घर में बहु नहीं रंडी आयी है भाग 2

वह अब मेरे आगे की दिशा में आ गया था, उसनें मेरे नितंबों से मेरी पेंटी पहले ही नीचे सरका कर उसे मेरी टांगों से भी अलग कर दिया था, मेरी नर्म रोयों वाली योनी पर उसने पहले साबुन लगाया फिर हेंड शावर की धार योनी पर मारने लगा, मैनें उत्तेजना से वशीभूत होकर अपनी अँगुलियों से योनी को जरा खोल दिया तो गुनगुने पानी की तीब्र धार मेरी योनी के मुहाने पर पड़ने लगी, मैं सिसक उठी…बस…बस…यह कह कर मैनें अपने दोनों हांथों से उसका सीर पकड़ कर योनी पर झुका दिया तो वह योनी को चाटने लगा,
तभी काल बेल बजी,

हम दोनों ही चौंक पडे, दोनों की कामुकता भंग हो गई, मैनें उसकी आँखों में देखा उसने मेरी आँखों में देखा,

तुम नहाओ…मैं जाकर देखती हूँ कौन है, मैनें टावल अपने शरीर पर लपेटते हुवे कहा, वह प्यासे भंवरे की भांति मुझे बाथरूम से निकलते देखता रह गया,
मैनें जल्दी जल्दी अंतर्वस्त्र पहन कर पेटीकोट और ब्लाउज पहनें और साड़ी को लपेटते हुवे दरवाजे की और चली गई,

दरवाजा खोला तो सामने अपनी ननद को मुस्कुराते पाया,

क्या भाभी…? कितनी देर से खड़ी हूँ, उसने अन्दर आते हुवे कहा,मैनें दरवाजा फिर लोक कर दिया,

मैं नहा कर कपडे बदल रही थी….इसलिए देर हो गई….मैनें साड़ी के पल्लू को कंधे पर डाल कर कहा,

तभी मैं कहूँ…..की इतनी सुहानी खुश्बू कहाँ से आ रही है……अब पता चला भाभी के गिले बाल खुले हुवे हैं, वैसे…ये बात तो पक्की है न भाभी….की भईया इस समय यहाँ नहीं हैं…मेरी ननद सोफे पर पसर कर बोली,

हाँ….लेकिन इस बात से तुम्हारा क्या मतलब है? मैं उसके पास बैठ कर बोली,
मतलब ये है की अगर वे यहाँ होते तो मुझे दरवाजे पर आधे घंटे तक खडे रहना पड़ता…..कोई दरवाजा खोलने नहीं आता….मेरी ननद नें अपने स्वर को सस्पेंस का पुट देते हुवे कहा,

वो क्यों…? मैनें उलझन पूर्ण स्वर में पूछा

वो इसलिए की तुम्हारे धुले धुले यौवन से उठती महक भईया को पागल बना डालती और वे तुम्हारे साथ किसी और काम में आधे एक घंटे के लिए बीजी हो जाते….मेरी ननद नें अपनी बाईं आँख दबा कर कहा मेरी जांघ में शरारत पूर्ण ढंग से चिकोटी काटी,

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अच्छा…कुछ ज्यादा ही हवा लग गई है तुम्हे जवानी की….मैं आँखें तरेर कर बोली,

क्यों…जवानी में जवानी की हवा नहीं लगनी चाहिए…अब तो अठारहवीं सीढ़ी पर पहुँचने का समय आ गया है….मेरी ननद नें गर्व पूर्ण स्वर में कहा,

वो तो देख ही रही हूँ…ये गहरे गले के टाप में कसमसाते दो गुंबज जिनकी गोलाई सहज ही दिख रही है और घुटनों तक की स्कर्ट की चुस्ती से बाहर को उभरते नितंब और पतली कमर का ख़म………जरुर दो चार को बेहोश करके आ रही हो….अच्छा ये बताओ क्या पियोगी……मैनें विषय चेंज करके कहा,

अब वह तो मुझे पीने को मिल नहीं सकता….जो आप पीती हो….इसलिए कुछ और ही पिया जा सकता है….उसने फिर एक अशलील मजाक किया,

मैं क्या पीती हूँ…?मैनें नादान बनते हुवे पूछा,

तुम मेरे ही मुंह से सुनना चाहती हो…समझ तो गई हो…फिर भी मैं बताती हूँ तुम पीती हो लिंग रस….उसने इतना कहा और हंस पड़ी,

