आई लव यू पापा

में मैंने बताया था कि गंगरेल डैम पर नदी के किनारे बोट ड्राइवर ने अपने दो और साथियों के साथ मिल कर दिव्या और मेरी चूत को चोद दिया.

उन तीनों के साथ ही भाई ने मेरी गांड भी चोद दी. इस दौरान मैं कई बार झड़ गई थी. फिर दिव्या और मैंने नदी के पानी में ही अपनी चूत को साफ किया और फिर हम तीनों ने उन लड़कों को फिर से मिलने का वादा किया और उसके बाद हम लोग अपने घर की ओर आ गये.

रात के 9 बजे तक हम लोग घर आ गये थे. उस दिन मेरी हालत बहुत खराब हो गई थी. मैं इससे ज्यादा चुदाई करवाने की हालत में नहीं थी क्योंकि मेरी चूत और गांड दोनों ही सूज गई थी.

कई दिनों तक मैंने अपनी चूत और गांड की सिकाई की तब जाकर मुझे आराम मिलने लगा. अब मेरी चूत और गांड दोनों ही पहले वाली पोजीशन में आ रही थी.

मैंने आप लोगों को अपने परिवार के बारे में बताया था कि मेरा परिवार ज्यादा बड़ा नहीं है. मेरे परिवार में मेरे अलावा भाई, मां और पापा ही हैं.
मां ज्यादातर मेरी नानी के यहां चली जाती है. घर में मैं, भाई और पापा ही रहते हैं.

उस दिन मैंने भाई को बोल दिया था कि अब और ज्यादा चुदाई नहीं करेंगे तो भाई ने भी मेरी बात मान ली और वो अब केवल पढ़ाई में ध्यान दे रहे थे.

तीज का त्यौहार था और उस दिन मेरी मां नानी के घर पर गई हुई थी. मेरी मां तीज मनाने के लिए वहीं पर जाती थी. घर में भाई और मैं ही थे. हमने रात का खाना भी खा लिया था मगर अभी तक पापा नहीं आये थे.

पापा के आने के बाद मैं उनके लिए गर्म खाना बनाती थी. हम दोनों ने खाना खा लिया और अब मैं रसोई में पापा के लिए खाना बना रही थी. उस दिन मौसम भी काफी खराब था. रात में बिजली कड़कने लगी थी और थोड़ी ही देर के बाद बारिश भी शुरू हो गई थी.

मैंने जल्दी से खाना बना दिया और फिर मैं वहीं अपने रूम में जाकर अपनी चूत और गांड की सिकाई करने लगी. अभी थोड़ी सूजन बाकी थी.
मैं सिकाई कर ही रही थी कि अचानक से मेन डोर की बेल बजी और मैं जल्दी से अपनी लोअर को ऊपर करके दरवाजा खोलने के लिए चली.

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जाते हुए मैंने देखा कि भाई गहरी नींद में सो चुके थे. मैंने जैसे ही दरवाजा खोला तो पापा सामने खड़े थे. मगर वो बिल्कुल होश में नहीं लग रहे थे. उन्होंने उस दिन कुछ ज्यादा ही दारू पी रखी थी.

दरवाजा खोलते ही वो मेरे ऊपर आकर गिरने लगे तो मैंने उनको संभाला और फिर उनको अंधर करके दरवाजा बंद कर दिया. बाहर जोर से बारिश हो रही थी और मुझे थोड़ा डर भी लग रहा था.

मैंने देखा कि पापा पूरे के पूरे ऊपर से नीचे तक गीले हो चुके थे. मैं उनको उठा कर चेयर पर बिठाने लगी मगर वो मेरे ऊपर ही गिर गये. उनके हाथ मेरी चूचियों पर आ गये.

पापा ने मेरी चूचियों को पकड़ लिया और गिरते-संभलते हुए मैं उनको कमरे की तरफ लेकर जाने लगी. वो मेरे बदन के साथ सटे हुए थे. मैं उनको उनके कमरे की तरफ लेकर जा रही थी. मुझे यह भी ध्यान नहीं था कि उनके हाथ मेरी चूचियों पर थे.

