माँ बेटे का प्यार और संस्कार भाग 2

मैं फ़िर पलंग पर लेट कर अम्मा की कमर से लिपट गया और उसके पेटीकोट के ऊपर से ही उसके पेट के निचले भाग में अपना मुंह दबा दिया. अब उसके गुप्तांग और मेरे मुंह के बीच सिर्फ़ वह पेटीकोट था जिसमें से मां की योनि के रस की भीनी भीनी मादक खुशबू मेरी नाक में जा रही थी. अपना सिर उसके पेट में घुसाकर रगड़ते हुए मैं उस सुगंध का आनंद उठाने लगा और पेटीकोट के ऊपर से ही उसके गुप्तांग को चूमने लगा.

मेरे होंठों को पेटीकोट के कपड़े में से मां के गुप्तांग पर ऊगे घने बालों का भी अनुभव हो रहा था. उस मादक रस का स्वाद लेने को मचलते हुए मेरे मन की सांत्वना के लिये मैंने उस कपड़े को ही चूसना और चाटना शुरू कर दिया

आखिर उतावला होकर मैंने अम्मा के पेटीकोट की नाड़ी खोली और उसे खींच कर उतारने लगा. मां एक बार फ़िर कुछ हिचकिचाई. “ओ मेरे प्यारे बेटे, अब भी वक्त है … रुक जा मेरे बेटे …. ये करना ठीक नहीं है रे …”

मैंने उसका पेट चूमते हुए कहा “अम्मा, मैं तुझसे बहुत प्यार करता हूं, तुम मेरे लिये संसार की सबसे सुंदर औरत हो. मां और बेटे के बीच काम संबंध अनुचित है यह मैं जानता हूं पर दो लोग अगर एक दूसरे को बहुत चाहते हों तो उनमें रति क्रीड़ा में क्या हर्ज है?.”

मां सिसकारियां भरती हुई बोली. “पर सुन्दर, अगर किसी को पता चल गया तो?”

मैंने कपड़े के ऊपर से उसकी बुर में मुंह रगड़ते हुए कहा. “अम्मा, हम चुपचाप प्रेम किया करेंगे, किसी को कानों कान खबर नहीं होगी.” वह फ़िर कुछ बोलना चाहती थी पर मैंने हाथ से उसका मुंह बंद कर दिया और उसके बाल और आंखें चूमने लगा. भाव विभोर होकर अम्मा ने आंखें बंद कर लीं और मैं फ़िर उसके मादक रसीले होंठ चूमने लगा.

अचानक मां ने निढाल होकर आत्मसमर्पण कर दिया और बेतहाशा मुझे चूमने लगी. उसकी भी वासना अब काबू के बाहर हो गयी थी. मुंह खोल कर जीभें लड़ाते हुए और एक दूसरे का मुखरस चूसते हुए हम चूमाचाटी करने लगे. मैंने फ़िर उसका पेटीकोट उतारना चाहा तो अब उसने प्रतिकार नहीं किया. पेटीकोट निकाल कर मैंने फ़र्श पर फ़ेंक दिया.

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मां ने किसी नई दुल्हन जैसे लाज से अपने हाथों से अपनी बुर को ढक लिया. अपने उस खजाने को वह अपने बेटे से छुपाने की कोशिश कर रही थी. मैंने उसके हाथ पकड़कर अलग किये और उस अमूल्य वस्तु को मन भर कर देखने लगा.

काले घने बालों से भरी उस मोटी फ़ूली हुई बुर को मैंने देखा और मेरा लंड और उछलने लगा. इसी में से मैं जन्मा था! मां ने शरमा कर मुझे अपने ऊपर खींच लिया और चूमने लगी. उसे चूमते हुए मैंने अपने हाथों से उसकी बुर सहलाई और फ़िर उसके उरोजों को चूमते हुए और निपलों को एक छोटे बच्चे जैसे चूसते हुए अपनी उंगली उसकी बुर की लकीर में घुमाने लगा.

