मॅ बनी मेरी रखैल

हेलो दोस्तो मेरा नाम अजय है में नॉइदा का रहने वाला हू और कहानी मा और मेरी चुदाई की साची घटना है. मेरे परिवार मे बस में और मेरी मा है, मों का नाम आशा है और वो एक सरकारी स्कूल मे टीचर है. मा का पिछले साल ही तलाक़ हो गया और अब मा और में अकेले रहते है.

ये बात है जब मेरी इंजिनियरिंग का आखरी साल चल रहा था और कोविद के चलते मा और में पूरे समय घर पे ही रहते थे. और उसी बीच मा और मेरा एक अलग रिश्ता बना चुदाई का. दोस्तो मा की उमर करीब 45 है और उनका फिगर बिल्कुल एक औरत के जेसा गड्राया हुआ और भरा हुआ शरीर है. मा के चुचे भी काफ़ी बड़े है और उनकी गांद का आकर देखते ही किसी का भी लंड खड़ा हो जाए.

तो चलिए डाइरेक्ट कहानी पे आते है.

मा के तलाक़ के टाइम पर घर में काफ़ी टेन्षन थी और मेरा पड़ाई पे ध्यान कम और फालतू की बातों मे ज़्यादा रहता था. तभी मैने मा बेटे की चुदाई की कहानी पड़ना शुरू करा और मा के नाम की मुति रोज़ मरता था. और अब में मा को अलग नज़र से भी देखने लगा था. मेरी हवस बदती ही जेया रही थी. काई बार मैने चुपके से मा की नहाते हुए वीडियो भी बनाई और अपने दोस्तो को भी दिखाई.

लेकिन दोस्तो अब में मा की चुदाई करना चाहता था और मा की छूट की खुश्बू लेना चाहता था. एक नया रिश्ता मा के साथ बनाना चाहता था बस एक ठीक मौके के ताक मे था अब.

तो दोस्तो में घर मे बस अपने अंडरवेर पहने रहता था. क्यूंकी गर्मी का भी समय था तो मा भी अक्सर शाम से ही अपनी निघट्य पहें लेती थी. मुझे जब भी मौका मिलता में मुति मारना शुरू कर देता. और मा ने भी की बार मुझे मुति मरते देखा लेकिन उन्होने हर बार नज़रअंदाज़ कर दिया.

एक बार में और मा टीवी देख रहे थे तो एक रोमॅंटिक सीन के चलते मेरा लॉडा खड़ा हो गया. और उसका उभार अंडरवेर से सॉफ दिख रहा था. मा ने मेरी तरफ देखा लेकिन फिरसे कुछ भी नही कहा.

ऐसे काई बार मा ने मुझे पकड़ा लेकिन मा समझती थी की लौंडा जवान हो रहा है और ये सब करेगा ही. लेकिन एक दिन मा ने मेरे फोन मे अपनी नंगी नहाने वाली वीडियो देख ली और मा हैरान रह गयी और मुझे बहोट दाँत लगाई.

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आशा – तुझे शरम नही आई अपनी मा की नहाए वक़्त वीडियो बनाने मे. बेटा में तेरी मा हू तू ऐसा मत सोच मेरे लिए.. ये पाप है!

अजय – मों ग़लती हो गयी.. आयेज से नही होगा ये और मैं अपना सिर नीचे करके खड़ा हो गया.

इस बात को 1 हफ़्ता हो गया था. अब मा ने मेरे से बात करना बंद कर दिया था और रोज़ डिन्नर के बाद बस मा अपने कमरे मे चली जाती. तो मैने ही मा से बोला-

अजय- मा मुझे पता है मुझसे ग़लती हुई है लेकिन मेरी कोई गर्लफ्रेंड भी नही है और में बहोट अकेला महसूस करता हू… आपको निराश नही करना चाहता था लेकिन ये आज के बाद नही होगा.

आशा – ठीक है बेटे में नाराज़ नही हू.

