माँ की प्यासी चुत भाग 1

मेरा नाम रवि है और मैं आप लोगों को अपनी सच्ची कहानी बता रही हूँ जो की कुछ साल पहले मेरे साथ हुई.

मैं अपनी माँ के साथ एक गाओं मे रहता हूँ. मैने शहर के एक स्कूल से 12 पास की और गाओं मे आ गया अपनी माँ के साथ रहने और खेती बरी संभालने. मेरी माँ चाहती थी की मैं शहर मे ही रहूं पर मेरे पापा ने ज़ोर देकर कहा की अब मुझे ही खेती बरी संभालने हैं सो मैं गाओं मे आ गया. मेरे पापा शहर मे रहते हैं और महीने मे एकबार ही घर पर आते हैं. हमारे घर पर दो कमरे थे,

एक मेरा और दूसरा मेरी माँ का.मेरी आगे 19 है और माँ की 40 है. मेरी माँ एक बहुत ही कामुक औरत है. माँ वैसे तो घर मे सारी, ब्लाउस और लहंगा पहनती है पर रात को सोते समय अपना लहंगा खोल कर सिर्फ़ ब्लाउस और सारी पहन लेती है. मेरी माँ के माममे 38D साइज़ के हैं और उसकी गाँड बहुत टाइट दिखती है. रात को सोते समय अक्सर मैं उनके मम्मो को देख सकता हूँ उनके ब्लाउस से झँकते हुए जब वो सो रही होती है तब. एक दिन मैने उनके जाँघ देख लिए. वो सो रही थी और उनकी सारी जाँघ पर आ गयी थी तो मैने उसके सफेद सफेद जाँघ देख लिए. मेरा लंड एकद्म खड़ा हो गया और मैं जल्दी से बातरूम मे जाकर मूठ मारकर आ गया. मैने सोचा पता नहीं माँ नंगी कैसे दिखती होगी. मेरे जाने के कुछ दीनो बाद से ही मैने देखा की माँ थोड़ी बेचैन है. मैने पूछा तो माँ बोली की कोई परेशानी नहीं है.

कुछ दीनो के बाद मेरे चाचा आए. उनकी उमर 60 थी. मैने देखा की माँ बहुत खुश लग रही है. चाचा को रात को रहना था हमारे घर पर और अगले दिन सुबह को अपने गाओं लौटना था. चाचा को दूसरा कमरा देकर माँ बोली की मैं रात को उनके साथ ही बिस्तर पर सो जाओं. रात को मैं और माँ बिस्तर पर सो गये.

अचानक कुछ आवाज़ से मेरी नींद टूटी तो देखा की माँ कमरे का दरवाज़ा बंद करके कहीं जा रही है. मैने सोचा रात को माँ कहाँ जा रही होगी. मैं उठा और दूसरे दरवाज़े से बाहर आकर देखा की माँ चाचा के कमरे मे जा रही है. मैं जल्दी से खिड़की के पास गया और उसमे से चुपके चुपके देखने लगा.

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माँ के घुसते ही साथ चाचा बोले, ‘कितनी देर लगा दी तुमने शीला, कब्से मेरा लंड फंफंना रहा है. माँ बोली, “ रवि के सोने का इंतेज़ार कर रही थी मैं तो. चूत तो मेरी भी कब से पानी छोड़ रही है आप के घोड़े जैसा लंड के बारे मैं सोच के, मैं भी बहुत बेचैन हूँ आपके मोटे डंडे को सहलाने के लिए. देखिए ना मेरी चूत कैसे तड़प रही है आपके लंड को पाने के लिए.”

