मेरे मस्त दीदी की चुदाई

हेलो, दोस्तों मेरा नाम कमाल है. मई आप लोगों के साथ अपनी सेक्स लाइफ के बारे मई बता ने जर आहा हूँ. मेरा उमर 26 साल है. मेरे परिवार मई हम सिर्फ़ टीन लोग है, मई, मम्मी और दीदी कामिनी. मम्मी 45 साल की है और दीदी 30 की जिनकी शादी हो चुकी है. हम लोग ग़ाज़ियाबाद के पास एक गाओं के रहने वेल है जैसा की आप लोग जानते है की गाओं मई शादियाँ छ्होटी ही आगे मई हो जाती है खास तौर पर लरकियों की. मम्मी की भी 15 साल की आगे मई शादी हुई थी. इसी तरहा दीदी की भी 18 साल की आगे मई शादी हो गयी थी. हम अच्छे खाते पीते घर के लोग है पिताजी के बाद भी ह्यूम रुपये पैसे की कोई कमी नही थी खेती से अच्छी कमाई हो जाती थी. मई आजकल सहर मई ही रह कर पड़ता हूँ मैने यहाँ एक रूम किराए पर ले रखा है. हानलांकि दीदी की ससुराल भी यही है पेर मई रिस्त्ेदारी मई रह कर नही पंडा चाहता था. वैसे भी मैने रूम एक मुल्त्यस्टौरी बिल्डिंग मई लेरका था. ऐसी बुल्डडिंग्स मई पड़ोसी भी आप को परेशन नही करते. सब अपने मई मस्त रहते है. अब आते हैउ मैं बात पर. मेरी सेक्स लाइफ अच्छी ख़ासी है. अपने कॉलेज की कई लरकियों को मई यहाँ लाकर छोड़ चक्का हूँ. जब कोई नही मिलती तो मूठ मार लेता हूँ. मास्टराँ की कितबे पद कर मास्टराँ की किताबो मई ज़्याडतेर नज़दीकी रिस्टन मई सेक्स के बारे मई होता है जो पड़ने के बाद जी करता है किसी को पकड़ छोड़ डाल्लों. लेकिन ये भी सोच ता हूँ की क्या सच मई रिस्टन मई भी चुदाई होती है. क्या कोई अपनी मा और बहन को छोड़ सकता है. पेर अपनी दीदी के साथ चुदाई करने के बाद ये बात माननी पड़ी. हुआ यूँ की एक दिन मई अपने रूम पेर ही था की दीदी मेरे रूम पर आई हू अक्सर आती रहती थी. मेरे लिए कुछ ना कुछ लाती रहती थी. उस दिन भी हू शॉपिंग कर के आई थी. कामिनी दीदी 30 साल की बहुत ही सनडर और कामुक चहेरे वाली औरत है उनका फिगेर 38-28-36 का है उनकी चूंची और गांद देख कर किसी का लंड करा हो सकता. जैसे ही हू रूम मई आई तो बोली, क्या कमाल, तू घर नही आ सकता क्या? मई बोला, दीदी मेरी पड़ाई कराब होती है. बड़ा आया पड़ने वाला मुझे सब पता है तू क्या करता है? दीदी तपाक से बोली. मई बोला, या दीदी? अच्छा चल मुझे पानी तो पीला. सॉरी दीदी, अभी लता हूँ. मैने फ्रीडज़े से पानी की बोतल निकल कर उनको दी, वो पानी पी कर बोली उउफफफफ्फ़ कितनी गर्मी है. मई बोला, हन दीदी. हम दोनो मई ऐसे ही बातें होती रही, की अचानक हम चोंक पड़े पूरे सिटी मई करफ़ू लगा दिया गया था पोलीस की गाड़ियों से पब्लिक को बताया जर आहा था की सहर मई अचानक हिंदू-मुस्लिम रॉइटेस की वज़ह से पूरे सहर मई धारा 144 लगा दी गयी है. ये सुन कर दीदी प्रेशन हो गयी, अरे, अब मई घर कैसे जौंगी? मई बोला, दीदी अब तो जब तक करफ़ू नही हट जाता आप को रुकना पड़ेगा.