माँ बेटी को रंडी बनाया

रागिनी ने मौसी से कहा, “आज मैं अंकल के साथ हीं सो जाती हूँ, तुम लोग दूसरे कमरे में सो जाना।”

सबसे छॊटी बेटी रीता ने कहा, “हम आपके पैर दबा दें अंकल?”
मौसी बोली, “नहीं बेटी, दीदी है न… वो अंकल को आराम से सुला देगी। तुम चिन्ता मत करो। ले जाओ रागिनी अपने अंकल को…आराम दो उनको. थके होंगे।”

रागिनी मेरे साथ एक कमरे में चल दी। अन्दर जाते ही हम दोनों निवस्त्र हो गए. उस रात रागिनी ने मुझे कुछ करने नहीं दिया। आराम से मुझे लिटा दी और खुद हीं मेरा लन्ड चूसी, उसको खड़ा की। फ़िर मेरे उपर चढ़ कर अपने चूत में मेरा लन्ड अपने हाथ से पकड़ कर घुसाई और फ़िर उपर से खुब हुमच हुमच कर चोदी। जल्दी हीं वो भी गर्म हो गई और आह आह आह, उउह उउह उउउह करने लगी। बिना इस चिन्ता के कि बाहर अभी सब जगे हुए हैं और उसके मुँह से निकल रही आवाज वो सब सुन रहे होंगे, उसने मेरे लन्ड पर अपनी चूत को खुव नचाया, इतना कि अब तो फ़च फ़च फ़च…की आवाज होने लगी थी। वो हाँफ़ रही थी…आआह आआह आआह और मैं भी हूम्म्म हूम्म्म्म हूऊम कर रहा था। करीब 15 मिनट की हचहच फ़चफ़च के बाद मेरे भीतर का लावा छूटा…आआआअह्ह्ह और मैंने अपना पानी उसकी चूत में छोड़ दिया। रागिनी ने भी उसी समय अपना पानी छोड़ा। और फ़िर अपने सलवार से अपना चूत पोछते हुए मेरे ऊपर से उतर गई। मुझे प्यास लग गयी थी. मैंने रागिनी को पानी लाने को कहा . उसने कमरे से ही अपनी मौसी को पानी के लिए आवाज़ लगाई. और अपने आप को एवं मुझे एक चादर से ढँक लिया. उसकी मौसी बिंदा तुरंत ही पानी ले कर आयी और नजरें झुकाए खुकाए हम दोनों की अर्द्धनंगी हालत को देखते हुए पानी का जग टेबल पर रख चली गयी. मैंने तीन गिलास पानी पीया. मैं सच में थक गया था, सो करवट बदल कर सो गया।

अगले दिन खाना खाने के बाद करीब 12 बजे रागिनी और उसकी मौसेरी बहनें मुझे आस-पास की पहाड़ी पर घुमाने ले गई। हिमालय अपने सुन्दर लहजे में अपना सारा सौन्दर्य बिखेरे था। एकांत देख कर रागिनी ने मुझे बता दिया कि आज रात में बिन्दा मेरे साथ सोएगी, मुझे उसको चोद कर सब सेट कर लेना है, वैसे वो सब पहले से सेट कर चुकी थी। करीब 5 बजे हम घर लौटे, तो उसकी मौसी बिन्दा हम सब के लिए खाना बना चुकी थी। खाना-वाना खाने के बाद हम सब पास में बैठ कर इधर-उधर की गप्पें करने लगे। पहाड़ी गाँव में लोग जल्दी सो जाते थे सो करीब आठ बजे तक पूरा सन्नाटा हो गया, तो रागिनी बोली, “मौसी, अंकल थक गए होंगे सो तुम उनके पैरों में थोड़ा तेल मालिश कर देना, मैं रीना के साथ उसके बिस्तर पर सो जाऊँगी।” इशारा साफ़ था कि आज मुझे बिन्दा को चोदना था।