बुर एकदम गीली थी और मैंने तुरंत अपनी बीच की उंगली उस तपी हुई कोमल रिसती हुई चूत में डाल दी. मुझे लग रहा था कि मैं स्वर्ग में हूं क्योंकि सपने में भी मैंने यह नहीं सोचा था कि मेरी मां कभी मुझे अपना पेटीकोट उतार कर अपनी चूत से खेलने देगी.

मैं अब मां के शरीर को चूमते हुए नीचे खिसका और उसकी जांघें चूमने और चाटने लगा. जब आखिर अपना मुंह मैंने मां की घनी झांटों में छुपा कर उसकी चूत को चूमना शुरू किया, तो कमला, मेरी मां, मस्ती से हुमक उठी. झांटों को चूमते हुए मैंने अपनी उंगलियों से उसके भगोष्ठ खोले और उस मखमली चूत का नजारा अब बिलकुल पास से मेरे सामने था. मां की चूत में से निकलती मादक खुशबू सूंघते हुए मैंने उसके लाल मखमली छेद को देखा और उसके छोटे से गुलाबी मूत्रछिद्र को और उसके ऊपर दिख रहे अनार के दाने जैसे क्लिटोरिस को चूम लिया.

अपनी जीभ मैंने उस खजाने में डाल दी और उसमें से रिसते सुगंधित अमृत का पान करने लगा. जब मैंने मां के क्लिटोरिस को जीभ से रगड़ा तो वह तड़प उठी और एक अस्फ़ुट किलकारी के साथ अपनी हाथों से मेरा सिर अपनी बुर पर जोर से दबा लिया. मैंने अब एक उंगली अम्मा की चूत में डाली और उसे अंदर बाहर करते हुए चूत चूसने लगा.

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मां की सांस अब रुक रुक कर जोर से चल रही थी और वह वासना के अतिरेक से हांफ़ रही थी. मैंने खूब चूत चूसी और उस अनार के दाने को जीभ से घिसता रहा. साथ ही उंगली से अम्मा को हस्तमैथुन भी कराता रहा. सहसा अम्मा का पूरा शरीर जकड़ गया और वह एक दबी चीख के साथ स्खलित हो गयी. मैं उसका क्लिट चाटता रहा और चूत में से निकलते रस का पान करता रहा. बड़ी सुहावनी घड़ी थी वह. मैंने मां को उसका पहला चरमोत्कर्ष दिलाया था.

तृप्त होने के बाद वह कुछ संभली और मुझे उठाकर अपने ऊपर लिटा लिया. मेरे सीने में मुंह छूपाकर वह शरमाती हुई बोली. “सुंदर बेटे, निहाल हो गयी आज मैं, कितने दिनों के बाद पहली बार इस मस्ती से मैं झड़ी हूं.”

“अम्मा, तुमसे सुंदर और सेक्सी कोई नहीं है इस संसार में. कितने दिनों से मेरा यह सपना था तुमसे मैथुन करने का जो आज पूरा हो रहा है.”

मां मुझे चूमते हुए बोली. “सच में मैं इतने सुंदर हूं बेटे कि अपने ही बेटे को रिझा लिया?”

मैं उसके स्तन दबाता हुआ बोला. “हां मां, तुम इन सब अभिनेत्रियों से भी सुंदर हो.”

मां ने मेरी इस बात पर सुख से विभोर होते हुए मुझे अपने ऊपर खींच कर मेरे मुंह पर अपने होंठ रख दिये और मेरे मुंह में जीभ डाल कर उसे घुमाने लगी; साथ ही साथ उसने मेरा लंड हाथ में पकड़ लिया और अपनी योनि पर उसे रगड़ने लगी. उसकी चूत बिलकुल गीली थी. वह अब कामवासना से सिसक उठी और मेरी आंखों में आंखें डाल कर मुझ से मूक याचना करने लगी. मैंने मां के कानों में कहा. “अम्मा, मैं तुझे बहुत प्यार करता हूं, अब तुझे चोदना चाहता हूं.”

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