मानसून में घरम चूत का तोहफा

ही रीडर्स इट’स शुभम हंस हियर आंड ई आम 23. ई लिव इन अमृतसर, पुंजब. मेरा रंग सांवला है आंड हाइट 5’9″ है.

मेरे लंड का साइज़ डीसेंट एनफ है अराउंड 7 इंचस आंड 3 इंच मोटा. स्टोरी थोड़ी लंबी होगी बुत मई गॅरेंटी लेता हू की आपका लंड और छूट 2-3 बार तो झाड़ ही जाएँगे. इस स्टोरी में हम बात करेगे की कैसे मुझे मानसून में छूट का तोहफा मिला, सो लेट’स स्टार्ट थे स्टोरी..

ये बात जस्ट 5 डेज़ पहले की है जैसे आपको पता है की बारिश का सीज़न है. मेरी गफ़ युरोप चली गयी है तो सब नॉर्मल चल रहा था लाइफ में. हमारे 2-3 घर छोड़ कर फॅमिली रहती है काफ़ी आचे है.

अंकल आंटी आंड उनका बेटा और बेटी है. लड़के की हरकते लड़कियो जैसी है थोड़ी थोड़ी आंड लड़की नॉर्मल है बाकी लड़कियो जैसी. फिगर मुझे नही पता ना ही कभी पूछा. कमर पता है बस, 28 है.

हेल्ती है वो बूब्स भी आचे है. मूह में आचे से आ जाते है. आंड उसका नाम लोवेलीन है. प्रेटी है और हाइट भी लंबी है. प्रॉपर पंजाबी गर्ल है आंड उसकी आगे भी 23 है.

सो बात 15 दिन पहले की है बारिश आ रही थी हल्की हल्की. और उसका म्स्ग आया की शुभम मैने सलून जाना है तो तू भी चल ले साथ में टाइम लग जाएगा आंड उसका भाई भी घर पे नही है.

तो मैने उसे बोला की घर आ कर मुम्मा से पूच ले अगर मुम्मा बोलेगे तो मई चल पदू गा साथ. देन वो आई और मुम्मा ने भी हन बोल दिया की कोई ना चले जाओ बुत जल्दी आ जाना.

तो हम निकल गये. ऑब्वियस सी बात है अक्तिवा मैने ही चलानी थी तो वो पीछे बैठी थी. हम मज़ाक करते करते जेया रहे थे और बारिश एक दूं से काफ़ी तेज़ हो गयी. मैने डिसिशन लिया की ग्ट रोड मेट्रो स्टॉप पे अक्तिवा लगा कर मेट्रो बस से चलते है और वो मान गयी.

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टोकन लिए आंड बस में भी काफ़ी क्राउड था वो और मई आयेज पीछे थे. मुझे नही टा था की शायद क़िस्सी का लंड उसे अपनी गांद पे फील हो रहा था. उसे काफ़ी अजीब लग रहा होगा तो उसने मेरा हाथ पकड़ कर अपनी और खीच लिया. बोली की मेरे पीछे खड़ा हो जेया तू.

हम दोनो गीले भी थे तो श्यद उसने सोचा होगा ऐसे क़िस्सी का लंड उस से नही लगेगा. बुत बस हिलने के कार्न मेरा लंड अब उसकी गांद की ड्रार में लग रहा था. जो की उसे अब फील हो रहा था. पर वो शांत रही, शायद वो ये सोच रही होगी अंजान के लंड से अछा क़िस्सी अपने का लंड है.

मेरा लंड पूरा टना हुया था और उसकी सलवार का कपड़ा मेरे लंड के कार्न उसकी गांद की ड्रार में अटक रहा था. और वो उसे बार बार निकाल रही थी. कपड़ा निकालते निकालते अचानक से उसका हाथ मेरे लंड पर आ गया.

और बोली क्मीने बस भी कर समझा इसको..! मैने बोला की यार सॉरी रश देख कितना है और मुझे माफ़ कर्दे प्लीज़ जान बूझ कर नही कर रहा हू. वो खड़ी रही और मेरा लंड सारे रास्ते उसकी गांद के मज़े लेता रहा.

अब मुझे भी म्ज़ा आ रहा था तो जैसे मोका मिलता तो मई लंड उसकी गांद की ड्रार में उप्र से नीचे छेड़ तक चलाने लगा और उसकी गांद के नीचे छेड़ के पास दबा देता. वो मेरा लंड आचे से फील कर रही थी.

उसके बाद स्टॉप आ गया और हम उतार गये बस से आंड लंड भी शांत हो गया था और हम सलून चले गये.

वाहा पर 2 घन्ते लगा दिए उसने मई काफ़ी बोर हो रहा था और बारिश भी रुक्कने का नाम नही ले रही थी.

और मुझे बार बार लोवेलीन की गांद याद आ रही थी की कैसे मेरा लंड उसकी गांद के नीचे तक रग़ाद खा रहा था.

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मई सोचने लगा की श्यद उसे भी ये सब पसनड़ आया हो और मान ही मान उसकी छुदाई के प्लॅन्स ब्नाने लगा जैसे की हम लड़को की आदत होती है.

फिर वो आ गयी और हम वापस बस में आए बुत इस बार क्राउड नही था और सीट मिल्ली और एक दूसरे के साथ मज़ाक कर रहे थे. हम बचपन से ही ऐसे ही थे साथ में ब्दे हुए है.

अब अक्तिवा ली उतार कर हुँने और वो पीछे बैठी थी बारिश अभी भी आ रही थी और हुँने सोचा की बारिश में नूडल्स आंड बर्गर खाते है.

बुत इस बार वो मेरे तोड़ा क्लोज़ बैठी थी और उसके बूब्स मई अपनी बॅक पर फील कर सकता था और वो बात करने के बहाने मुझसे चिपक रही थी.

तो मई साँझ गया की इसे मेरा लंड चाहिए अब इसकी छूट मचल उठी है अब मई मॅन ही मॅन बोहट खुश था अब हुँने फुड एंजाय किया और घर आ गये.

घर आ कर न्हाया मई कपड़े चेंज करे जो गीले थे और बेड पे बैठ कर उसकी छुदाई के सपने देखने लगा की कैसे लोवेलीन को छोड़ू. बुत मुझे पता नही था की वो अभी तक क़िस्सी से चूड़ी होगी या नही बिकॉज़ ब्फ तो हर क़िस्सी का होता है बुत चुड़वाती हर लड़की नही है.

शाम को उसका म्स्ग आया की

लोवेलीन : काफ़ी म्ज़ा आया ना आज बुढ़ू बारिश में?

मे : हाआँ…बोहट बुत प्लीज़ सॉरी बस में जो हुया

लोवेलीन : अरे कोई नि प्ग्ल ! मेरे पीछे जो था वो भी वोही कर रहा था इसलिए तुझे अपने पीछे बुलाया ताकि मई बाकियो से सेफ रह स्कू

मे : फिर भी सॉरी ! तुम्हारी बॅक टच हो रही थी तो एराक्त हो गया मेरा पेनिस भी

लोवेलीन : हाआँ फील कर रही थी मई. बुत तू इतनी ज़ोर से क्यू चूबो रहा था? रश था तो ऐसा हो जाता है आख़िर तू भी लड़का है.

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