कैसे दोस्त ने मेरी बेहेन की सील थोड़ी भाग 1

दोनो को अपने सामने ऐसा करते देख मैं हक्का-बक्का था. तभी सपना हंसते हुवे बोली, “ओह्ह भाय्या जाओ तुम बहुत मज़ाक करते हो.” वह दोनो आपस मैं इसी तरह की हरकत 2-3 मिनिट करते रहे फिर. सपना ने अपनी हँसी रोक कर कहा, “आहह भाय्या अब 3-4 दिन आराम रहेगा. मम्मी पापा तू 4 दिन बाद आएँगे. भाय्या?” “क्या है?” “ये आपके दोस्त तू बहुत डर रहे हैं. ये इतना डर क्यों रहे हैं?” “क्या पता तुम ही पूछ लो.” वह मेरी तरफ मूडी और मेरे कंधे पर हाथ रख बोली, “आप घबरा क्यों रहे हैं?” “ज्ज्ज जी नही नही मैं मैं न.. नही तो.” वह फिर खिल-खिलाकर हस्ने लगी. मैं उसकी उठती बैठती चुचियों को देखने लगा. मंन किया कि पकड़ लूँ पर डर गया. वह कुच्छ देर हँसती रही फिर मेरे दोनो हाथो को पकड़ मेरी आँखो मैं देखती बोली, “आप मेरे भाय्या के सबसे आछे दोस्त हैं. भाय्या आपकी बहुत तारीफ्फ करते हैं. कहते थे कि मेरा दोस्त बेचारा लल्लू है. कभी किसी लड़की को टच नही किया. कोई बात नही लो मेरी टच कर लो.” और इतना कह उसने मेरे दोनो हाथो को अपनी चुचियों पर रख लिया. उसकी चुचियों पर हाथ रखते ही मेरी धड़कन तेज़ हो गयी. मेरा गला सूख गया. मैं चुपचाप हाथ रखे रहा तो वह फिर खिल- खिलाकर हासणे लगी. हंसते-हंसते बोली, “भाय्या आप सच कहते थे कि आपका दोस्त लल्लू है. लो अब हाथ मैं दे दिया तू भी चुप बैठा है कुच्छ करता ही नही.” उसकी बात सुन हिम्मत कर मैने धीरे से उसकी चुचियों को दबाया तो मैं मज़े से भर गया. फिर दो तीन बार दोनो को दबाया तो वह अपने हाथ से अपनी शर्ट के बटन को खोलने लगी. शर्ट खुलते ही उसकी दोनो खूबसूरत कसी चुचियाँ नंगी हो गयी. वह शर्ट के नीचे कुच्छ भी नही पहने थी. मैं उसकी चुचियों को देखने लगा तो उसका भाई और मेरा दोस्त रमेश आगे आ दोनो चुचियों को पकड़ मसल्ते हुवे बोला, “लो यार अब तुम चुप बैठे हो और फिर कहोगे की बोर होते रहते हो. लो करो जो मंन मैं आए. मैं तो अपनी बहन की चुचियों को चूस-चूस कर पीता हूँ.” इतना कह वह मेरे सामने अपनी बहन की एक चूची को अपने मुँह मैं लेकर पीने लगा तो सपना ने मुझे दूसरी वाली को पीने का इशारा किया. मैं भी झुककर उसकी दूसरी चूची को पीने लगा. वह एक को अपने भाई के मुँह मैं दे दूसरी चूची को अपने भाई के दोस्त के मुँह मैं देकर चुस्वकार मज़ा ले रही थी. मुझे अनोखा मज़ा मिल रहा था और मैं उसकी चूची को चूस्ते हुवे सोच रहा था कि सच यह तो बहुत मज़ा देने वाली चीज़ है.

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दो तीन मिनिट बाद रमेश अलग हुवा और मुझे कुच्छ देर अपनी बहन की चूची को पीते देखने के बाद बोला, “चल सपना बेड पर चलते हैं.” “चलो भाय्या.” वह उठी और अपने भाई के बेड पर आकर लेट गयी. हम दोनो भी उसके पास आए तो रमेश ने सपना का स्कर्ट खींचकर उतार दिया. वह नीचे ब्लॅक पॅंटी पहने थी जिसमे से उसकी चूत उभरी हुई थी. मैं उसे देखने लगा तो वह बोली, “उम्म क्या देख रहे हैं आप? क्या कभी देखी नही किसी की?” “श न्न्न नही.” “इतने बड़े हो गये और किसी की नही देखी. अपनी बहन कंचन की भी नही?” “हाए नही.” “ओह्ह कैसे भाई हो? मेरे भाय्या तू मुझे एक साल से चोद रहे हैं और एक तुम हो की अपनी बहन की चूत भी नही देखी. हाए आपके ऊपर बहुत तरस आ रहा है. कंचन बहुत खूबसूरत है उसकी तो मुझसे भी अच्छी होगी.” वह खुलकर बिना शरम के बोल रही थी. उसका बड़ा भाई चुपचाप उसकी चुचियों को चूस और मसल रहा था. उसे जैसे मतलब ही नही था कि उसकी बहन मुझसे क्या बात कर रही है. वह मेरे गाल पर हाथ फेर बोली, “आप मेरे भाई के सबसे अच्छे दोस्त हैं इसलिए मैं आपको अपनी दिखाउन्गी. लीजिए चड्डी हटाकर देख लीजिए मेरी चूत.” उसकी बात सुन खुश हो गया. काँपते हाथों से उसकी काली चड्डी को एक तरफ किया तो उसकी चिकनी बिना बॉल वाली गोरी-गोरी चूत मेरी आँखो के सामने चमकने लगी. मैं ललचाया सा देखने लगा तो वह बोली, “लो मज़ा जैसे चाहो.” मैने उसकी चूत पर हाथ रखा तो मेरा लंड झटके खाने लगा. दो तीन बार हाथ फिराने के बाद उसकी चूत की दोनो फांको को खोलकर अंदर का गुलाबी च्छेद देखा तो मुँह मैं पानी आ गया. वह बोली, “चाट कर देखो मज़ा आ जाएगा.” मैं कई स्टोरी मैं लिखा देख चुक्का था कि चूत चाटने मैं बहुत मज़ा मिलता है इसलिए उसकी बात सुन चाटने को तैय्यर हुवा.. रमेश उसकी चुचियों मैं खोया हुवा था. मैने उसकी चड्डी को एकदम अलग कर दिया और अपनी जीभ उसकी चूत पर रख दी. चूत की सोंधी खुश्बू से नाक मस्त हो गयी. पूरी चूत पर ऊपर से नीचे तक जीभ चलाकर चाटने लगा. सच लड़की मैं बहुत मज़ा भरा होता है. रमेश सच कह रहा था कि वह कभी बोर नही होता. अभी 3-4 मिनिट ही चॅटा था कि वह अपने पैरों से धक्का दे मुझे अपनी चूत से अलग कर बोली, “हटो दूर, तुमको तो कुच्छ भी नही आता.”

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