मेरे चुत को बजा दे मेरे राजा

सोना अपने घर चली गई। मैंने रमेश ने और रोमा ने खाना खाया। रोमा भाभी ने मुझे और रमेश को दूध पीने को दिया।

मैंने रमेश से कहा- तू जाकर अब भाभी को चोद ! हमें कल सुबह ७ बजे की बस पकड़नी है और भाभी को मस्त चोदियो ! सोना और बसंती को तूने चोद दिया ! भाभी की चूत खाली पड़ी है ! पूरी रात लण्ड डाले रखियो वरना भाभी किसी और से चुदवाने लगेंगी।

रमेश मुस्करा कर कमरे की तरफ जाने लगा, मैंने कहा- रमेश भाभी से कहना एक गिलास पानी मेरे कमरे में रख दें। रमेश अब अपने कमरे में चला गया। थोड़ी देर बाद रोमा भाभी मेरे कमरे में पानी का गिलास लेकर आई। उनके ब्लाऊज़ के सारे हुक खुल थे। भाभी बोली- ३ बजे रात को तुम्हें जगा दूँगी, एक बार तुम्हारे लण्ड से अपनी गांड और मरवानी है मुझे !
और उन्होंने मेरे पजामे के ऊपर से मेरे लण्ड पर हाथ फेर दिया। मैंने भी उनकी दोनों चूचियां खुले ब्लाउज के अंदर हाथ डालकर मसल दीं। रात को तीन बजे उन्होंने बाथरूम की तरफ से प्रवेश कर मुझे जगा दिया और बाथरूम में जाकर मेरे से जमकर अपनी गांड सुबह ५ बजे तक मरवाई। इसके बाद हम लोग फिर अपने कमरे में चले गए।

सुबह ६ बजे मैं और रमेश खेतों में घूमने गए जहाँ बसंती और उसकी भाभी ने हमारे लण्ड मस्त होकर चूसे। चूँकि हम लोगों को ७ बजे बस पकड़नी थी, इसलिए हमने बसंती और उसकी भाभी की चूत नहीं चोदी और मैंने वादा किया कि अगली बार जब आऊँगा तो बसंती की चूत जरूर चोदूंगा।

६:३० बजे नाश्ता करके मैं और रमेश शहर की तरफ चल दिए। पूरे रास्ते में रमेश की तारीफ़ करता रहा कि उसने सोना भाभी जैसी औरत की चूत मुझे दिलाई। रमेश भी मेरे भूत भगाने की कला से काफी प्रभावित था। हम लोग ने महीने में एक बार गाँव आने का प्लान पक्का कर लिया था। मुझे उम्मीद थी कि गोँव की बची हुई भाभियाँ भी धीरे धीरे मुझसे अपनी चूत का भूत भगवाएंगी।

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