गर्लफ्रेंड की कच्ची चुत फाड़ा

मेरी उम्र 19 साल है.. ये मेरी पहली कहानी है. मुझे आशा है कि ये सेक्स स्टोरी आप सबको पसंद आएगी.

ये घटना आज से एक साल पहले का है. मेरी गर्लफ्रेंड का नाम दीपिका है, ये नाम बदल दिया है. मैं पहले आपको उसके बारे में बता देता हूँ, उसका फिगर 34-28-34 का है, वो देखने बहुत ब्यूटीफुल है.
हम दोनों एक कॉमन फ्रेंड के जरिये उसकी बर्थडे पार्टी में मिले थे. वहाँ पर हमारी बात हुई और धीरे धीरे हमारी दोस्ती परवान चढ़ी. हम दोनों ने नंबर एक्सचेंज किए और फिर हमारी फोन पर बात होने लगी. हम जल्दी ही अच्छे और क्लोज़ फ्रेंड बन गए.

एक दिन मैंने उसको प्रपोज़ किया और उसने हाँ बोल दिया.
फिर हमारी फोन पर घंटों बात होने लगी थी. एक बार हम दोनों मूवी देखने गए. मूवी देखते टाइम मैं उसके हाथों को सहलाने लगा और उसके कंधे पर हाथ रखे, उसको हौले से प्रेस किया, उसने मुझे देखा और एक प्यारी सी स्माइल दे दी.
झंडी हरी देखी तो फिर मैं उसकी जींस पे हाथ ले गया हो और हाथ फेरने लगा. वो बोलने लगी- प्लीज़ अनिल मत करो, मुझे कुछ हो रहा है.मैंने उसका मुँह अपनी तरफ करके उसके होंठों पर अपने होंठों को रख दिया और उसको किस करने लगा. वो भी मेरा साथ देना लगी. चूमाचाटी के दौरान ही मेरा हाथ खुद ब खुद उसके मम्मों पे चला गया और मैं उसके मम्मों को उसकी टी-शर्ट के ऊपर से दबाने लगा.
वो एकदम से गरम होने लगी थी. अब वो भी मुझे जोर से किस करने लगी और मेरे बालों को नोंचने लगी.

मैंने अपना हाथ उसकी टी-शर्ट और ब्रा के अन्दर डाल कर उसके मम्मों को सहलाया और दबाने लगा. उसके मुँह से कामुक आवाजें निकलने लगीं- आआहह.. अनिल धीरे से दबाओ ना.. दर्द हो रहा है..
फिर मैंने उसका हाथ लेकर अपनी जींस के ऊपर रखा दिया और बोला- मेरे लंड को सहलाओ.
मैं भी उसकी जींस के ऊपर से उसकी चुत को सहलाने लगा. वो भी मेरे लंड को दबाते हुए मसलने लगी. मैंने आगे बढ़ते हुए उसकी जींस की चैन खोल कर पेंटी के ऊपर से उसकी चुत सहलाने लगा. उसकी पेंटी चुत के पानी से गीली हो गई थी.

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फिर मैंने उसकी पेंटी के अन्दर हाथ डाल कर उसकी चुत को सहलाया, तो उसकी चुत पर छोटे छोटे बाल उगे हुए थे. मुझे उसकी चुत को सहलाने में बड़ा मज़ा आ रहा था. मैंने अपनी पेंट की चैन खोल कर अपना लंड उसके हाथ में दे दिया और वो मेरे लंड को मसलने लगी.

अब वो धीरे धीरे ‘आअहह ओह.. आआहह..’ की आवाज़ निकाल रही थी. मूवी खत्म होने वाली थी इसलिए हम दोनों को ये खेल बीच में ही छोड़ना पड़ा और अपने कपड़े ठीक करके हम बाहर निकल आए.

अब हमारी फोन पे सेक्स चैट होने लगी और मैंने उसको सेक्स चैट में उसको अलग अलग पोज़िशन में चोदना चालू कर दिया. इसके साथ ही हम दोनों मुठ मार के खुद को शांत कर लेते. हम दोनों सेक्स करना चाहते थे, पर हमको कोई सेफ जगह नहीं मिल रही थी.

फिर एक दिन मेरे मम्मी पापा गाँव किसी काम से जाने वाले थे, मेरे मन में लड्डू फूटने लगे. मैंने ये बात अपनी डार्लिंग दीपिका को बताई तो वो भी खुश हो गई. फाइनली हमारी एक दूसरे के साथ सेक्स करने की कामना पूरी होने वाली थी.