अजय- मा पापा के जाने के बाद आप भी तो अकेले हो लेकिन अगर आप चाहो तो आपका बेटा भी आपको सारे सुख दे सकता है. क्यूंकी मेरी मा होने से पहले आप एक औरत हो…

मा ने मेरे एक ज़ोरदार थप्पड़ लगा दिया.

आशा-बदतमीज़ नालयक.. तेरे मे बिल्कुल शरम बाकी नही रह गयी..निकल जा यहा से!

में बिना कुछ और कहे वाहे से चला गया और अपने रूम मे जाके फिरसे मीठी मरके सू गया.

कुछ दिन और बीट गये मा अभी भी नाराज़ रही. फिर मैने एक और बार हिम्मत करके मा से बात करने की कोशिश करी इस बार मा ने मुझे आराम से समझाया. और उन्होने बोला की एक मा बेटे मे ये रिश्ता नही हो सकता बेटा.

अजय-मा इस दुनिया मे आपके साइवा मेरा कोई नही है और अगर आपको ही खुश ना रख पौ तो फिर क्या फयडा. मा आपकी खुशी के लिए में ये घर के राज़ को किसी को नही पता चलने दूँगा.

आशा – बेटे में खुश हू, तू मेरी चिंता मत कर और ये सब कचरा अपने दिमाग़ से निकल दे.

मों ने मुझे हग करा और फिर हम अपने अपने रूम मे चले गये.

रात के करीब 12 बजे में किचन मे पानी लेने गया तो मैने देखा की मों का रूम तोड़ा खुला हुआ है और कुछ आवाज़ भी आ रही है. लगा की मा की तबीयत खराब है. तो में जल्दी से उनके रूम मे गया और पूरा दरवाज़ा खोल दिया. सब देख कर पता चला की मा अपनी छूट मे उंगली कर रही थी. में कुछ भी ना बोला और अपने कमरे मे चला गया.

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अगले दिन मा किचन मे खाना बना रही थी तो मैने मों को पेचए से पकड़ लिया और उनकी पीछे से हिग करने लगा. मेरा लंड मा के बदन से टच होते है खड़ा हो गया और मा ने मुझे फिर हटा दिया. मुझे लगा मा अभी भी नाराज़ है.

उसी दिन दोपहर को मा मेरे रूम मे आ गयी. मा को देख कर में हैरान रह गया. उन्होने लाल सारी पह्न र्खी थी, पूरा मेक उप भी था और हाथ मे सिंदूर की डिब्बी.

आशा-ये वोही सारी है जो मैने तेरे पापा के लिए पहनी थी सुहग्रत पे?

मा ने मेरे हाथ मे सिंदूर की डब्बू दी है बोले की भर दे मेरी माँग और बदल दे ये रिश्ता.

दोस्तो मैने बिना देर करे मा की माँग भर दी और उन्हे गले लगा लिया. तभी मा रोने भी लगी लेकिन मैने मा का जिस्म चूमना शुरू कर दिया.

अजय-आज से में आपको नाम से ही बूलौँगा, तुम मेरी पत्नी हो अब. आशा तुम्हे थोड़े टाइम तक ये रिश्ता अजीब लगेगा लेकिन फिर यही रिश्ता आपको सुख भी देगा.

बस अब मैने ढेरे ढेरे मा के कपड़े निकलना चालू कर दिए और कुछ ही देर मे मैने मा को पूरा नंगा कर दिया. उनकी मुलायम छूट गांद देखर मज़ा आ गया.

फिर मैने मा को दिया एक लंबा स्मूच उनके चुचे मसले. फिर मैने मा को उठा कर बेड पे लिटा दिया और एक भूके जानवर की तरह मा की चुदाई करनी स्टार्ट कर दी. 15 मीं बाद मेरा निकालने वाला था तो मैने मा से पूछा की कहा निकालु तो मा ने कहा बाहर. तो मैने लंड लेके उनके मुहह मे डाल दिया और सारा माल वही डिसचार्ज कर दिया.

तो दोस्तो इस तरह मा और मेरी बीच चुदाई चालू हो गयी. हम रोज़ कुछ अलग करते थे और मा को भी ये अब अछा लगने लगा था.