कमुक्त आश्रम गुरूजी 2

कोई दस बजे वो कार से अपनी सहेली के घर चली गई। (मधु कार चला लेती है) जब मैं गेट बंद करके मैं ड्राइंग रूम में वापस आया तो मिक्की बाथरूम में थी शायद नहा रही थी।
मैं स्टडी रूम में चला गया। मैंने दो दिनों से अपने मेल चेक नहीं किये थे। मैंने जब कम्प्यूटर ओन किया तो सबसे पहले स्टार्ट मेन्यू में जाकर रिसेंट डॉक्यूमेंट्स देखे तो मेरी बांछे ही खिल गई। जैसा मैंने सोचा था वो ही हुआ। वीडियो पिक्चर की फाइल्स खोली गई थी और ये फाइलें तो मेरी चुनिन्दा ब्ल्यू-फिल्मों की फाइलें थी। आईला…!! मेरा दिल बेतहाशा धड़कने लगा। अब मेरे समझ में आया कि कल दोपहर में मिक्की स्टडी रूम से घबराई सी सीधे रसोई में क्यों चली गई थी।
मोनिका डार्लिंग तूने तो कमाल ही कर दिया। मेरे रास्ते की सारी बाधाएं कितनी आसानी से एक ही झटके में इस कदर साफ़ कर दी जैसे किसी ने कांटेदार झाड़ियाँ जड़ समेत काट दी हो और कालीन बिछा कर ऊपर फूल सजा दिए हो। अब मैं किसे धन्यवाद दूँ, अपने आपको, कंप्यूटर को, मिक्की को या फिर लिंग महादेव को ?
मैंने इन फाइल्स को फिर से पासवर्ड लगा कर लॉक कर दिया और अपनी आँखें बंद कर के सोचने लगा। मिक्की ने इन फाइल्स और पिक्चर्स को देख कर कैसा अनुभव किया होगा ? कल पूरे दिन में उसने कम्प्यूटर की कोई बात नहीं की वरना वो तो मेरा सिर ही खा जाती है। मैं भी कतई उल्लू हूँ मिक्की की आँखों की चमक, उसका सजाना संवारना, मेरे से चिपक कर बाइक पर बैठना, शुक्र पर्वत की बात करना, बंदरों की ठोका-ठुकाई की बात इससे ज्यादा बेचारी और क्या इशारा कर सकती थी। क्या वो नंगी होकर अपनी बुर हाथों में लिए आती और कहती लो आओ चोदो मुझे ? मुझे आज महसूस हुआ कि आदमी अपने आप को कितना भी चालाक, समझदार और प्रेम गुरु माने नारी जाति को कहाँ पूरी तरह समझ पाता है फिर मेरी क्या बिसात थी।
कम्प्यूटर बंद करके मैं आँखें बंद किये अभी अपने ख्यालों में खोया था कि अचानक मेरी आँखों पर दो नरम मुलायम हाथ और कानों के पास रेंगते हुए साँसों की मादक महक मेरे तन मन को सराबोर कर गई। इस जानी पहचानी खुशबू को तो मैं मरने के बाद भी नहीं भूल सकता, कैसे नहीं पहचानता। मेरे जीवन का यह बेशकीमती लम्हा काश कभी ख़त्म ही न हो और मैं क़यामत तक इसी तरह मेरी मिक्की मेरी मोना मेरी मोनिका के कोमल हाथों का मखमली स्पर्श महसूस करता रहूँ। मैंने धीरे से अपने हाथ कुर्सी के पीछे किए। उसके गोल चिकने नितम्ब मेरी बाहों के घेरे में आ गए, बीच में सिर्फ़ नाईटी और पैन्टी की रुकावट थी।
उफ्फ्फ… मिक्की की संगमरमरी जांघे उस पतली सी नाइटी के अन्दर बिलकुल नंगी थी। मैं इस लम्हे को इतना जल्दी ख़त्म नहीं होने देना चाहता था। पता नहीं कितनी देर मैं और मिक्की इसी अवस्था में रहे। फिर मैंने हौले से उसकी नरम नाज़ुक हथेलियों को अपने हाथों में ले लिया और प्यार से उन्हें चूमने लगा। मिक्की ने अपना हाथ छुड़ा लिया और मेरे सामने आ कर खड़ी होकर पूछने लगी- कैसी लग रही हूँ?
