गोरी मेडम शीला की गोरी चुत

हेलो दोस्तो, मैं आपका दोस्त सुनील आप लोगो के लिए फिर से एक गरमा-गरम सेक्स कहानी लेकर हाजिर हूँ. मुझे उम्मीद है की ये कहानी मेरे डेसिखहनि के पाठकों को ज़रूर पसंद आएगी.

मेरे नये पाठको के लिए मैं अपने बारे मे बताना चाहता हूँ.

मेरा नाम सुनील है. अभी मेरी उमर 28 साल है. मैं देल्ही मे जॉब करता हूँ. मैं दिखने मे गोरा, 5’8″ कद और औसत कद काठी, बिल्कुल गतिला बदन का एक नवजवान लड़का हू, मेरा लॅंड 7 इंच लंबा और 3 इंच मोटा है. अपनी जिंदगी मे घटित कम से प्रेरित घटनाओ को अपने पाठकों तक पहुँचना मुझे पसंद है.

करीब 3 साल पहले ये 2018 की बात है. मैं, वर्ल्ड बुक फेर मे घूम रहा था. मैं किसी भी बात से अंजान सभी बुक स्टॉल मे जाकर बुक्स चेक कर रहा था तो कुछ अपने लिए खरीद भी लेता था. मुझे कोई जल्दी नही थी.

एक अधेड़ उमर की औरत अपने बेटे के साथ कुछ अकाउंटिंग बुक्स शायद ले रही थी. मैं भी उसी स्टॉल पे पहुच गया और उनके बेटे का पास अंजाने मे जाकर अपने लिए भी कुछ बुक्स देखने लगा. उसने मुझसे पूछा तो मैं उसकी बुक्स लेने मे हेल्प करने लगा. उसकी मा बहुत ध्यान से मुझे नोटीस कर रही थी. मुझे ऐसा लगा.

मा ने पूछा- आप क्या चार्टर्ड अकाउंटेंट हो? जो अकाउंटिंग बुक्स के बारे मे इतना पता है.

मैं – ह्म माँ, मैने अपनी तैयारी इन्ही बुक्स से किया था.

माँ- अच्छा. ठीक है. ये मेरा बेटा अनिल है. हम भी कोशिश कर रहे है की ये भी का क्लियर कर ले तो बहुत अक्चा होता. इसका पढ़ने मे जुनून तो बहुत है.

मैं- माँ, ज़रूर कर लेगा. थोड़ी सी मेहनत और लगान की ज़रूरत है. ये तो फिर भी बहुत अक्चा है.

मैने देखा, मेडम सिर्फ़ मेरे फेस को ही देखे जा रही थी. शायद उनका ध्यान बातों पे नही था.

मुझे, वो बहुत पसंद आ रही थी. उनके बेटे से थोड़ी ही देर मे आक्ची दोस्ती हो गयी. बातों का सिलसिला बस चलता ही रहा. उन्होने अपना नाम शीला बताया. मैने लेकिन उनको माँ ही बोल रहा था. बातों का सिलसिला तोड़ा और आयेज बड़ा तो पता चला की वो हमारे ही एरिया मे एक अपार्टमेंट मे रहती है. उनके पति की गूव्ट जॉब थी, उनका घर पे आना-जाना रहता था लेकिन घर से ज़्यादातर काम के सिलसिले मे बाहर रहना पड़ता था.

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अनिल- भैया, मेरा कुछ डाउट है. उसमे प्लीज़ आप मेरी थोड़ी हेल्प कर दोगे क्या?

मैं- अनिल, मैं जॉब करता हू. मेरे पास टाइम कम होता है. मुझे घर पे भी काम करना होता है. तोड़ा मुश्किल होगा लेकिन मैं एक काम कर सकता हूँ. फोन पे तुम्हारी हेल्प कर दूँगा.

इसी बीच माँ बोल पड़ी.

“सुनील, तुम शाम को आ सकते हो. तुम भी मेरे बेटे जैसे हो. मेरे घर से डिन्नर करके जाना बुत मेरे बेटे की प्लीज़ हेल्प कर दो.”

मैं- ठीक है, माँ. टाइम निकल के मैं कोशिश करूँगा की घर आ जौन. नही तो फोन पे तो मैं हमेशा रहूँगा.

हुँने साथ मे बुक फेर देखा और शाम को घर निकल गये. मैने, माँ के साथ अपना मोबाइल नो शेर कर लिया.

अपने घर वापस आ गया और शीला माँ के बारे मे सोचने लगा.

