मौसी और माँ की गांड चुदाई

ऐसा करते हुए कुछ ही देर के बाद मेरे लण्ड ने बहुत सारा वीर्य मौसी की चूत पर और झांटो पर जा गिरा।

सुबह सुहावना होने के कारण मैं क़रीब 11 बजे उठा, तो मैंने मौसी और माँ को धीमे आवाज़ में बात करते सुना।

मुझे लगा शायद मौसी मेरी शिकायत माँ से कर रही है इसलिए मैं ध्यान लगाकर उनकी बातें सुनने लगा।

मौसी- दीदी, पता है रात को क्या हुआ?
माँ: क्या हुआ?
मौसी- रात जब मैं क़रीब 2:30 बजे पेशाब के लिए उठी तो देखा कि दीनू बेटा का लण्ड बाहर निकला हुआ था।
माँ- शायद उसका अंडरवियर ढीला होगा इसलिए उसकी नूनी बाहर निकल आई होगी?

मौसी- दीदी अब उसकी नूनी, नूनी नहीं रही, अब तो मर्दों की तरह लण्ड बन चुका है।
माँ- अच्छा, तब तो उसकी शादी की तैयारी करनी पड़ेगी, खैर यह बताओ कितना बड़ा लण्ड था उसका।
मौसी- उसका सिकुड़ा हुआ लण्ड ही काफ़ी बड़ा लग रहा था।
माँ आश्चर्य से- अच्छा, तब तो जब उसका लण्ड खड़ाा होगा तो काफ़ी बड़ा होगा!

मौसी- दीदी और जब मैं पेशाब करके उठी और चूत को साफ़ करने लगी तो मेरी हाथेली पर झांटों से और चूत की फांको से कुछ चिपचिपा सा चीज लग गया था। शायद नींद में बेटे का लण्ड का पानी गिरा होगा।
माँ- इसलिए कहती हूँ, रात में नींद में अपनी नाईटी का ख्याल रखाना चाहिए तुझे। क्यों कि अक्सर मैं देखती हूँ तेरी नाईटी कमर पे आ जाती है।

अब मैं समझ गया कि रात को जो कुछ भी मैंने किया उसका मौसी ने बुरा नहीं माना, और मैं उठ कर नहा धोकर नाश्ते का वेट करने लगा। इतने में माँ ने मौसी से कहा- दीनू को नाश्ता दे दो में कपड़े सुखाने जा रही हूँ।
मौसी मेरे लिए नाश्ता लेकर आई और पास ही बैठ गई रात की घटना के बाद मैं मौसी को कामुक निगाहों से देखता था।
जब मेरी नज़र उनकी चूची पर पड़ी, तो उन्होंने पूछा- क्या देख रहे हो बेटा?
मैंने कहा- मौसी, आज आप खूबसूरत लग रही हो।
मौसी हँसी और उठकर चली गईं।

रात को खाना खाने के बाद हम सब सोने की तैयारी में लग गए, पर मुझे नींद नहीं आ रही थी। मैं केवल सोने का नाटक कर रहा था और मौसी को कैसे चोदा जाए यह प्लानिंग बना रहा था।

करिब 12:45 को मैं आँख खोल कर देखा तो मौसी आज रत भी कल रात की तरह सोई थीं लेकिन आज उनकी नाइटी पूरी कमर के ऊपर थी और उनकी चूत मुझे साफ़ नज़र आ रही थी।

और कहानिया   अपनी बेटे से चुत की खुजली मितवाई

उनकी चूत देख कर मेरा लण्ड खड़ा होकर चोदने के लिए तैयार हो चुका था। इतने में मेरे दिमाग में एक आईडिया आया। मैंने उठ कर लाइट बंद कर दी और मेरे लण्ड पर ढेर सारा तेल लगा के आया।

अब मैं मौसी की ओर करवट कर कल रात की तरह उनकी चूत के मुख पर लण्ड रख दिया। मेरा लण्ड का सुपाड़ा चिकना होने के कारण थोड़ा मौसी की चूत में चला गया।

मुझे मौसी की चूत का एहसास लण्ड पर महसूस हुआ। जिस कारण मैं और उत्तेजित हो गया और धीरे से जोर लगा कर आधा सुपाड़ा मौसी की चूत में डाल दिया।

आधा सुपाड़ा जाते ही मौसी के शरीर में कुछ हरकत हुई। मैंने सोचा शायद मौसी जाग गई होंगी इसलिए कुछ देर तक ऐसे ही सोने का नाटक करने लगा।

जब कुछ देर तक मेरे शरीर से कुछ हरकत ना होने पर मौसी ने थोड़ी गांड मेरी ओर सरका दी जिस कारण मेरा पूरा सुपाड़ा उनकी चूत में घुस गया।

