मुंबई की यादगार सफर

आपके काफ़ी ईमेल मिले तथा तीन सौ से अधिक फेसबुक फ्रेंड रिक्वेस्ट मिली, मेरा दिल खुश हो गया। मैंने लगभग हर मैसेज और मेल का जवाब देने की कोशिश की है पर अगली कहानी शुरू करने के पहले मैं कुछ बात आपसे करना चाहूँगा जो आप सभी के कुछ सवाल हैं और उनका जवाब है।

पहली बात यह है कि मेरी कहानी पूरी सच्ची कहानी है, उसमें कोई लाग लपेट या झूठ नहीं है कहीं भी, जो हुआ था मैंने वही लिखा था तो कृपया यह सवाल फिर से ना करें कि घटना सच्ची है या झूठी। मेरी 48 कहानियाँ हैं जो सभी पूरी सच्ची हैं और मैं उन्हें लिखूँगा।

मेरी दूसरी बात ! अगर आप मुझे फ्रेंड रिक्वेस्ट भेजें तो आपके नाम से भेजे किसी दूसरे के या छद्म नाम से भेजे वो आपकी सोच है पर मेरी महिला मित्रों के नम्बर मांगने के लिए लिंग परिवर्तित कर के किसी लड़की के नाम से मेरे पास रिक्वेस्ट ना भेजिए, मैंने एक भी लड़के की फ्रेंड रिक्वेस्ट रिजेक्ट नहीं की है पर चार छद्म लड़कियों को जरूर ब्लाक किया है।

अब मैं कहानी पर आता हूँ।

आज से करीब छः साल पहले की बात है, मुझे इंदौर से दफ्तर के कुछ काम के सिलसिले में मुंबई जाना था। कार्यक्रम अचानक तय हुआ था, इसलिए ट्रेन का टिकट तो मिल नहीं सकता था तो बस से जाने का तय हुआ। उस वक्त एसी वाली बसें चलन में थी अत: मेरे लिए एसी स्लीपर बस का टिकट आया और मैंने अपना बैग पैक करके शाम को साढ़े छः पर हंस ट्रेवल से बस पकड़ ली।

मैं बस में आने के पहले यही सोच रहा था कि काश कोई अच्छी भाभी, आंटी या लड़की मिल जाये तो सफर आसान हो जायेगा। मुझे दरवाजे से दूसरे नम्बर की अकेली सीट मिली थी। मैंने देखा मेरी सीट के सामने वाली सीट पर तो कोई अभी तक आया ही नहीं था पर बगल वाली सीट पर एक माँ-बेटी जरूर बैठी हुई थी, बेटी काफी सुंदर थी पर माँ उतनी ही खडूस दिख रही थी तो मुझे लगा कि अपना काम नहीं होगा।

मेरे पास उस वक्त कंपनी का नया लैपटॉप था और साथ ही डाटा कार्ड भी जो उस वक्त बहुत धीमा इन्टरनेट देता था लेकिन कनेक्शन दे देता था। मैंने लैपटॉप चालू किया और मैंने याहू पर चैटिंग शुरू कर दी। थोड़ी देर पड़ोस वाली लड़की देखती रही फिर पूछने लगी- क्या आप नेट चला रहे हो?

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मैंने सर हिला कर हाँ में जवाब दिया तो बोली- क्या आप मेरा मेडिकल एंट्रेंस का रिजल्ट देख कर बता दोगे? शाम को आना था पर हमें मुंबई जाना पड़ रहा है।

मैंने कहा- ठीक है, कोई दिक्कत नहीं !

मैंने उसका रिजल्ट देखा लेकिन रिजल्ट तब तक आया नहीं था। फिर हम दोनों की थोड़ी बातें शुरू हो गई, मैं भी मेडिकल की परीक्षा दे चुका था तो मैं उसी बारे में बात करने लगा।

इतने में हम लोग बस के अगले स्टॉप पर आ गये और यहाँ पर एक बूढ़े दादा-दादी जी आंटी के सामने वाली सीट पर बैठ गये और मेरे सामने वाली सीट पर एक लड़की बैठ गई।