लेकिन अरे दीदी हो सकता है सुबा तक करफ़ू खुल जाए..!लेकिन घर पर सब चिंता करेंगे.दीदी बोली ! मई बोला, दीदी आप के पास मोबाइल आप फोन कर दो!लेकिन मई यहाँ उफफफ्फ़ क्या करूँ?क्या दीदी लाओ मई करता हूँ! मई बोला. दीदी ने मुझे फ़ोन दिया. मैने डेल किया रिंग जाने लगी, हेलो कहाँ हो तुम कामिनी जीजा जी की आवाज़ आई . मई बोला हेलो जीजाजी नमस्ते मई कमाल दीदी यहीं है .मेरे पास लेकिन सिटी मई तो करफ़ू लगा हुआ है दीदी बहुत परेशन है. जीजा जी बोले टनक्षस गोद मई तो दर ही गया था .अच्छा तुम अपनी दीदी को बोलो की वहीं पर रहे सुबह कॉसिश करता हूँ आ कर ले जौंगा. लो, आप ही बात कर लो दीदी बहुत परेशन है! मैने दीदी को फोन दिया. हेलो हन जी लेकिन मई यहाँ पर कैसे? .. जी ठीक है. मैने पूछा, क्या हुआ दीदी? तो बोली, हुआ क्या अब तो रुकना ही पड़ेगा और क्या.तो क्या हुआ? मई बोला यहाँ आप को कों सी परेशानी है?अरे यार लेकिन मई रत को पहनउगी क्या? मेरे पास क्या और कपड़े है?हाआँ, मई बोला यह परेशानी तो है. आप मेरे लूँगी और कुर्ता पहन लेना.हुउंम यही ठीक रहेगा! अच्छा खाने का क्या है?खाना तो बनाना पड़ेगा दीदी! चलो ठीक है डाल चावल तो होंगे तुम्हारे पास वही बना लेते है वो बोली! हन, डाल चावल है और कुछ सब्ज़ियाँ भी है जो फ़्रीज़ मई है मैने कहा. शाम के 8 पीयेम हो चुके थे दीदी खाना त्ययार कर रही तीन मई पद रहा था, तबी दीदी ने आवाज़ दी कमाल यहाँ तो आ. मई उनके पास गया और बोला, हन दीदी क्या बात है! तो वो बोली, अरे घी कहाँ है? मैने उन्हे घी का जर दया और खड़ा हो गया विन पर.दीदी उस वक़्त पेटीकोत और ब्लाउस मई थी. जो की पसीने से भीग गया था काफ़ी गर्मी थी किचें इस लिए दीदी ने सारी उत्तर दी थी भीगे हुए पेटीकोत और ब्लाउस से उनके बदन का सारा भूगोल नज़र आ रहा था. उनकी गांद देख कर मेरे अन्डाएर का सैइटन जाग उठा सफेद रंग के पेटीकोत और ब्लाउस से उनकी ब्रा जोकि सफेद रंग की थी.और चुद्तों का रंग देख कर पता चलता था की उन्होने पेंटी नही पहनी है उूुउउफ़फ्फ़ ये सब देख कर मेरा लोड्‍ा एकदम खड़ा होगआया . बुरे-बुरे ख्याल दिल मई आने लगे. पर वो मेरी बड़ी बहन है ये सोच कर मई जाने लगा तो वो बोली, कहाँ जारे हो यही रहो ना? मई अकेली बौरे हौराही हूँ. चलो कुछ बातें करते हाउ खाना भी बन जाएगा और बौरियत भी नही होगी. मैने कहा, ठीक है दीदी और बताओ यहाँ कोई परेशानी तो नही है? दीदी बोली, नही कोई प्रोब नही ही मई आराम से हूँ.

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