मैं समझ नहीं पाया कि मौसी ने नींद में यह हरकत की या जानबूझ कर रखीं। मैंने हिम्मत जुटाई और एक हाथ उनकी बूब्स पर रख दिया और हौले हौले दबाने लगा। इतने में मौसी सीधी होकर सो गई जिस कारण मेरा लण्ड चूत से बाहर निकल गया।

थोड़ी देर बाद मैंने मौसी का हाथ मेरे लण्ड पर महसूस किया। वह मेरे लण्ड को पकड़ कर आगे पीछे कर रही थीं। मैं भी एक हाथ से उनके बूबस दबा रहा था और दूसरे हाथ से उनकी चूत सहला रहा था।

यह काम हम लोग करिब 5 मिनट्स तक करते रहे फिर मौसी ने मेरे कान में कहा- बेटा तुम मेरी चूत की ओर मुंह रख कर मेरी चूत को चाटो मैं तुम्हारा लण्ड चाटूंगी।
अब हम 69 कि पोजीशन में होकर एक दूसरे के चूत और लण्ड चूमने चाटने लगे।

मैं जब अपनी जीभ से उनकी चूत के फ़न को रगड़ रहा था तो वह आआह्ह ऊऊईई माँआ की धीरे धीरे आवाजें करती थीं। कुछ देर बाद उनकी चूत से सफ़ेद पानी आ गया और उस वक़्त उन्होंने मेरा सिर पूरी तरह से चूत पर दबा रखा था जिस कारण मेरे मुंह पर पूरा चूत का पानी लग गया।

और कहानिया   चाचा ने की माँ की चुदाई

फिर मौसी ने मुझे अपनी तरफ़ करते हुए कहा- ‘बेटा अब रहा नहीं जाता है जल्दी से तुम्हारा यह मोटा लण्ड मेरी चूत में डाल दे।’

मैं भी जोश में आ गया था और मौसी की चूतड के नीचे तकिया रख कर उनकी चूत को थोड़ा उठा दिया और अपने लण्ड का सुपाड़ा चूत के मुंह पर रख कर एक जोरदार धक्का लगाया।

एक ही धक्के में मेरा आधा लण्ड उनकी चूत में चला गया था और जोरदार धक्के के कारण उनकी मुंह से हल्की सी चींख निकल गई।

‘ऊऊईई माँआ धीरेरेए डालोओ!’ उनकी हल्की चीख सुन कर माँ जाग चुकी थीं लेकिन अँधेरा होने के कारण वह हमें या हमारे चुदाई को देख ना सकी और पूछा ‘क्या हुआ?’

मौसी ने धीमे से माँ के कान में कहा- कुछ नहीं, मैं अपनी चूत में उंगली डाल कर अन्दर बाहर कर रही थी कि मुझसे रहा नहीं गया और मैं हल्की सी चींख उठी।

माँ ने कहा- ठीक है आवाज़ धीरे करो क्योंकि बगल में दीनू सोया है।
हालांकि उन दोनों ने इतनी धीमी आवाज़ में बातचीत की फिर भी रात होने के कारण मुझे उनकी बातचीत सुनाई पड़ी।

अब मैं कुछ देर रुक गया था। मेरा आधा लण्ड अभी भी मौसी की चूत में घुसा था। थोड़ी देर बाद मैं मौसी के होंठों को चूसना शुरु किया और फ़िर से एक जोरदार धक्का मारा तो मेरा लण्ड पूरा चूत में चला गया।

मेरा लण्ड जड़ तक घुसते ही मौसी चिल्लाने की कोशिश की, लेकिन मेरा मुँह मौसी के मुँह में था इसलिए वह चिल्ला ना सकी।

थोड़ी देर बाद मैं अपना लण्ड अन्दर बाहर करने लगा जिससे मौसी को जोश आ गया और धीरे धीरे ‘ऊऊईई ऊऊफ़्फ़!!’ और चोदो मुझे कहने लगी।
मैं करीब 20 मिनट तक उन्हें चोदता रहा इसी बीच मौसी 4 बार झड़ चुकी थी जब मेरा पानी निकलने वाला था।

मैं अपना लण्ड उनकी चूत से निकाल कर मुँह में दे दिया और मेरा पानी मौसी के मुँह में पूरा भर गया और वह मेरे पानी तो गटगट पीने लगी। फिर मैं मौसी के बगल में आकर लेट गया।

कुछ देर बाद मैंने मौसी के हाथ में अपना सिकुड़ा हुआ लण्ड पकड़ा दिया। मौसी मेरे लण्ड को सहलाने लगी और पूछा कि ‘अभी भी पेट भरा नहीं क्या मुझे चोद कर?’
मैंने कहा- मौसी मैं अब आपकी गांड भी मारना चाहता हूँ।

Pages: 1 2 3

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *