मैंने माँ को और पापा ने बेहेन को चोदा

मैंने मम्मी को खुशी से, अपनी बहन से फोन पर बात करते सुना की यहाँ इतनी आज़ादी है की चाहे तो पूरे नंगे होकर, सी बीच पर दौड़ लगाओ… कोई, देखने वाला नहीं है…
गेस्ट हाउस के पीछे, जो स्विमिंग पूल है उसमे नीला आसमान ऐसा दिख रहा था मानो ज़मीन पर उतर आया हो।
कुल मिलाकर, हमारा “जैक पॉट” ही लग गया था…
अगली सुबह, जब मैं सोकर उठा तो मम्मी नहीं दिखीं।
मैं उन्हें ढूंढने के लिए, दूसरे कमरे में गया। जहाँ पर, वह अलमारी खोल कर उसमें अपने साइज़ के स्विमिंग कॉस्ट्यूम्स देख रही थीं और मुझे देखकर कहने लगीं की चलो, तुम भी चेंज कर लो और हम दोनों स्विमिंग करेगे…
मैं तो कब से, मौका ही देख रहा था।
जल्दी से, फ्रेश होकर फटाफट पूल साइड पर पहुँचा तो देखा की मम्मी ने पहले ही ब्रेकफ़स्ट का सारा समान पूल साइड पर रखवा कर, काम वाली बाई से सभी काम करवा कर, उसे चलता कर दिया था।
अब वहां पर, मेरे और मम्मी के अलावा कोई नहीं था।
थोड़ी देर बाद, वहां मम्मी आईं तो मेरा तो दिमाग़ ही खराब हो गया।
उस समय, उन्होंने जो स्विमिंग कॉस्ट्यूम पहना था वो शायद उनके साइज़ से एक साइज़ कम था.. इसीलिए, उनका पूरा बदन कॉस्ट्यूम फाड़ कर, बाहर आने के लिए मचल रहा था..
मेरे तो बस होश ही उड़ गये और मैं फटी फटी आँखों से, उन्हें देखने लग गया।
तभी, मम्मी ने मुझे आवाज़ देकर जगा दिया और एक कॉस्ट्यूम देते हुए कहा की मैं भी यही पहन लूँ।
खैर, मैंने वहीं पर तौलिये में अपना कॉस्ट्यूम चेंज किया। लेकिन, उसका कट कुछ ऐसा था की मेरा पूरा तना हुआ लिंग बाहर से दिख रहा था।
जिस कारण, मैं शरमा रहा था।
मम्मी ताड़ गईं और कहने लगीं की क्या तू तो, लड़कियाँ से भी बदतर है… तेरी जगह मैं या तेरी बहन होती, तो अब तक तो सी बीच पर टू पीस में दौड़ लगा आती…
ऐसा कह कर, उन्होंने मेरा तोलिया खींच लिया।
अब मैं केवल, जरा सी कॉस्ट्यूम में था और शरमाते हुए पानी में पैर डाल कर बैठ गया, क्यूंकि मुझे तैरना नहीं आता था।
मम्मी को भी तैरना, इतने अच्छे से नहीं आता था। इसलिए, उन्होंने मेरा हाथ पकड़ कर धीरे-धीरे पानी में उतरना शुरू किया और जल्दी ही हम दोनों सीने तक पानी में समा गये।
मम्मी को मैंने पहली बार, इतने बिंदास अंदाज़ में देखा था। उन्हें शरम नाम की कोई चीज़ ही नहीं थी और वो अपने जवान लड़के के साथ, पानी में मस्ती कर रही थीं।
उनकी कॉस्ट्यूम, जो की उन्हें थोड़ी टाइट थी, पानी में भीगने की वजह से और ज़्यादा बदन से चिपक गई और उनकी निप्पल भी थोड़ी थोड़ी दिखने लगी थी। जिसे देखकर, मेरा लंड चड्डी फाड़ कर बाहर आने को मचलने के लिए बेताब हो गया।
बड़ी मुश्किल से, मैंने दबाए रखा।
लगभग 2 घंटे के बाद, जब हमें भूख सताने लगी तो हम दोनों माँ बेटे पूल से बाहर आए और मम्मी ने मेरे सामने ही ज़रा से तौलिये की आड़ कर के अपनी बिकनी चेंज कर के, एक बड़े से गले की पारदर्शी सी नाईटी पहन ली.. जोकि, उनके घुटने से भी छोटी थी और अंदर उन्होंने कुछ नहीं पहना.. जिस वजह से, उनकी नाईटी उनकी गांद के अंदर घुस रही थी और उनकी खड़ी निपल्स भी साफ दिख रही थी..