हटो बदमाश…कितनी मुंह फट हो गई हो, चलो रसोई में चलते हैं मैनें उठते हुवे कहा,
वह मेरे साथ खड़ी हो गई, उसने अपना हेंड बैग सोफे पर ही छोड़ दिया, वह मुझे आज पूरे रंगीन मूड में लग रही थी, इससे पूर्व भी मैनें उसके मजाक तो सुने थे लेकिन ऐसे हाव भाव नहीं देखे थे,

रसोई में पहुंचते पहुंचते उसने मुझे अपनी बांहों में भर लिया और मेरे कपोलों को चूम कर बोली-

काश भाभी…मैं आपकी ननद नहीं बल्कि देवर होती…तुम्हारे यौवन की कसम इन दोनों कठोर पहाड़ों को पिस डालती और तुम्हारी जाँघों के भीतर अपने लिंग को तुम्हारी पसलियों तक पहुंचा कर ही दम लेती….मेरी ननद के इन शब्दों को सुन कर मेरे दिमाग ने एक योजना को जन्म दे डाला,

मैनें गैस पर चाय का पानी चढाते हुवे कहा- इन पहाड़ों को तो तुम अब भी पिस रही हो….वैसे एक बात बताओ क्या तुम्हारा कोई बॉय फ्रैंड नहीं है….?

मेरी ननद अपने भाई की ही भांति ही जरुरत से ज्यादा कामुक हो रही थी इस समय, शायद इसलिए और ज्यादा क्योंकि उसे ये भ्रम था की सिर्फ मैं और वो ही हैं,

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नहीं….कई लड़के कोशिश करते हैं लेकिन मैं ही उन्हें लिफ्ट नहीं देती हूँ……. मेरी ननद नें मेरी ब्लाउज के दो तीन बटन खोल कर कहा,

ये क्या कर रही हो तुम…? मैनें उसकी क्रिया को देख कर प्रश्न किया,

करने दो ना भाभी….मुझे बहुत मजा आता है स्तन पान में…मैं एक सहेली के साथ ऐसा करती हूँ….हम दोनों लेस्वियन लवर हैं….अब आपके ऐसे भरे भरे यौवन को देख कर मेरा जी मचल उठा है….ये ही सोच लो की भैया हैं मेरी जगह…उसने कुनकुनाते स्वर मैं कहा और मेरे ब्लाउज में हाँथ डाल कर मेरी ब्रा को सहलाने लगी, उसका दूसरा हाँथ मेरे सपाट पेट पर रेंग रहा था,

क्या तुमने अभी तक किसी लिंग को नहीं देखा…मैनें उसकी क्रिया से आनंदित हो कर पूछा,

मैनें चाय छानने के लिए तीन कप उतार किये थे, मुझे बाथरूम के दरवाजे के बंद होने की हलकी सी आवाज सुनाई दे गई थी, मैं समझ चुकी थी की मेरा छोटा भाई नहा चूका है और अब इधर ही आयेगा क्योंकि उसे भी जिज्ञासा होगी यह जानने की कि कौन आया है,

कहाँ देखा है भाभी….कभी कभी इत्तेफाक से उस पहलवान कि एकाध झलक देखने को मिलती है लेकिन उस झलक का क्या फायदा….वह मेरे ब्लाउज का एक बटन और खोल कर बोली,

मैनें तीन कपों में चाय डाल दी,

चलो आज दिखा देंगे…मैनें कहा,

तुम दिखा दोगी….वो कैसे….उसने चौंक कर मेरी आँखों में देखा,

उसकी दृष्टि उन तीन कपों पर पड़ी जिनमें मैं चाय डाल चुकी थी,

हैं…ये तीसरा कप किसके लिए है….? उसने हैरत जताई,

ये तीसरा कप मेरे लिए है….मेरे भाई ने रसोई में प्रवेश करते हुवे कहा,

मेरी ननद उसे देखते ही मुझसे दूर छिटक गई, उसकी आँखों में अशमंजश के भाव आ गये,

ये मेरा छोटा भाई है……..मैनें अपनी ननद से कहा फिर अपने भाई से बोली- ये मेरी ननद है….ये ही आई थी….जब हम बाथरूम में थे,

मेरे भाई ने मेरे ब्लाउज के खुले तीन चार बटन देखे तो मुस्कुरा कर बोला….ये भी अपने भाई कि तरह आपके स्तनों कि प्यासी हैं,

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