मम्मी की नंगी बदन पे मालिश

हेलो दोस्तो,

राहुल मल्होत्रा का नमस्कार, मैंने कई कहानी लिखी, पहले अंग्रेजी में और अब हिंदी में, सिर्फ आप्लोगो के मनोरंजन के खातिर, सेक्स यानी काम कोई गंदा काम क्रिया नहीं है बल्कि ये एक सुखद एहसास है जोकि दो लोगो के बीच बनता है, हालांकि दो से अधिक लोग भी काम क्रिया में शामिल होते है, सेक्स की क्रिया मानसिक स्थिति को दर्शाता है ना कि सिर्फ शारीरिक स्थिति को, तन और मन से जो मजबूत होगा वहीं काम क्रिया में सफल हो सकता है, यहां पर सफलता का अर्थ अपने बेड पार्टनर को संतुष्ट करने से है। पिछले एक साल से मुझे चूत का दर्शन हुआ है और मैंने अपनी बहन हो या मां या मां की सहेली या बहन की सहेली किसीको चोदने से बाज नहीं आया है और मुझे कोई शर्म नहीं है ये कहते हुए की मै सेक्स मै कोई भेद भाव नहीं करता, लड़की हो या औरत, गोरी हो या काली, मोटी हो या पतली, उम्र में मुझसे बड़ी हो या छोटी, मेरे लिए कुछ मायने नहीं रखता, सिर्फ उनके जिस्म को चूमता हू, चूची को चूसता हूं, बुर को चाटता हू तो बुर और गान्ड को चोदता हूं।

आज सुबह जब मै सोकर जगा तो पापा काम के लिए तैयार हो रहे थे, मै बाथरूम जाकर फ्रेश हुआ और फिर मेरी सेक्सी मम्मी मेरे लिए एक कप चाय बनाई, पापा घर से निकल चुके थे तो मम्मी मेरे सामने चाय का प्याला रखने के लिए झुकी तो मेरी नजर उनकी चूची पर पड़ गई, जोकि डीप गले की ब्लाऊज से बाहर आ गई और मै मम्मी की चूची को निहारता हुआ अपने ओंठो पर जीभ फिरा तो वो कुछ देर तक तो झुकी ही रही और फिर मेरे बगल में बैठकर गाल को पुचकारी….. “क्या बे मादरचोद, चूची को देख मुंह में पानी आ गई. ” तो मै चाय पीता हुआ एक हाथ उसके स्तन पर लगा दिया और ब्लाऊज पर से ही चूची को दबाने लगा….. “मुंह में पानी तो आ ही गई रण्डी आज तुमको दिन भर चोदता हूं. ” तो वो मेरे बरमूडा पर से लंड के उभार को सहलाने लगी….. “१५-२० मिनट की तो ताकत है तेरे लंड मै चला दिन भर चोदने. ” और वो मेरे बरमूडा को कमर से नीचे करने लगी, जब तक मै चाय पीता, नेहा मेरी चुद्कर मां जमीन पर बैठकर लंड को चूमने लगी, मेरा लन्ड अर्ध रूप से खड़ा था तो वो मेरे लंड को हिलाते हुए मेरे मोटे जांघ को चूमने लगी, अब मेरा लन्ड खड़ा होने लगा तो नेहा मेरे जांघ से पैर तक को चूम ली और अब लंड को जड़ से थामकर चूमने लगी तो मेरा चाय पीना समाप्त हुआ और मै उठकर अपने रूम की ओर गया, वापस एक बिस्तर लेकर आया और जमीन पर बिछाकर मम्मी को निहारा तो वो समझदार औरत की तरह सोफ़ा पर से उठी और किचन की ओर चली गई। अब वो तेल की शीशी और मख्खन की टिकिया लेकर आई, दो तकिया भी बिस्तर पर था ! नेहा साड़ी, बिन बाहों कि ब्लाऊज, डीप गले से चूची के ऊपरी भाग दिख रहे थे साथ में साया पहन रखी थी।

