जवानी में चुत की आग बहुजन बहुत मुश्किल है

मैं गोवा में रहती हूँ, एक केथलिक स्कूल में 12वीं में पढ़ती हूँ। मैं कक्षा में सबसे आगे बैठती हूँ। मेरे पीछे विशाल बैठता है। मुझे पता था कि वो मेरा आशिक है। यूँ तो मेरे में कोई खास बात नहीं थी पर हाँ, उम्र के हिसाब से मेरा शरीर जरूर जवान दिखता था। फिर यह विपरीत सेक्स का आकर्षण भी है। मेरी छाती के गोले उम्र के हिसाब से कुछ अधिक ही बड़े हैं तो मैं सेक्सी भी लगती हूँ। मेरी सफ़ेद स्कूल की शर्ट में भी मेरी चूचियाँ कुछ अधिक ही कसी हुई बाहर से ही अपना जलवा दिखाती हैं। मेरी स्कूल की नीली फ़्रॉक जो घुटने से ऊपर होती है, नीचे मेरी चिकनी सांवली टांगें लड़कों को जरूर आकर्षित करती हैं। मेरी टीचर सेण्डी मिस मुझसे बहुत प्यार करती हैं। मिस की नजर विशाल पर भी है।
विशाल अक्सर मुझे पीछे से एक चिट लिख कर पास कर देता है, मेरी सहेलियाँ यह सब जानती हैं। वो चुपके से मुझे वो चिट पास कर देती हैं। उसमें स्कूल के बाद कॉफ़ी पीने या ठण्डा पीने की दावत होती है। यह चिट कई बार मिस पकड़ भी लेती हैं और विशाल को कमेंट भी कर देती हैं कि मिस को भी पिला दो कभी कॉफ़ी। तब पूरी कक्षा खूब हंसती।
सेण्डी मिस मेरी ही बिरादरी की एक गोअन जवान इसाई केथलिक लड़की है। कोई 21-22 उम्र की होगी। गोवन स्टाईल का ही सांवला रंग चेहरे का, चिकना चमकदार चेहरा, बड़ी बड़ी लुभावनी आँखें … उसकी चूचियाँ बड़ी और अधिक उभार लिये हुये भारी भारी सी हैं जो कि उसकी कमीज में से ऊपर को आधे बाहर निकली हुई सांवली रंग की चमचमाती हुई सभी को नजर आती हैं। पतली कमर … उस पर एक काला बेल्ट कसा हुआ। नीचे उसकी लगभग काली काली सी चिकनी टांगें, जांघें अपेक्षाकृत कुछ साफ़ रंग की। उसकी तंग सी स्कर्ट उसे स्मार्ट का लुक देती है। उसके चूतड़ बड़े बड़े और उसकी टाईट स्कर्ट में उनके शेप और साइज हूबहू नजर आते हैं जो छात्रों के अपरिपक्व मन पर बिजलियाँ सी गिराते हैं। उसकी हंसी बड़ी मोहक है। मेज के नीचे उसकी टांगें लगभग खुली खुली सी रहती, पर शायद उससे वो अनजान बनी रहती है। उसकी भीतर तक की सफ़ेद कसी हुई पेंटी तक नजर आ जाती है। लड़के चुप से उसका आनन्द लेते रहते और मेरी नजरें भी देख देख कर शर्मा सी जाती हैं।
“विशाल, छुट्टी होने के बाद प्लीज थोड़ा रुक जाना।” सेण्डी मिस ने विशाल को कहा।
“जी मिस !”
“और दिव्या, तुम दो बजे ठीक समय पर आ जाना।”
मैंने सर हिलाया और अपना बैग उठा कर चल दी।
“दिव्या, सॉरी… कॉफ़ी कल पियेंगे…!”
अरे मैं पिला दूंगी उसे विशाल… मेरी मदद करो, तुम खाना वाना खाकर दो बजे कॉपी का यh बण्डल प्लीज मेरे घर पर पहुँचा देना।”
“जी मिस … यह दिव्या आपके यहां ट्यूशन पर आती है ना !”
“हां ! तो…?”
“मिस, क्या आप मुझे भी गाईड कर देंगी?”
“ठीक है, तीन सौ रुपये लेती हूँ, घर पर बोल देना।”
उत्सुकतावश मैं दरवाजे की साईड पर आकर छिप गई थी। मैंने एक बार दरवाजे से फिर से कक्षा में झांका। बातें सुन कर मुझे तो लगा कि जैसे विशाल मेरे पीछे ही पड़ गया था। मेरे मन में एक गुदगुदी सी हुई। कहता क्यों नहीं है कि दिव्या मैं तुम्हें प्यार करता हूँ। उंह ! एक ना एक दिन तो कह ही देगा … नहीं तो मैं ही उसे कह दूँगी। फिर मुस्करा कर मैने अपने कदम आगे बढ़ा दिये।
दो बजे मैं तो ठीक समय पर मिस के घर आ गई थी। कुछ ही देर में विशाल भी कॉपियों के दो तीन बण्डल लिये हुये चला आया था। मुझे देख कर वो मुस्कराया। मैंने भी मुस्करा कर ऑपचारिकता पूरी की। मिस ने उससे कॉपियां लेकर अन्दर रख दी। इस समय मिस ने जीन्स की टाईट हाफ़ पैंट ऊंची सी पहन रखी थी। उनकी काली चमकीली और चिकनी टांगें बहुत सुन्दर लग रही थी। उनके चूतड़ तो वाकई उस कसे हुये हाफ़ पैंट में उभरे हुये और गहरे से लग रहे थे। शायद किसी मर्द के लिये वो जान लेवा हो सकते थे। अरे हां विशाल भी तो वहीं था। उसकी नजरें तो जैसे मिस के चूतड़ों पर जम सी गई थी।