कमरे में ले जाकर मैंने उनको बेड पर लिटा दिया. उनके कपड़े पूरे गीले थे तो मैंने सोचा कि ऐसे तो पापा की तबियत खराब हो जायेगी. मैंने पापा की शर्ट के बटन खोलना शुरू कर दिये.

पापा ने मेरा हाथ पकड़ कर अपनी तरफ खींच लिया. वो बहुत नशे में थे. उनको कुछ पता नहीं था कि वो क्या कर रहे हैं. मैंने उनका हाथ छुड़ाया और फिर से उनकी शर्ट को उतारने लगी.

सामने से मेरा टीशर्ट भी गीला हो गया था क्योंकि पापा के कपड़ों का पानी मेरी टीशर्ट पर भी आ गया था. मैंने पापा की शर्ट को खोला ही था कि उन्होंने मुझे अपनी ओर खींच लिया और मेरे होंठों के पास अपने होंठों को ले आये. उनके मुंह से दारू की स्मैल आ रही थी. पापा की आंखें एकदम नशे में लाल थीं.

वो मेरी तरफ घूर कर देख रहे थे. फिर एकदम से उन्होंने मेरे होंठों पर अपने होंठों को रख दिया. मैंने खुद को वापस खींचने की कोशिश की मगर पापा मेरे होंठों को अपने होंठों में लेकर चूसने लगे. उनको कुछ होश नहीं था कि वो क्या कर रहे हैं.

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मेरे बदन में अब करंट सा दौड़ने लगा था. कोई मर्द मुझे ऐसे किस करता था तो मुझे भी अजीब सा मजा आने लगता था. पापा ने मुझे अपनी बांहों में जकड़ लिया और मेरे होंठों को पीने लगे.

अब मुझे भी अच्छा लगने लगा और फिर पापा ने एकदम से मेरे टीशर्ट के अंदर मेरी चूचियों के अंदर हाथ डालकर उनको दबाना शुरू कर दिया. वो मेरे बूब्स को तेजी के साथ मसलने लगे.

मैं अभी भी उनसे अलग होने की कोशिश कर रही थी क्योंकि वो नशे में थे और मुझे पता था कि अगर मैंने उनको नहीं रोका तो फिर बात बहुत आगे तक बढ़ जायेगी. मैं उनसे छूटने की कोशिश करने लगी मगर पापा ने मेरी चूचियों को पकड़ कर जोर से उनको भींचना शुरू कर दिया.

मुझे मजा आने लगा. मगर मैं इस हालत में नहीं थी कि मैं चुदाई करवा सकूं क्योंकि अभी तक मेरी चूत और गांड की सूजन पूरी तरह से नहीं गई थी.

पापा जोर से मेरी चूचियों को मसल रहे थे और मैं सिसकारियां लेते हुए उनको रोकने की कोशिश कर रही थी. मैंने उनको समझाने की कोशिश की कि ये सब ठीक नहीं है मगर पापा मेरी बात पर ध्यान ही नहीं दे रहे थे.

उन्होंने दोनों हाथों से मेरी चूचियों को पकड़ लिया और जोर से ऐसे दबाने लगे जैसे उनका दूध निकाल देंगे दबा-दबा कर. मुझे मजा आ रहा था. मगर साथ ही डर भी लग रहा था क्योंकि चुदाई की हालत में नहीं थी मैं.

मुझे डर था कि कहीं पापा मेरी चूत को चोदने लगे और मेरी चूत फट ही न जाये. पापा ने अब मुझे अपने सीने से चिपका लिया. उन्होंने मेरे टीशर्ट को निकलवा दिया और मेरी चूचियां नंगी हो गईं. मैंने नीचे से ब्रा भी नहीं पहनी हुई थी.

मैं पापा के गीले बदन पर लेट गई थी. पापा ने मुझे अपनी बांहों में जकड़ लिया और मेरे होंठों पर किस करने लगे. मैं भी अब उनका साथ देने लगी. अब पापा ने एक हाथ को नीचे ले जाकर अपनी पैंट के बटन को खोलना शुरू कर दिया.

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