ी पसंद है, प्लीज़ मुझे हज़ार रूपये उधार दे दो, तीन चार दिन में इनकी तनख्वाह मिलेगी तो लौटा दूंगी।
मैंने मौका देखकर कहा- अन्दर आओ, देता हूँ !
लेकिन वो दरवाजे के बाहर ही खड़ी रही, अन्दर नहीं आई।
मैंने सोचा था कि रूपये देते वक्त तौलिया खिसका दूँगा, मुझे नंगा देखकर कुछ बात बन जाएगी पर वो तो अन्दर ही नहीं आई। मैंने रूपये बाहर आकर दे दिए, उसने साड़ी खरीद ली।
तब तक मैं कपड़े पहन चुका था, मेरी बीवी को आने में 20-25 मिनट लग सकते थे तो मैं सीधा नीतू के कमरे चला गया, पूछा- ले ली साड़ी?
वो बोली- हाँ !

और कहानिया   ये उन दिनों की बात है भाग 3

और साड़ी दिखाने लगी।
मैंने कहा- भाभी जी, पहन कर दिखाओ तो कोई बात है !
तो कहने लगी- तुम्हें क्यूँ दिखाऊँ? अपने पति को दिखाऊँगी !
मैं अपना सा मुँह लेकर आ गया, उसने मेरी और कोई तवज्जो नहीं दिया। मैंने ठान लिया कि चाहे कोई भी रास्ता अपनाना पड़े, इसकी चूत मारकर ही रहूँगा। उस दिन से ही योजना बनाने लगा कि कैसे इसे नंगा करूँ और इसके यौवन का रसपान करूँ।
रक्षाबंधन पर मेरी बीवी मायके चली गई 6-7 दिन के लिए। दो दिन तो योजना बनाने में निकल गए। हाँ, इन दो दिनों मैंने खिड़की की झिरी से उसे झाड़ू लगाते हुए देखा, उसे लगता था कि मैं सोया हुआ होऊँगा तो वह छत पर झाड़ू लगाते वक्त पूरी निश्चिंत रहती थी कि उसे कोई देख नहीं रहा होगा इसलिए बड़े ही लापरवाह तरीके से पल्लू को कमर में लपेट कर साड़ी को ऊपर चढ़ाकर कमर में खोंस कर छत की सफाई करती थी। बड़े गले के ब्लाऊज़ से उसके दिखते हुए बड़े बड़े दूध संतरे से बड़े आकार के थे, घुटनों तक चढ़ी हुई साड़ी से उसकी मखमली जांघें देखकर मेरा मन ललचा जाता।
जब वो चली जाती तो मैं बाथरूम में घुस जाता और मुठ मारकर ही बाथरूम से बाहर आता था। आखिर मैंने एक तरकीब सोच ही ली, अब जो होगा देखा जायेगा।
मैंने एटीएम से 2500 रूपये निकाले। 500 के 5 नोट थे वो भी सीरियल नंबर के। रात को घर में आकर योजना बनाने लगा। सुबह साढ़े सात पर रमेश बच्चे को लेकर स्कूल चले गए। उनके जाते ही मैंने अपने मोबाइल के वीडियो कैमरा को ऑन करके खिड़की पर इस तरह लगा दिया कि छत का दृश्य कैमरे में आ जाये। मुझे मालूम था कि नीतू अब छत साफ़ करने आएगी। मैंने उन 500 के 5 नोटों में से दो ऊपर के नंबर छोड़कर तीसरा नोट निकला यानि बीच का नोट और उसको तह करके कैमरा की पकड़ वाली जगह गिरा दिया और बाथरूम में घुस गया, झिरी में से देखने लगा। जब नीतू झाड़ू लगाने आई तो उसके चूचों को देखते हुए अपना समय बिताने लगा।
जब वह झाड़ते हुए हमारे खिड़की के पास आई और उसने नोट देखा तो फ़ौरन उठाकर अपने ब्लाऊज़ में अपने स्तनों के बीच में रख लिया और अपने काम में लग गई।जैसे ही वह सफाई करके अपने कमरे में गई, मैं बाथरूम से निकलकर अपने कमरे में आया, मोबाईल का कैमरा बंद किया और उसके कमरे में चला गया। मैंने कहा- भाभी जी, मेरा 500 का नोट गिर गया है, क्या आपको मिला?
तो नीतू बोली- नहीं ! यही तो मैं चाहता था, मैंने कहा- शायद छत पर ही गिरा था, घर में तो कहीं नहीं मिला। तो वो कुछ गुस्से से बोली- जहाँ गिरा है, वहाँ ढूंढो, मुझसे क्यों पूछ रहे हो?
मैंने कहा- तुमने ही अभी सफाई की है, इसलिए पूछ रहा हूँ !
तो वह अपना पल्लू ठीक करने लगी और अपने ब्लाऊज़ को ढकने लगी।
मैंने फ़ौरन कहा- भाभी जी, आपके ब्लाऊज़ में मेरे को 500 का नोट दिख रहा है, प्लीज़ मेरा नोट लौटा दो !
तो बोली- नहीं मेरे ब्लाऊज़ में कुछ नहीं है !
मैंने कहा- लेकिन मेरे को दिख रहा है।
तो बोली- यह तो मेरा है, रमेश ने दिया था।
मैंने कहा- मेरे पास इस बात का सबूत है कि तुमने वह नोट उठाया है।
तो बोली- क्या सबूत है?
मैंने कहा- आओ दिखाता हूँ !
मैंने मोबाइल मे वो वीडियो चला कर उसे दिखाया जिसमें उसने नोट को उठाकर ब्लाऊज़ में रखा था।
उसे देखकर भी उस पर कोई फर्क नहीं पड़ा, बोली- मेरा यह नोट शायद छत पर गिर गया होगा सो मिल गया है, मैंने रख लिया।
बहुत ही घाघ औरत थी वह इसीलिए मैंने भी दूसरा सबूत भी बना रखा था, मैंने आखिरी दाव खेला- नीतू, यदि तुम ऐसे नहीं मानोगी तो मैं तुम्हारे पति से शिकायत करूँगा और मकान मालिक से कहूँगा कि तुम चोरी करती हो ! इस बात का दूसरा सबूत भी मेरे पास है।
बोली- क्या सबूत है?
मैंने कहा- वो तो अब सबके सामने ही बताऊँगा !
तो बोली- बताओ क्या सबूत है?
मैंने कहा- इस नोट को निकालो !
उसने नोट निकाला।

Pages: 1 2 3

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

shares