और कहानिया   माँ को दिया पति का सुख

नेहा को बेड पर लिटाकर उनको निहारने लगा और उनके सीने पर से साड़ी उतार दिया, उनकी सांसों के साथ चूची की उफान देखने लायक थी तो मै अब साड़ी को उसके बदन पर से उतार दिया और उसके ऊपर झुककर ओंठ गाल चूमता हुआ स्तन मसलने लगा, उसके रसीले ओंठ को चूसता हुआ जोर ज़ोर से चूची मसल रहा था तो वो”आह ओह उम् राहुल धीरे धीरे चूची दाबो ना ” और फिर वो अपना जीभ मेरे मुंह में घुसा दी तो मै मम्मी की जीभ चूसता हुआ स्तन को दबा रहा था, कुछ देर बाद वो जीभ को बाहर की तो मै उसको करवट करके ब्लाऊज की डोरी को खोलने लगा, अब बिन ब्रा के चूची नग्न थी तो मै चूची को पकड़ कर जीभ से चाटने लगा, चूची की नीपुल को जीभ से चाटने लगा तो वो सिसक रही थी। मै चूची को मुंह में लेकर चुभलानें लगा और वो तड़प रही थी, दोनों चूची को चूस चूस कर लाल कर दिया और अब साया के नाड़ा को खोलने लगा, आहिस्ते से साया को कमर से नीचे करने लगा तो अब मेरी मम्मी नेहा पूर्ण रूप से नग्न थी। मै अपनी मम्मी नेहा के साथ नग्न था, अब मै उसके पेट पर झुका और चूमने लगा, उसके कमर तक को चूम कर नीचे की ओर जाने लगा। नेहा अपने दोनो मोटे जांघ को एक दूसरे पर चढ़ा करके बुर रानी को छुपा रही थी, तो मै उसके जांघ को चूमने लगा और उसकी जांघें दो दिशा में होने लगी। अब नेहा की बुर को चूमने लगा और उसकी चोड़ी दरार में नाक लगाकर बुर को सूंघने लगा, फिर उसके बुर को उंगली की मदद से फालकाया और जीभ से बुर चाटने लगा, मम्मी की बुर की लचक ऐसी थी कि वो एक साथ दो लंड आराम से चूत में ले सकती थी, वैसे एक बार मै और याकूब मम्मी की चूत में अपना लन्ड एक ही साथ डाले थे, खौर फिलहाल तो कुते की भांति मम्मी की बुर को चाटता रहा और जोर जोर से स्तन मसल रहा था, वो सिसक रही थी… “अबे मादरचोद सिर्फ बुर चाटेगा ही या चोद भी सकते हो. “तो मै बुर के फांक को मुंह में भरकर चूसने लगा और नेहा तड़पने लगी।

और कहानिया   मुंबई की यादगार सफर भाग 2

मै बाथरूम से वापस आया तो मम्मी नेहा नंगे ही बाथरूम चली गई, अब मै जमीन पर बिछे बिस्तर पर बैठ गया तो नेहा फ्रेश होकर आई और उसे बिस्तर पर चित लेटा दिया, उसके गोल गुंबदाकार चुतर के ऊपर हाथ फेरने लगा, अब मै नेहा के जिस्म पर सवार होकर उसके पीठ चूमने लगा, उसके पीठ से कमर तक को चूमता हुआ अब चुतर को चुंबन देने लगा तो वो सिसक रही थी…… “ओह उम्म आह राहुल अब चोदो ना

(राहुल) चुपकर साली अभी तेरी बदन कि मालिश करूंगा फिर चोदूंगा। ” अब मै उनके गान्ड को चूमता हुआ गान्ड के फांक को थोड़ा अलग किया और अपने जीभ को गान्ड के दरार में घुमाने लगा, उसके गान्ड के मुहाने को जीभ से चाटने लगा फिर उसको पट लिटाया। नेहा के जिस्म पर दो भेपर लाईट समान चूची को देखता हुआ तेल की शीशी खोला और फिर उनके चूची पर तेल चुवाया, साथ ही उनके गर्दन और सपाट पेट से कमर तक तेल गिराकर अब एक हाथ उनके चूची पर लगाकर मालिश करने लगा तो दूसरा हाथ उनके सपाट पेट से कमर तक फिसल रहा था, नेहा की बदन तेल से चमकने लगी तो मै उनके जांघ से पैर तक की मालिश किया और बोला….. “अबे रण्डी अब पट हो जा वो पट हो गई) पता नहीं चोदेगा भी की सिर्फ आरती ही उतारता रहेगा.

(राहुल) अभी पता चलेगा बे कूत्ती. ” और मै नेहा के पीठ से गान्ड तक तेल गिराकर हथेली से मालिश करने लगा, अब उसकी गान्ड में तेल लगाकर उंगली करने लगा, कुछ देर बाद नेहा को चित किया और उनके जांघों के बीच लंड पकड़कर बैठ गया, अब उनके बुर में सुपाड़ा सहित आधा लंड पेला और कमर थामकर एक जोर का झटका बुर में दिया, लेकिन लंड की दिशा थोड़ी तिरछी थी, और नेहा चिनख़ उठी…. “ओह आह उई मां कितना मोटा लंड है तेरा. “मै नेहा को चोदता हुआ उसके जिस्म पर सवार हो गया ेऔर फिर उसके ओंठ चूमता हुआ तेल से सने बदन पर लेट तेज चुदाई करने लगा, ेवो साली ेअपने चूतड़ को उछालने लगी, मेरा लन्ड तेजी से ेअंदर बाहर होने लगा और १० मिनट के बाद मै चिनख़ पड़ा….. “आह ेये लो बे पीला लो अपने बुर को रस. ” मेरा लंड बुर में रस फेंक दिया ेऔर दोनों शांत हो गए!

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

shares