देखने में वो लड़की कोई बहुत सुंदर नहीं थी पर आकर्षक बहुत थी, सामान्य सा चेहरा, थोड़ी सी मोटी, हलकी चपटी नेपाली नाक, गेंहुवा रंग, हलके घुंघराले बाल पर उसकी आँखें बहुत सुंदर थी और बहुत आकर्षक भी। उसने जींस और टी शर्ट पहन रखी थी जिसमें वो काफी आकर्षक लग रही थी। वो आकर मेरे सामने वाली सीट पर बैठ गई और मेरी बांछें खिल उठी, मैंने सोचा चलो रास्ते भर का काम हो गया।

वो आई तो मैंने लैपटॉप बंद कर दिया और उससे बातें करने लगा, बातों बातों में पता चला कि वो दिल्ली की रहने वाली है, उसका नाम साक्षी मालिक है और मुंबई में धारावाहिकों में एक्स्ट्रा के तौर पर काम करती है, यहाँ किसी काम से आई थी और अब वापस जा रही है।

हम लोग ऐसे ही बातें करते जा रहे थे और कब सनावद आ गया पता ही नहीं चला। वहाँ बस यात्रियों के खाना खाने के लिए रुकी थी तो मैंने साक्षी से भी कहा- चल कर खाना खा लो !

और उन दोनों माँ बेटी से भी कहा तो आंटी ने तो मना कर दिया और मन मार कर उनकी बेटी को भी मना करना पड़ा लेकिन साक्षी मेरे जोर देने पर मेरे साथ खाना खाने के लिए आ गई। वो खाना खाने आई तो हम दोनों अकेले ही हो गये थे हमने थोड़ा खाना आर्डर किया और बिल मैंने ही भरा। खाना खाते हुए मैं उससे मजाक करने लगा था जिसमें थोड़ा बहुत सेक्स का पुट भी था और उसे उस मजाक से कोई तकलीफ नहीं हुई तो मेरे हौंसले बढ़ गये और मैं उससे और सेक्सी मजाक करने लगा।

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फिर खाना खा कर हम बस में आ गये और हम थोड़ी देर बात करते रहे, चूंकि अब तक रात हो चुकी थी तो पड़ोस में जो चारों लोग थे वो नीचे और ऊपर वाली बर्थ पर सो चुके थे।

साक्षी मुझसे बोली- संदीप तुम्हारे लैपटॉप में फिल्में हैं क्या? अगर हैं तो चालू करो, देखते हैं।

मेरे पास फिल्में तो थी ही, लेकिन मैंने कहा- मेरे पास अंग्रेजी फिल्में हैं, हिंदी नहीं हैं !

वो बोली- कोई बात नहीं वही चालू करो ! मुझे भी इंग्लिश फिल्में देखना पसंद है।

मैंने कहा- ठीक है !

और मैंने हेडफोन लगा कर “द ड्रीमर्स” फिल्म शुरू कर दी..

मैंने इस फिल्म को पहले भी देखा था और मैं जानता था कि इसमें बहुत ही उत्तेजक दृश्य हैं। दो सीट का बेड बना कर, पर्दा लगा कर मैंने साक्षी को मेरा बगल में पैर फैला कर बैठने के लिए कहा, ऊपर से कम्बल रख लिया और हेडफोन का एक स्पीकर साक्षी को दे दिया और दूसरा मेरे कान में लगा कर फिल्म देखने लगे।

करीब 45 मिनट तक हम फिल्म देखते रहे और एक दूसरे के हाथों में हाथ ले कर बैठे रहे, जगह कम थी तो यह समझिए कि एक दूसरे के ऊपर नहीं थे बस बाकी चिपके हुए ही थे..

मेरे बदन में तो आग लगना शुरू हो ही चुकी थी और साक्षी भी कोई शांति से बैठी नहीं थी और इस सब के बीच में एक दो बार कुछ ऐसे दृश्य आ चुके थे जिसमें लड़की-लड़का बिना कपड़ों के एक दूसरे के साथ सोये हुए हैं… उसके भी हाथ मेरे बदन पर चल ही रहे थे। इसी बीच फिल्म में एक सेक्सी सीन आने लगा जो कि निहायत ही सेक्सी था जिसमे फिल्म की नायिका पूरे कपड़े उतार कर डांस कर रही थी और उसके बाद कौमार्य भंग का दृश्य था जो कि पूरी तरह से दिख रहा था और गजब का सेक्सी था।

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