मैंने उसके हाथ पकड़ कर उसे अपनी ओर खींच लिया और अपनी गोद में बैठा कर अपने जलते होंठ उसके होंठों पर चूमते हुए कहा- सुन्दर, सेक्सी ! बहुत प्यारी लग रही है मेरी, सिर्फ़ मेरी मिक्की !
मिक्की ने शरमाते हुए गर्दन झुका ली !
मैंने उसकी ठुड्डी पकड़ कर उसके चेहरे को ऊपर उठाया और फ़िर से उसके गुलाबी लब मेरे प्यासे होंठों की गिरफ़्त में आ गए। बरसों से तड़फती मेरी आत्मा उस रसीले अहसास से सराबोर हो गई। जैसे अंधे को आँखें मिल गई हो, भूले को रास्ता और बरसों से प्यासी धरती को सावन की पहली फुहार। जैसे किसी ने मेरे जलते होंटों पर होले से बर्फ की नाज़ुक सी फुहार छोड़ दी हो।
अब तो मिक्की भी सारी लाज़ त्याग कर मुझे इस तरह चूम रही थी कि जैसे वो सदियों से कैद एक ‘अभिशप्त राजकुमारी’ है, जैसे उसे केवल यही एक पल मिला है जीने के लिए और अपने बिछुड़े प्रेमी से मिलने का। मैं अपनी सुधबुध खोये कभी मिक्की की पीठ सहलाता कभी उसके नितम्बों को और कभी होले से उसकी नरम नाज़ुक गुलाब की पंखुड़ियों जैसे होंठो को डरते डरते इस कदर चूम रहा था कि कहीं भूल से भी मेरे होंठो और अंगुलियों के खुरदरे अहसास से उसे थोड़ा सा भी कष्ट न हो। मेरे लिए ये चुम्बन उस ‘अनमोल रत्न’ की तरह था जिसके बदले में अगर पूरे जहां की खुदाई भी मिले तो कम है।
आप जानते होंगे मैं स्वर्ग-नर्क जैसी बातों में विश्वास नहीं रखता पर मुझे आज लग रहा था कि अगर कहीं स्वर्ग या जन्नत है तो बस यही है यही है यही है…!
अचानक ड्राइंग रूम में रखे फ़ोन की कर्कश घंटी की आवाज से हम दोनों चौंक गए। हे भगवान् इस समय कौन हो सकता है ? किसी अनहोनी और नई आफत की आशंका से मैं काँप उठा। मैंने डरते डरते फ़ोन का रिसीवर इस तरह उठाया जैसे कि ये कोई जहरीला बिच्छू हो। मेरा चेहरा ऐसे लग रहा था जैसे किसी ने मेरा सारा खून ही निचोड़ लिया हो।

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मैं धीमी आवाज में हेल्लो बोला तो उधर से मधु की आवाज आई, “आपका मोबाइल स्विच ऑफ आ रहा है !”
ओह ! क्या बात है?” मैंने एक जोर की सांस ली।
“वो वो मैं कह रही थी किऽऽ किऽऽ हाँ ऽऽ मैं ठीक ठाक पहुँच गई हूँ और हाँ !”
पता नहीं ये औरतें मतलब की बात करना कब सीखेंगी “हाँ मैं सुन रहा हूँ”
“आर।। हाँ वो मिक्की को दवाई दे दी क्या ? उसे हल्दी वाला दूध पिलाया या नहीं ?”
“हाँ भई हाँ दूध और दवाई दोनों ही पिलाने कि कोशिश ही कर रहा था !” मैंने मिक्की की ओर देखते हुए कहा “हाँ एक बात और थी कल सुबह भैया और भाभी दोनों वापस आ रहे हैं उन्होंने मोबाइल पर बताया है कि अंकल अब ठीक हैं।” मधु बस बोले जा रही थी “सुबह मैं आते समय उन्हें स्टेशन से लेती आउंगी तुम परेशान मत होना। ओ के ! लव ! गुड नाईट एंड स्वीट ड्रीम्स !”

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