घरवाली और पड़ोस वाली डबल मज़ा भाग 3

कविता ने जोर से डांट लगाई, “अरे ये आग हटाओ यार, हम लोग जल गए तो.. पागल हो क्या तुम लोग”

दोनों ने तुरंत अपनी बीवियों की आज्ञा का पालन करते हुए सिगार चूत से निकाल कर जला लिया. सिगार चूत के रस से लबालब था तो दोनों को सिगार पीने में ख़ास ही मज़ा आ रहा था. कमरे में चूत के रस के साथ शराब और सिगार के धुंएँ की गंध भर गयी.

कविता और रेनू एक दुसरे की चूत चूसते हुए लगता है झड़ने ही वाले थे. विवेक बाथरूम के लिए गया. जब वो वापस लौटा, उसने देखा की गौरव चेयर पर बैठा है और कविता उसकी बाहों में बाहें डाले उसके ऊपर बैठी हुई है. गौरव का लंड उसकी चूत में घुसा हुआ है. कविता धीरे धीरे ऊपर नीचे हो रही मानों घोड़े की सवारी कर रही हो. विवेक मुस्काराया और कविता के पीछे जा कर खड़ा हो गया. कविता के चूतर गौरव के मोटे लंड के ऊपर उछालते देख कर उसका लंड फटाक से खड़ा हो गया. रेनू को समझ आ गया की विवेक की मन्सा क्या है. उसने ड्रावर खोली और उसी KY जेली की ट्यूब निकाली और आँख मारते हुए विवेक को थमा दी. विवेक ने ट्यूब से क्रीम अपने लौंडे पर लगाई और ढेर सारी क्रीम उंगली में लगा कर कविता की गांड के छेद पर लगाने लगा. जैसे ही ठंडी क्रीम कविता की गांड में लगी, कविता चौंक कर उचक गयी. पीछे मुड़ कर देखा तो समझ गयी की विवेक के गंदे दिमाग में की योजना है. वो गौरव के लौंडे को चोदते हुए हाँफते हुए बोली,

“हाँ विवेक…. जल्दी करो… मैंने इस पोज के के बारे में कितना सोचा हुआ है… आज वो सपना हकीकत में बदलने जा रहा है….कम ऑन विवेक…गो फॉर इट…”

रेनू आगे आई और विवेक का क्रीम से सना हुआ लौंडा कविता की गांड के छेद के मुहाने पर टिकाया, ऊपर विवेक को देख कर आँख मारी, जैसे कि वो 100 मीटर रेस में रेस स्टार्ट के लिए फायर कर रही हो. विवेक ने एक धक्का दिया और उसका लौंडा कविता की गांड में जा घुसा. वैसे तो कविता ने विवेक का लौंडा अपनी गांड में कई बार लिया हुआ था. पर ये पहली बार था जब लंड गांड में तब घुसा, जब बुर में एक मोटा सा लंड पहले से घुस कर कमाल कर रहा था. ये अनुभव बड़ा ही अनोखा था और बड़ा की मजेदार भी. जैसे जैसे दो मोटे लंड उसके दोनों छेदों में अन्दर बाहर जाते थे, वह वासना के उन्माद में पागल सी हो जा रही थी. आनंद के चरम शीर्ष पर थी वो और कुछ भी बडबडा रही थी.

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“चोदो मुझे तुम दोनों….ओह मई गॉड…मेरी गांड मारो विवेक….मेरी बुर को चोद डालो गौरव….ओह्ह…मैं झड़ने वाली हूँ…मेरी मारो जोर से ….आ…आ…आ..आह…उईईईईई…….”, कविता ये बडबडाते हुए जोरों से झड गयी.

उस रात बहुत कुछ हुआ. रेनू और कविता ने विवेक और गौरव से डबल-चुदाई कराई. कविता ने रेनू से अपनी बुर फिर से चुस्वाई और फिर कविता ने रेनू की चूत चूसी. गर्मी की ये लम्बी शाम चारों ने बहुत से खेल खेलते हुए गुजारी.

जब वे चलने लगे तो रेनू ने कहा,
“मुझे बड़ी खुशी है की हम लोगों का परिचय इतनी जल्दी तुम लोगों से हो गया. बड़ा अच्छा हो की और 4-5 कपल्स हमारे खेल में शामिल हो सकते. तुम लोगों किसी और कपल्स को जानते हो जो इसमें शामिल हो सकें? मैं अगले हफ्ते नया जॉब पर स्टार्ट कर रही हूँ. वहां पर मैं और लोगों को अन्दर लाने की कोशिश करूंगी. जल्द ही हमारे पास एक बड़ा और बढ़िया सा ग्रुप होगा. बहुत मजा आएगा न? हम यहाँ पर पार्टी करेंगे. हम हिल स्टेशन पर जा कर पार्टी करेंगे”

सब लोगों ने फिर से किस किया एक दुसरे के बदन को अच्छे से छुआ. उन्होंने अगले हफ्ते की पार्टी विवेक और कविता के घर पर तय की. चारों लोग अपनी इस नयी शुरुआत से बड़े खुश थे. वो जानते थे कि आने वाला समय उस सबके जीवन में नए नए आनंद ले कर आने वाला था और सब लोग इस बात से बड़े खुश थे.

आज की शाम को पड़ोसियों के घर जम कर सेक्सी पार्टी करने के बाद, कविता और विवेक धीरे धीरे घर की तरफ टहलते हुए जा रहे थे. थोड़े देर के लिये दोनों खामोश थे. शायद सोच भी नहीं प् रहे थे की पिछले ३-४ घंटे में जो भी हुआ है he सच में हुआ है या सम्पना था. शायद दोनों ही इस बात का इंतज़ार कर रहे थे की दूसरा बोले. यह उनका स्वैप का पहला अनुभव था. उन्हें खुशी थी की उनका पहला अनुभव इतना अच्छा गया.

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विवेक मौन भंग करते हुए बोला, “कविता.”

“यस डार्लिंग!”

“आज रात की इस पार्टी में तुम्हें मजा आया की नहीं?”

“बहुत ज्यादा मज़ा आया विवेक, तुम्हें तो मालूम है कि मुझे तुम्हारे सामने किसी दुसरे मर्द से चुदने का कितने सालों से इंतज़ार था. मेरा गौरव से चुदना, फिर तुमसे चुदना फिर तुम दोनों से एक साथ चुदना…और रेनू की का मेरी चूत को चाटना और मेरा उसकी चूत को चाटना…मुझे तो अभी भी मेरी किस्मत पर यकीन नहीं हो रहा है.“
(पाठक ये सब कैसे हुआ पिछले भाग में पढ़ सकते हैं)

कविता बोलती जा रही थी,
“हम लोगों ने अगले हफ्ते मिलने का प्लान तो किया है. पर मेरा मन तो उससे पहले एक बार और मिलने का हो रहा है विवेक….मतलब कल राट ही मिलें उसने फिर से?”

विवेक ने स्वीकृति दी,
“बढ़िया आईडिया है ये. मुझे लगता है कि वो मान जायेंगे. हमारे पडोसी हमसे कहीं से कम चुदक्कड़ नहीं हैं. वो चोदने का कोई मौका नहीं छोड़ेंगे. मैं उन्हें कॉल कर के कल सुबह ही बुला लूँगा डार्लिंग!”

दोनों एक बार फिर से शांत हो गए

“विवेक”

“हाँ जी”

“तुन्हें मुझे गौरव मुझे चोदते हुए देख कर कैसा लगा था?”

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