कमीनी कामिनी की गाता भाग 2

आगे…

“बा्आ्आ्आ्आप रे्ए्ए्ए्ए्ए बा्आ्आ्आ्आप, इत्तन्ना्आ्आ्आ बड़ा्आ्आ्आ्आ लंड! न न न न नहींईंईंईंईंईंईंईंई।” बह घबरा गयी थी।

“क्या नहीं?”

“न न न न, तुम छोड़ो मुझे। छोड़ दो। रहने दो। मत चोदो।” वह डर गयी थी मेरा लंड देख कर।

“इतनी दूर तक आ कर अब कैसे छोड़ दूं।” अब मैं उसे छोड़ने के मूड में नहीं था। मुझे गरम उसी ने किया था और अब जब मेरा शरीर उस गरमी में झुलस रहा था तो उसका मना करना बहुत बुरा लगा मुझे। मैं अपने आपे में नहीं था। मैंने झपट्टा मारकर उसे दबोच लिया।

“छोड़ो मुझे।”

“अब नहीं छोड़ूंगा।”

“छोड़ो नहीं तो चिल्लाऊंगी।”

“चिल्लाओगी हरामजादी, अभी तक कह रही थी चोदो चोदो, अब क्या हुआ?” मैंने गुस्से मैं एक झापड़ लगा दिया। अब मेरा रौद्र रूप देख कर वह सहम गयी। मैं अपना नियंत्रण खो चुका था। मुझे पता नहीं कि यह चोदना क्या होता है। जैसा उसने बताया उसके अनुसार लंड को चूत में डालने का मतलब चोदना होता है। मेरे अंदर तनाव का आलम यह था कि उस तनाव से मुक्ति के लिए तड़प रहा था। नासमझी में ही सही, इतना तो पता चल ही गया था कि चोदने की इस क्रिया में अवश्य आनंद प्राप्त होता है, तभी तो नैना तब से चोदो चोदो की रट लगाए हुए थी। यह अलग बात है कि मेरे लंड के आकार से वह भयभीत हो उठी थी। मुझे तनाव से मुक्त होना था और मुझे महसूस हो रहा था कि अपने लंड के माध्यम से ही मुझे इस तनाव से मुक्ति मिलेगी। नैना के द्वारा चोदने के लिए उकसाये जाने के पीछे भी अवश्य यही कारण था। मैं अब और इंतजार नहीं कर सकता था।

“चुपचाप चोदने दे।” मैं गुर्राते हुए बोला।

“नहीं।” वह अब भी मेरी पकड़ में छटपटा रही थी।

“मानोगी नहीं?”

“नहीं।”

“तो जबर्दस्ती चोदूंगा।”

“नहीं, तेरा लौड़ा बहुत बड़ा है। फट जाएगी मेरी चूत।”

“फटने दे।” चोदने के इतने करीब पहुंच कर अब मैं पीछे हटने वाला नहीं था। निर्दयता पूर्वक उसे नीचे पटक दिया। मैं जोश में अंधा हो चुका था, जानवर बन चुका था।

“नहीं, बहुत दर्द होगा।”

“तो मैं क्या करूं? तुम्हीं बोल रही थी चोदो चोदो। अब मेरा लंड इतना बड़ा है तो मैं क्या करूं।”

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“डर लग रहा है।”

“तेरे डर की ऐसी की तैसी।” मैं उस पर चढ़ बैठा और वह छटपटाने से भी लाचार हो गयी थी। मैं जोश में आकर उसकी चूचियों को बेदरदी से मसलने लगा। मुझे बड़ा मजा आ रहा था। उसे चूमने लगा। उसकी चूत सहलाने लगा। इन सबका नतीजा यह हुआ कि धीरे धीरे उसका छटपटाना बंद हो गया। अब मैं और उत्साहित हो उठा। उसके पैरों को फैला कर उसकी लसलसी चूत पर अपना लंड रख दिया। उसे आभास हो गया कि अब हमला होने वाला है।

अंतिम बार मरी मरी सी आवाज में रोने गिड़गिड़ाने लगी, “मत करो ना, इतने जालिम न बनो प्लीज।”

“अरे रो काहे रही है? डर मत, कुछ नहीं होगा।” मुझे क्या पता था कि लंड जब घुसेगा तो उसका क्या होगा क्या नहीं होगा, मुझे तो बस चोदना था। मंजिल इतना करीब था, उत्सुकता और उत्तेजना के मारे मैं पागल हुआ जा रहा था। अब और बर्दाश्त नहीं हो रहा था। मैं अपने लंड पर दबाव देने लगा।