यह बोलकर माँ ने जल्दी से अपनी साडी कमर तक उठाई और चाचा को अपनी चूत दिखाने लगी. मैने भी माँ की चूत को देखा, चूत पर बाल का तो कोई निशान भी नही था, चाचा ने झट से अपनी हथेली उसकी चूत पे रख दी और उसे घिसने लगे. माँ अपने हाथ को चाचा के लूँगी के पास ले गये और उसे खोल दिया. जैसे हे माँ ने चाचा का लंड देखा “है हाए दायया ! 4 साल पहले भी तो आप से ही चुदवाती थी पर उस वक़्त तो इतना बड़ा नही था ”

चाचा बोले सर्जरी करवाइ है मेरी कुट्टिया, चल अपने कपड़े उतार और जल्दी नंगी हो जा. 4 साल हो गये तुझे चोदे हुए.”अब मैं समझा क्यूँ माँ चाहती थी की मैं शहर मे ही रहूं.

जिससे की वो चाचा से चुदवाती रहे. अब जल्दी से अपने कपड़े उतरने लगी और अपनी चोली और सारी को उतार फेंका. तब तक चाचा भी नंगे हो गये. अब मैने माँ को पूरी तरह नंगा देखा. उसके मुममे बहुत बड़े बड़े थे और उसके निपल तो एकदम खड़े थे. चाचा का लंड करीब 9+ होगा अब चाचा लेट गये और माँ झट से चाचा के उप्पर 69 के पोज़िशन मे हो गये.

चाचा ने माँ की चूत को चाटना चालू किया और माँ ने चाचा के लंड को चूसने लगी. माँ अपने मूह मे चाचा के लंड को ले लिया और उसको पूरी तरह से अपने मूह मे घुसने लगी. उधर चाचा माँ की चूत को चाटने के साथ साथ उसकी चूत अंदर अपनी दो उंगली डाल दी और आगे पीछे करने लगे.

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माँ धीरे धीरे ऊउउइईई माआअ ….. आआहह……. ऊऊओह…. करते हुए सिसकियाँ लेने लगी.

माँ …”आप की उंगली भी किसी लंड जैसे है भैया,

चाचा….” उंगली लेते वक़्त भैया ना कहा कर रानी.

माँ अब चाचा के लंड को बहुत ज़ोर ज़ोर से चूस रहे थी और उनके अंदो (बॉल्स) को दबाने लगी. चाचा बोले,” आबे साली मेरा माल मूह मे ही ले लेगी तो तेरे चूत मे लंड कौन लेगा. चल सीधी होकर मेरे लंड पर बैठ जा और सवारी शुरू कर दे.”

माँ कुछ देर तक वैसे ही चाचा के लंड को चूस्टी रहे फिर उठकर सीधी हो गयी और चाचा के पैरो के बीच बैठ कर उसके लंड को हाथ से मसालने लगी.

फिर माँ झुकी और चाचा के लंड को चाटने लगी और फिर पूरा लंड मूह मे घुसा लिया. ऐसा करते समय माँ की गाँड उप्पर हो गयी और मुझे उसकी गाँड और चूत दोनो की एक साथ दर्शन हो गयी.

तब मैने देखा की माँ जैसे जैसे चाचा का लंड और थैला चूस्टी चाचा भी अपने पैर के अंगूठे से माँ की चूत पर घिसते जाते. अचानक मैने देखा की चाचा का अंगूठा पूरा माँ की चूत मे चला गया है और माँ अचानक ही एक ज़ोर की सिसकी लेकर चाचा के उप्पर लेट गयी. मैं समझ गया की माँ ने अपना पानी छोड़ दिया चाचा पर.

चाचा ने अब माँ की चुचि से खेलना शुरू किया और उसे मूह मे ले लिए. दूसरे चुचि को वो हाथ से दबाने लगे और उसकी घुंडी को मसालने लगे. माँ एकद्म से फिर गरम हो गयी और चाचा के लंड से खेलना शुरू कर दिया. अब माँ चाचा के लंड को हाथ से पकड़ कर अपने चूत को पास लाई और धीरे से उस पेर बैठ गयी और उनके लंड को अपने चूत मे दल लिया.

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