अगले दिन मम्मी पापा पांच दिन के लिए गाँव जाने वाले थे. वो रात मानो खत्म होने का नाम ही नहीं ले रही थी. अगले दिन वो दिन आ गया, मैं मम्मी पापा को स्टेशन छोड़ कर आ गया, साथ ही आते वक़्त अपनी जीएफ को अपने साथ अपने घर लेता आया. उसको घर लाने से पहले ही रास्ते में मैंने कॉंडम का एक पैकेट ले लिया था.

घर के अन्दर घुसते ही हम एक दूसरे को किस करने लगे. हम दोनों की जीभें आपस में फाइट करने लगीं, हमारी स्मूच 15 मिनट तक चली. इस बीच मैं उसके मम्मों को दबाने लगा. फिर मैं उसको गोद में उठाकर मम्मी पापा के बेडरूम में ले गया और बेड पे लेटा दिया.

अब हम फिर से एक दूसरे को किस करने लगे. मैं उसके ऊपर चढ़ गया था. मैंने उसकी टी-शर्ट निकाल दी. उसके मम्मों को ब्रा के ऊपर से चूसने लगा और दबाने लगा. उसकी ब्रा पूरी गीली हो गई थी.
वो बोल रही थी- अनिल मुझे कुछ हो रहा है.. प्लीज़ कुछ करो ना.
मैं बोला- हाँ जानू वही तो कर रहा हूँ.

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फिर मैंने एक हाथ पीछे ले जाकर उसकी ब्रा खोल दी. ब्रा खुलते ही उसके मम्मे उछलने लगे. उसके सख्त चूचे देखते ही मेरे होश उड़ गए. आह.. क्या चूचे थे यार.. बिल्कुल पर्फेक्ट.. ना ज़्यादा बड़े ना ज़्यादे छोटे.. ऊपर से पिंक कलर के निप्पल.. मैं तो उन पर झपट कर टूट पड़ा. कभी एक चूचे को दबाता, तो एक चूचे को चूसता और बीच बीच में उसके मम्मों को काट भी लेता.
उसके मुँह से ‘ऊउउ.. जान धीरे से काटो ना.. आअहह हमम्म्म.. ह्म्म्म्म .. बहुत मज़ा आ रहा है.. आह.. और करो.. पी जाओ इनका दूध चूस कर खाली कर दो इनको..’
मैं भी जोश में आकर बोल रहा था- आह.. साली, आज तो इनको निचोड़ दूँगा एक भी बूंद नहीं छोड़ूँगा इनमें..

फिर मैंने उसकी जींस खींच कर उतार दी. वो अब सिर्फ़ पेंटी में मेरे सामने बेड पर लेटी हुई थी. मैंने भी अपने कपड़े उतार दिए, सिर्फ़ अपनी अंडरवियर में आ गया.
तभी मेरे दिमाग़ में एक मस्ती सूझी. मैं जल्दी से फ्रीज़ में से बर्फ लेकर आया और उसके मम्मों पे धीरे लगाने लगा. उसकी मादक सिसकारियाँ निकलने लगीं. फिर मैं बर्फ उसकी कमर पे लगाने लगा.

उसकी कमर.. ओ माय गॉड.. क्या मस्त थी.. आज भी वो दिन याद करता हूँ तो लंड खड़ा हो जाता है.
उसके मुँह से ‘आअहह आअह.. जान प्लीज़ ऐसे मत करो.. मैं मर जाऊंगी..’ निकल रहा था.
मैं उसकी नाभि पे बर्फ लगा कर उसे क़िस करने लगा था और उसे अपनी जीभ से लिक कर रहा था. वो अपने हाथ मेरे बालों में घुमा रही थी.

फिर मैं धीरे से उसकी पेंटी में हाथ डाल कर उसकी चुत को सहलाने लगा. उसकी चुत बहुत गीली हो चुकी थी. मैंने उसकी चुत में एक उंगली डाली, उसकी मुँह से आवाज़ निकली ‘आहह अनिल दर्द हो रहा है..’
मैंने उसकी पेंटी उतार कर फेंक दी.. और उसकी चुत को खड़े होकर देखने लगा. वो मेरे सामने बिल्कुल नंगी पड़ी थी. मैं रियल में पहली बार किसी लड़की को नंगी गी देख रहा था.

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