दिखने मे शीला की उमर 40 साल लग रही थी. बलखाती कमर और थोड़े से निकले हुए खुल्‍हे मेरी जान निकाल रहे थे. उनका फिगर देखने मे 36-32-34 का लग रहा था. लेकिन ब्रा पहने होने की वजह से चूक ज़रूर हो रही थी. बिल्कुल दूध जैसी गोरी और चेहरे पे एक चमक बेहद डीसेंट लुक उनको और मादक बना रहा था. क्या उनके मान मे कुछ था, जो मुझे भी नही पता था? इस बात से मैं अंजान था.

मैं अक्सर वीकेंड मे उनके घर जात और उनके बेटे की हेल्प कर देता. एग्ज़ॅम का टाइम अब नज़दीक आ गया था. मुझे उनके बेटे को तोड़ा ज़्यादा टाइम देना पड़ता. मुझे डिन्नर की कोई टेन्षन नही होती क्योकि माँ मुझे अकचे से अपने बेटे की तरह खिलती.

मेरी मेहनत से वो बहुत खुश थी. अक्सर मेरी तारीफ़ करती और नज़र ही नज़र मे मेरे मान की बात समझ जाती.

माँ- सुनील, अनिल के तूतिओं के लिए मुझे तुम्हे कितना फी देना होगा? तुम मेरे बेटे की बहुत हेल्प कर रहे हो.

मैं- माँ, मुझे कुछ नही चाहिए. ये मेरे भाई जैसा है. बस पास हो जाए. मुझे इससे ज़्यादा कुछ नही चाहिए.

माँ- ह्म, ठीक है. मैं तुम्हे पार्टी दे दूँगी, तुम जहाँ कहोगे.

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मैं उनकी बातें ना सुन के उनको देखता ही रह जाता. वो सब साँझ जाती.

मैं- ठीक है, माँ.

उनके बेटा अनिल भी उनसे मेरी बहुत तारीफ़ करता था. हम तीनो साथ मे खुश थे.

मैं, जब वापस घर आता तोषील माँ तो जैसे मेरे दिमाग़ पे च्छा गयी थी. उनका ख़याल मैं कितना भी दिमाग़ से निकलना चौहू, नही निकल रहा था. शायद, ऐसा इसलिए था क्योकि उनके दिमाग़ मे भी कुछ ऐसा ही चल रहा था.

जिस दिन अनिल के पेपर समाप्त हुए. शीला माँ ने मुझे घर पे बुलाया और अपने पति से मिलवाया. उनका नाम मिस्टर. साहिल था. काफ़ी लंबे-चौड़े एकदम गोरे बेअरेड लुक एक करिस्मयी पर्सनॅलिटी थे. मुझसे मिस्टर. साहिल ने बात की. मैने, अनिल के बारे मे बताया. वो भी खुश दिखाई दे रहे थे. मिस्टर साहिल की हिगत 7’ से उपर ही थी. हम सब बाहर गये और खूब एंजाय किया. मेरी नज़र शीला माँ पे ही थी तो उनकी मेरे पर. नज़रो के तीर दोनो तरफ़ से चल रहे थे. बात नही हो पा रही थी.

मैने उनके पति के बारे मे पूछा तो माँ ने बताया की मेरे पति अक्सर जॉब पे घर से उप डाउन कर लेते है. कभी-कभी उन्हे काम के सिलसिले मे कही बाहर जाना पद जाए तो नही कह सकते लेकिन वो हम सबको अक्चा टाइम देते है और खुश रखते है. सास-ससुर की ज़िम्मेदारी भी मेरे उपर है.

सुनील, कुछ दीनो के लिए अनिल एग्ज़ॅम समाप्त होने पे अपने मामा के घर रहेगा और मेरे सास-ससुर की मुझे सेवा करना है. बस यही मेरी जिंदगी है.

मैं- माँ, आप एक पत्नी, मा और बहू सब रिस्टो मे बेस्ट हो. जो अपने खुशियों से ज़्यादा अपने परिवार के बारे मे सोचती है.

मेरा, शीला के साथ बात-चीत होनी शुरू हो गयी . मेरी कांवासना सातवे आसमान पे थी. बस, मुझे तो शीला की छूट कैसे भी करके छोड़नी थी. लेकिन माँ की सहमति भी ज़रूरी थी. शायद, उपरवाले को भी यही मंज़ूर था. मेरी किस्मत मुझे शीला के छूट तक पहुचने वाली थी.

हम सब वापस आए और माँ को बाइ बाइ करके मैं अपने घर आ गया और शीला के सनडर बदन को भोगने के सपने देखने लगा.

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