मुझे लगता है की उन्होंने ऐसा शायद जान मुझकर किया। वो अपने मन में दबी इच्छा पूरी करना चाहती थीं।
इसके बाद, हम दोनों ने पूरे समय टीवी देखा। जिसमें, यहाँ चलने वाला कोई लोकल चैनल था। जिसमें, यहाँ पर आने वाले विदेशी टूरिस्ट्स जो की नंग धड़ंग बीच पर मज़े मारते हैं, उनकी शूटिंग दिखाते हैं।
ऐसे ऐसे सीन दिखाए की मैं शरमाता रहा। लेकिन, मम्मी ने चैनल चेंज करना ज़रूरी नहीं समझा।
शाम को, जब मम्मी मेन गाते पर नाईटी में खड़ी थीं तो मैं पीछे से चुपचाप जा कर खड़ा हो गया।
सामने सुनसान बीच पर, एक विदेशी जोड़ा लगभग संभोग की मुद्रा में बड़े पत्थरों के बीच मस्ती कर रहा था और मम्मी जो की सूर्यास्त के कारण डूबते सूरज की रोशनी में खड़ी थीं की नाईटी में से सूरज की लाइट, इस तरह पास हो कर दिख रही थी की उनका पूरा भूगोल आर पार दिखाई दे रहा था।
जब मैं, उनके ठीक पीछे पहुँचा तो मैंने देखा की वो अपना एक हाथ नाईटी के अंदर डाल कर, अपनी चूत को रगड़ रही थीं और हल्के हल्के, कराह रही थीं।
जब उन्होंने, मुझे पीछे खड़ा देखा तो बेशरम की तरह हंसकर कहने लगी – देख, कैसे मज़े मार रहे हैं वो दोनों, बीच पर और एक तू है की अंदर भी शरमा रहा है… लगता है, मैंने तेरे साथ आकर ग़लती की… मुझे तू पूरा चंपू लगता है…
तो, मैंने कहा की नहीं मम्मी यह बात नहीं है… मैं तो शुरू में, थोड़ा झिझक रहा था… लेकिन, यदि आप साथ हो तो काहे की शरम…इस पर मम्मी बोलीं – देख, आदमी को बार बार ऐसा मौका नहीं मिलता… जब हम, खुलकर अपनी दबी इच्छा पूरी कर सकें और मज़े मार सकें… इस मज़े के लिए, अगर हम लाखों रुपये भी खर्च करेंगें तो भी हमें इतनी आज़ादी और प्राइवेसी नहीं मिलेगी… और फिर तू तो जवान है… मुझे तो ये मौका अब जाकर बुडापे में मिला… इसलिए, शरमाना छोड़ और यह भूल जा की हम यहाँ माँ बेटे हैं और समय का और अपनी जवानी का लुफ्त उठा… जितना हो सके, मज़ा लूट ले… फिर, ऐसा वक्त नहीं आएगा…
अगले दिन, सुबह से ही ज़बरदस्त बारिश हो रही थी और सामने बीच पर समुंदर मचल मचल कर, बाहर आने को बेताब नज़र आ रहा था तभी यहाँ के कीपर का फोन आया की आज सफाई वाली नहीं आएगी और हम भी बाहर ना निकलें.. क्यूंकि, पानी कभी भी बढ़ भी सकता है.. इसलिए, हम अपने गेस्ट हाउस में अंदर ही रहें और यदि कोई चीज़ की ज़रूरत हो तो उसे फोन कर दें.. वह अरेंज कर देगा।
मम्मी ने कहा – ठीक है… हम आराम करेंगें… आप भी ज़्यादा परेशान ना हो…
फिर, मम्मी बोलीं की आज हम दिन भर टीवी देखेगें… खूब खाएँगें और सोना स्टिम बाथ लेंगें… जो की, गेस्ट हाउस के बेसमेंट में है… जिसका की मुझे अब तक पता ही नहीं था।

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