लॅडीस वाकेशन में हम बचो की हुई मों स्वापिंग

ही दोस्तो, मेरा नाम राहुल है और मैं मुंबई का रहने वाला हू. मेरी उमर 19 साल है और मैं मेरी मों के साथ 1 भक में रहता हू और उनका नाम है निकिता जो 44 की है. हमारे पड़ोसी यानी निराल आंटी जो करीब 46 की होंगी और उनका बेटा और मेरा बेस्ट फ्रेंड राज जो मेरी ही उमर का है.

बॅकग्राउंड अगर आपको बतौ हमारे घरा का तो मेरी मम्मी और राज की मम्मी बेस्ट फ्रेंड्स है जैसे मैं और राज. हम दोनो की मम्मी वर्किंग है और पुराने ख़यालात नही रखती. हम सब आपस में बड़े मस्ती में और खुश रहते है. मेरे पापा अक्सर तौर पे होते है जो हमारे साथ बिल्कुल मिल झूल कर रहते है. राज के घर में भी वही सीन है बस उसके पापा मुंबई में ही इट कंपनी में जॉब करते है.

अब गर्मियों का वक़्त था और सोसाइटी किस सारी लॅडीस ने 2 दिन के लिए गोआ में घूमने का प्लान बनाया था जहा सिर्फ़ लॅडीस जाने वाली थी. फिर हुआ यूँ की मम्मी को लगा की मैं अकेला रह नही पौँगा और राज के घर रहेंगे तो उसके पापा को दिक्कत हो सकती है. तो प्लान ये था की सोसाइटी की 4 लॅडीस जिनमें से मेरी मों और निराल आंटी भी थी और मैं और राज मिलकर हम गोआ में रहेंगे.

सीधे स्टोरी पर आते हुए बतौ तो ये कुछ साल पहले की घटना है और हम गोआ के एक प्राइवेट रिज़ॉर्ट में पॉच चुके थे. क्यू की वो 4 स्तर होटेल था और हुँने सिर्फ़ 2 रूम्स बुक किए थे जिसमें से 1 रूम में मैं, मम्मी, राज और निराल आंटी रहने वेल थे और दूसरे रूम में बाकी 2 लॅडीस.

रत का समय था सारी लॅडीस एक टेबल पे बैठ कर बातें करने लगी और बोहोट खुश लग रही थी जो आस पास किसी को शायद ढूंड रही थी. हम तो मासूम थे अलग साइड में पूल में मस्त मस्ती कर रहे थे. करीब एक घंटे बाद लॅडीस वेल टेबल पर 2 मेल्स आकर बैठे जिनमें से एक 20 साल का लग रहा था, और एक करीब 50 साल का बूढ़ा आदमी था.

हम सोच रहे थे की ऐसी क्या बात होगी लेकिन हम अपने में मस्त थे. फिर कुछ देर बाद सारी लॅडीस ने स्विम्मिंग कॉस्ट्यूम्स पहना और सारे पूल में आ गयी. हुँने पहली बार सभी आंटीस को इतना खुश और ऐसे रूप में देखा था जो हमारे लिए बिल्कुल नया था. उसके बाद हम मस्ती करने लगे और हमारे साथ सारी आंटीस भी मस्ती करने लगी.

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म्यूज़िक चल रहा था और सिर्फ़ हम लोग पूल में थे जहा लॅडीस भी पूल में नाच रही थी हमारे साथ गले लग रही थी, हग कर रही थी. फिर बातें शुरू हुई.

2 बाकी लॅडीस में से एक का नाम था मोना (38 यियर्ज़) और एक का नाम था मानसी (40 यियर्ज़).

मानसी – अरे बचो साइड में क्या कर रहे हो? यहा हमारे बीच आ जाओ

मोना – संभाल के मानसी इनकी मम्मी भी यहीं है हहा.

निकिता – कोई बात नई मोना, आज तो मज़े करने आए है

निराल – और वैसे भी बचे बड़े हो रहे है. आज नही तो कल सीखेंगे ही. वैसे भी हम इनकी मम्मी है तुम दोनो तो इनके लिए आंटी ही हो ना हहा.

निकिता – एस निराल .. करेक्ट

मानसी – तो क्यू ना वो वाली मस्ती हो जाए. ई मीन ई नो हमारे रूम में दोनो बाप बेटे हमारा वेट कर रहे है लेकिन तब तक देख तो सकते है ना?

