पुलिस साहब से हवालात में चुद गयी

“……”

“आरे पी ले. नशे में बड़ा मज़ा आता है चुदवाने में.”

मैन जोर से रो पडी. मेरे आंशु थमने के नाम ही नही ले रहे थे. मैंने गिद्गीदते हुये कहा, “मैंने क्या बिगाड़ा है तुम्हारा. क्यो मेरी इज़्ज़त के पीछे पडे हो?”

“तूने नही बिगडा. तेरे नशीली हुस्न ने बिगाड़ा है मेरा,” कहते हुये अपनी पैंट की चेन पर हाथ रखते हुये बोला, “देख कैसे फाड़- फाडा रहा है लंडवा मेरा. इसका बिगडा है तेरी जवानी को देख कर. अब इसको ठण्डा कर….”

उसका लंड पैंट के ऊपर से ही ताना हुवा दीख रहा था. मानो पैंट को फाड़ कर बहार आ जाएगा. अपनी जवानी को अब लूटने के करीब देख कर मेरा धीरज जवाब देर रहा था. मैन अपने को बचने के लीये जोर से चिल्लाई, “कोई है…. बचाओ मुझे…”

थानेदार दारु की बोत्त्ले पकड़े हुये मेरे पास आया और फीर जोरदार का थप्पड़ मारा. इस बार उसने दारु की बोत्त्ले उठा कर जोर से बोला, “चुप होती की साली या मारू इस बोत्ल को तेरे सीर पर.”

मैन एक दम से चुप्प्प्प्प्प्प.

फीर उसने मेरे सीर को पकड़ कर बोत्त्ले मेरे मुहं में लगा दी. मैन अपना मुहं हीला-हीला कर बोत्त्ले से अपने मुहं को हटाने की कोशीश करने लगी लेकीन उसने जबरदस्ती करके डेड-दो पैग मेरे अंदर उधेल ही दीया. छाती जलने लगी. उबकाई आने लगी. सीर चकराने लगा. पेट गरम हो उठा. पहली बार दारु पेट में गयी थी. चिल्ला रही थी लेकीन थानेदार हंस रहा था.

बोत्ल का जो कुछ भी बचा-खुचा था वोह थानेदार ने पी लीया और बोत्ल को अपनी डेस्क के नीचे लुढ़का दीया. फीर सीधे मेरे ऊपर चढ़ कर मेरे मुम्मे को मसलने लगा. दोनो हाथो में मेरे दोनो मुम्मे. आटे की तरह गुन्थ्ने लगा. फोकट का माल जो मील रहा था. दारु अंदर जाने के बाद ऐसे हमले के लीये मैन तयार नही थी. और अपने आप को बचा नही पा रही थी. उसने एक मुम्मे को अपने हाथ में पकड़ दुसरे मुम्मे को अपने होंठों के बीच ले चूसना शुरू कर दीया. मेरे संतरे उसके लीये चूसने वाले संतरे बन गए.

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