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मिस ने गणित की किताब रखी और पंखा ऑन कर दिया। फिर मेज पर आकर बैठ गई। उन्होंने अपने ढीले ढाले बिना आस्तीन के टॉप को पंखे के नीचे ऊपर नीचे हवा के लिये हिलाया और एक लम्बी सांस लेकर बोली- चलो खोलो ये वाला चेप्टर … अब ये उदाहरण देखो और फिर ये प्रोब्लम हल करके बताओ।
विशाल ने उनके टॉप के हिलते ही मिस के सुन्दर गेंद… नहीं शायद फ़ुटबॉल … ज्यादा बड़े हो गये !!!… हां … बड़े वाले गोल आम … ओह छोड़ो ना … जैसे बड़े मम्मों को एक गहरी नजर से देखा।
मुझे तो मिस के ऐसे करने से बहुत शरम आई। पर वो एकदम बेखबर सी थी। तभी मिस ने विशाल के हाथ से एक पर्ची झपट ली।
“ये क्या है?’
“जी… कुछ नहीं…”
“दिव्या … लव लेटर फ़ोर यू?”
मैं तो सकपका गई। मैंने अपने पैर की एक जोर से ठोकर विशाल को मारी।
“हाई … ओ गॉड … दिव्या, सॉरी बोलो… ये तो हमारा पांव है …”
“सॉरी मिस, ये विशाल भी ना … !’ मैं झेंप सी गई।
“विशाल खड़े हो जाओ … जैसे हमें मारा, दिव्या तुम भी विशाल के चूतड़ पर एक जोर का चपत मारो। इसकी सजा यही है!”
मैंने धीरे से अपने हाथ से विशाल के चूतड़ पर एक चपत मार दी।
“ऐसे मारते हैं चपत ? ये देखो ऐसे मारो…”
मिस ने मेरी चूतड़ को पहले तो सहलाया फिर एक चट से आवाज आई। मैं तो उछल सी गई।
अब इधर को देखो … मिस ने विशाल के चूतड़ की गोलाई को सहलाया और उस पर एक जोर से चपत लगाया। पर विशाल के चेहरे पर तो एक मुस्कान सी फ़ैल गई।
“अब तुम इसकी मारो…”
मैंने भी विशाल के गोल गोल चूतड़ को जान कर बड़ी कोमलता से सहलाया और जोर से चट से मार दिया।
“अब ठीक है … इस चिट में लिखा है … दिव्या, ट्यूशन के बाद कॉफ़ी पीने चलेंगे।”
मेरी तो शरम से गरदन झुक गई।
“कब से चल रहा है ये सब …? अच्छा चलो अब ये प्रोब्लम सोल्व करो … कॉफ़ी यहीं पी लो। हम पिलाता है।”
मिस अन्दर जाकर कॉफ़ी बनाने लगी।

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