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बिन्दा मुझे देख कर मुस्कुराई और तेल की डिब्बी ले कर मुझे कमरे में चलने का इशारा की। पाँच चूतवालियों से घिरा मैं अपने किस्मत को सराहता हुआ बिन्दा के पीछे चल दिया और फ़िर कमरे के किवाड़ को खुला ही रहने दिया तथा सिर्फ उसके परदे फैला दिए. उस कमरे के बरामदे पर ही चारपायी पर उसकी सभी बेटियां और रागिनी लेटी हुई थी. बिन्दा तब तक अपने बदन से साड़ी उतार चुकी थी और भूरे रंग के साया और सफ़ेद ब्लाऊज में मेरा इंतजार कर रही थी। मैं उसे देख कर मुस्कुराया और अपने कपड़े खोलने लगा। वो मुझे देख रही थी और मैं अपने सब कपड़े उतार कर पूरा नंगा हो गया। मेरा लन्ड अभी ढ़ीला था पर अभी भी उसका आकार करीब 6″ था। बिन्दा की नजर मेरे लटके हुए लन्ड पर अटकी हुई थी।

मैंने उसके चेहरे को देखते हुए, अपने हाथ से अपना लन्ड हिलाते हुए जोर से कहा, “फ़िक्र मत करो, अभी तैयार हो जाएगा…आओ चूसो इसको।”

मेरे हिलाने से मेरे लन्ड में तनाव आना शुरु हो गया था और मेरा सुपाड़ा अब अपनी झलक दिखाने लगा था। बिन्दा ने आगे बढ़ कर बिना किसी हिचक या शर्मिंदगी के मेरे लन्ड को अपने हाथों में पकड़ा और सहलाई। मादा के हाथ में जादू होता है, सो मेरा लन्ड बिन्दा के हाथ के स्पर्श से हीं अपना आकार ले लिया।बिन्दा ने मुझे बिस्तर पर लिटा कर लन्ड अपने मुँह में भर लिया।
5-8 बार अंदर-बाहर करके बिन्दा बोली- आप सीधा आराम से लेटिए, मैं तेल लगा देती हूँ।

मैंने उसे बाहों में भर कर अपने ऊपर खींच लिया और बोला, “कोई परेशानी की बात नहीं है। मेरी सब थकान खत्म हो जाएगी जब तुम्हारी जैसी मस्त माल की चूत मेरे लन्ड की मालिश करेगी।” मुझे पता था की हम दोनों की एक – एक आवाज खुले किवाड़ के द्वारा उन बेटियों के काम में स्पष्ट सुनाई पड़ रहे होंगे.

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मैंने बिन्दा के होठों से अपने होठ सटा दिए और वो भी चुमने में मुझे सहयोग करने लगी। मैंने उसके ब्लाऊज और पेटीकोट खोल दिए तो उसने खुद से अपने को उन कपड़ों से आजाद कर लिया।

मैंने बिन्दा को अपने से थोड़ा अलग करते हुए कहा, “देखूँ तो कैसी दिखती है मेरी जान…”।

बिन्दा मेरे इस अंदाज पर फ़िदा हो गई, उसके गाल लाल हो गए। बिन्दा अपने उमर से करीब 5 साल छोटी दिख रही थी दुबली होने की वजह से। वैसे भी उसकी उमर 35 के करीब थी। रंग साफ़ था, चुचियाँ थोड़ी लटकी थीं, पर साईज में छॊटी होने की वजह से मस्त दिख रही थीं। सपाट पेट, गहरी नाभी और उसके नीचे कालें घने झाँटों से घिरी चूत की गुलाबी फ़ाँक। काँख में भी उसको खुब सारे बाल थे। मैंने धीरे-धीरे उसके पूरे बदन पर हाथ घुमाने शुरु किए और उसमें गर्मी आने लगी। जल्द हीं उसका बदन चुदास से भर गया और तब मैंने उसकी चूचियों और चूत पर हमला बोल दिया, अपने हाथों और मुँह से। उसकी सिसकी पूरे कमरे में गुजने लगी। करीब आधा घन्टा में वो बेदम हो गई तो मैंने उसको सीधा लिटा कर उसके पैरों को फ़ैला कर ऊपर उठा दिया और बिना कोई भूमिका बाँधे, एक हीं धक्के में अपने लन्ड को पूरा उसकी चूत में घुसा दिया।

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