“आ्आ्आ्आ्ह्ह्ह्ह्ह नहीं।” वह रोते रोते बोली।

“रोना गाना बंद कर हरामजादी, चुपचाप पड़ी रह। घुसा रहा हूं लंड।” मैं उसके रोने से खीझ उठा था। बहुत टाईट थी उसकी चूत। चूत से निकले लसलसे रस और मेरे लंड से निकलते हुए रस के कारण फिसलते हुए मेरा लंड उसकी चूत को फैलाता हुआ घुसता चला जा रहा था। बहुत गरमी थी उसके चूत के अंदर।

“ओह्ह्ह्ह्ह्ह मांआंआंई्ई्ई्ई्ई गे्ए्ए्ए्ए, मरी मैं मरी आ्आ्आ्आ्ह्ह्ह्ह्ह।” वह दर्द से बेहाल हो रही थी लेकिन मुझे तो बस चोदने की पड़ी थी। उसकी चूत को फाड़ता हुआ घुसाता चला गया, घुसाता चला गया, पूरा जड़ तक घुसा बैठा।

“देख, हो गया न, पूरा घुस गया।” मैं बोला।

“आ्आ्आ्आ्ह्ह्ह्ह्ह नहीं ््ईंंईंईंईंईंईंईंईंई, ओह्ह्ह्ह्ह्ह फट गयी मेरी चूत ओह मांआंआंई्ई्ई्ई्ई।” वह चीख पड़ी।

“चुप साली, एकदम चुप।” मैं गुस्से से बोला। मैं कुछ देर वैसा ही पड़ा रहा। मुझे लगा मेरा लंड भट्ठी में घुसा हुआ है। मैं एक झटके में लंड बाहर खींच लिया। अंदर घुसा कर बाहर निकालने की इस क्रिया में मुझे बड़ा अच्छा लगा। जैसे ही मैं लंड बाहर निकाला, नैना नें राहत की लंबी सांस खींची, लेकिन मैं लंड बाहर निकाल कर बेचैन हो उठा, अतः दुबारा घुसाने को तत्पर हो गया। अब मैं और रहम दिखाने के मूड में नहीं था। मुझे मजा मिल चुका था। लंड घुसाने और निकालने में मेरे लंड पर चूत का जो घर्षण हुआ, उससे मुझे बड़ा मजा आया। मैं दुबारा लंड घुसा दिया।

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“आ्आ्आ्आ्ह्ह्ह्ह्ह।” नैना फिर चीखी, मगर इस बार थोड़ी धीमे से। शायद मेरे डर से या फिर उसे तकलीफ कम हुई। फिर तो अब मैं शुरू हो गया। उसकी गांड़ के नीचे हाथ रख कर शुरू में थीरे धीरे अंदर बाहर करता रहा, फिर दनादन दनादन ठोकने लगा। अब नैना चीख चिल्ला नहीं रही थी। उसकी चूत भी थोड़ी ढीली हो गयी थी। मुझे तो मानों स्वर्ग मिल गया था। खूब जम के चोदने लगा। मुझे आश्चर्य और खुशी हो रही थी कि अब नैना भी मेरी कमर पकड़ कर अपनी कमर उछाल उछाल कर मेरे धक्के का जवाब देने लगी थी।

“आह ओह्ह्ह्ह्ह्ह आह ओह्ह्ह्ह्ह्ह आह।” उसके मुंह से आनंद की आहें निकल रही थीं। उसकी आंखें बंद थीं। मैं और उत्साहित हो कर धमाधम चोदने लगा, तभी, “आ्आ्आ्आ्ह्ह्ह्ह्ह््ह््ह््हह्हह्ह्ह्ह म्म्म्म्म्आं्आं्आं्आं,” कहते हुए मुझसे जोर से चिपक गयी। उसका बदन थरथराने लगा। मुझे ऐसा लगा मानों उसकी चूत मेरे लंड को चूसने लगी हो। फिर उसका शरीर शिथिल हो गया। कुछ पलों के लिए मुझे समझ नहीं आ रहा था। लेकिन उन कुछ पलोंं की दुविधा भरे ठहराव से मेरे अंदर की आग और भड़क उठी। मैं फिर चालू हो गया, उसके शिथिल पड़ते शरीर का भुर्ता बनाने। फच फच चट चट की आवाज बढ़ गयी। मेरे दनादन ठुकाई से हलकान होने की बजाय पांच मिनट बाद ही वह फिर अपने रंग में आ गयी। “आह ओह पंक पंक पंकज्ज्ज्ज ओह राम ओह मांआंआंई्ई्ई्ई्ई ओह्ह्ह्ह्ह्ह, चोद चोद आह साले कुत्ते मादरचोद मां के लौड़े, चोद चोद आह।” ऐसे ही बड़ बड़ करती कमर उछाल उछाल कर मुझसे चिपकी जा रही थी। तभी, और तभी मेरे अंदर का ज्वालामुखी मानो फटने लगा। मेरा शरीर तनने लगा और मैं पूरी शक्ति से नैना को जकड़ कर चिपक गया।

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