मोना – क्या बोलती हो लॅडीस?

निकिता – हा हा क्यू नई?

निराल – सब राज़ी है तो वेट किस बात का. अछा राहुल बेटा यहा आओ.

मोना – मैं निराल के साथ. बाकी तुम दोनो राज के साथ. नाइस आइडिया ना

फिर सारी लॅडीस ने आपस में पता नही क्या बात की और हम तो नादानी से बस उनकी बातें सुने जा रहे थे.

फिर निराल आंटी और मोना आंटी ने मुझे उठाया एक ने पेर उठाया और एक ने शोल्डर्स से उठाया. उसी तरह मेरी मम्मी ने और मानसी आंटी ने राज को उठाया और हमारे पेर उनके शोल्डर पर रख दिए. हम पूछने लगे की क्या कर रहे हो तो इतने मम्मी ने कहा

निकिता – राहुल, राज आज ना तुम दोनो गोआ का असली रूप देखोगे. जस्ट चिल आंड रिलॅक्स.

फिर सभी मे काउंटिंग शुरू की और 1, 2, 3 कहते ही दोनो आंटीस ने हमारा शॉर्ट्स उतार दी. हम चोंक गये और सिर्फ़ अंडरवेर में थे.

मोना – यार निकिता, बचे पूल में भी अंडरवेर पहें के उतरे है.

निराल – अब हूमें क्या पता था बचो ने क्या पहना है. और वैसे भी मैं तुझे जानती हू, तू ज़्यादा देर उनकी चड्डियान रहने नई देगी.

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मानसी – तो गाइस चलो अगेन 1, 2 , 3

और इस बार उन्होने हमारी अंडरवेर भी उतार दी और हम शरम के मारे हाथ से अपना नुणु छुपाने लगे.

राहुल – अरे आंटी ये आप क्या कर रही है?

राज – मम्मी देखिए ना आंटी ने मेरी अंडरवेर उतार दी

निराल – हा तो तुम दोनो की उतरी है देखो.

मोना – यार देखो ना बचपन में इतना छोटू सा होता है (मेरा नुणु हाथ में पकड़ते हुए) और बड़ा होते ही शैतान हो जाता है

मानसी – बिल्कुल सही कहा मोना, राज का तो बिल्कुल ब्लॅक है तेरा फॅवुरेट देख

मोना – वाउ. वैसे राहुल का मीडियम रंग है लेकिन गोतियाँ मस्त भारी हुई लग रही है (गोटी को ध्यान से हाथ में लेकर देखते हुए)

निकिता – हो गया तुम्हारा? तो हमारे बचे कपड़े पहें ले

निराल – रहने दे ना निकिता, अब रूम में ही तो जाना है.

मेरी और राज की तो बोलती बंद हो चुकी थी समाज नई आ रहा था क्या करे क्या बोले. हम चुप छाप उनकी बातें मानते रहे.

मोना – यार निकिता, निराल, तुम दोनो भी आ रहे हो ना हमारे रूम में?

निराल – अरे बचो को छोड़ कर?

मानसी – बचो को सुला कर फिर आ जाना.

निकिता – हा ये सही रहेगा

मोना – मैं तो कहती हू बचो को भी ले आना चाहिए हम भी चार, लड़के भी चार सब के लिए एक एक, और बरी बरी से सब के साथ मौका मिलेगा. सोचो इतनी वेराइयेटीस उपर से जवानी आए हाए

मानसी – थोड़ी सबर रख मोना, बचे सुन रहे है

निकिता – यार मुझे सही नही लग रहा. ई मीन बचो के सामने हम कैसे कर सकते है

निराल – बात तो सही है. उपर से उन्होने ने घर पे बता दिया तो अलग तकलीफ़.

राहुल – क्या बात है मम्मी?

राज – हा मम्मी हम तो किसी को कुछ नई बताएँगे.

निकिता – कुछ नई राहुल बेटा, तुम लोग चलो पूल के बाहर टवल लो हम अभी आए

निराल – हा चलो जल्दी जल्दी पोचो खुद को

हम दोनो नंगे ही पूल के बाहर जाकर पोछने लगे की हूमें उनकी बातें सुनाई देने लगी.

मोना – यार निराल – सच में तेरे बेटे का कला नुणु तो मस्त है. और देख देख उसके बम्स, मस्त छोटे छोटे कितना मस्त है यार

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