गांव की सुन्दर लड़की की कोमल छूट भाग 1

मेरा नाम राज वर्मा है में कोटा राजस्थान का रहने वाला हूं। मेरी उम्र 37 हो चुकी है में एक मध्यम वर्ग परिवार से हूं और खाते पीते घर का लगता हू । क्यू की एक अच्छे भारी जिस्म का मालिक को हूं । में आपको अपनी एक सच्ची कहानी बताने जा जा रहा हूं जिसके पात्र के नाम मैने बदल दिए है। में ये नहीं कहूंगा मेरा इतना बड़ा है या ऐसा है मगर आज तक जितना भी सेक्स किया है उन सभी को संतुष्ट ही किया है। में दिल्ली की एक कंपनी में था जो मुझे काम से कहीं भी भेज देती थी मगर जो सरकारी ठेका वो लेती थी वो राजस्थान का होता था जो कभी मुझे संभालने भेजा जाता था। मुझे एक बार पाली की तरफ किसी काम से भेजा गया जहां गांव में जाकर मेरे द्वारा सेलेक्ट की गई टीम को सर्वे करना होता था। जिसके लिए गांव के पंचायत में कैंप लगाया जाता था। पाली के किसी आदिवासी गांव में मैने कुछ महीनों का कैंप लगवाया। में वैसे तो काम सेटअप करके होटल में रुकता था मगर गाव सिटी से काफी दूर था इसलिए सरपंच ने हमें पंचायत समिति के ऑफिस में रुकने का इंतजाम कर दिया । में शाम को गाव के बाहर टहल रहा था तो एक औरत मुझे एट हुए दिखाई दी । उसने पास आते ही मुझे कहा तुम तो वही कैंप वाले हो ना उसने कहा तुम मेरा काम करवा दो में इतनी लंबी लाइन में नहीं लग सकती सारा दिन खेत पैर काम होता है मेरा आदमी भी नहीं है । मैने कहा करवा दुगा मगर आपके पास पूरे कागज हो तो मुझे दे दो अभी जक सुबह 10 बजे से पहले आकर पहले आप ही अपना कार्ड बनवा लेना । उसने कहा मेरा घर पास ही है चलो आप चल सको तो चलो । में आपको उस औरत के बारे में बताना भूल गया वो गांव की कोई 30 उम्र की गोरी गदराया जिस्म की मालकिन थी उसकी मासल जिस्म में उसकी दो घाटियां साफ नजर आ रही थी जो उसके ब्लाउज को फाड़कर बाहर आना चाह रही थी । ब्लाउज में से उसकी चूचियां नजर आ रही थी क्यों की एक तो उसका ब्लाउज तंग था ओर उसने ब्रा नहीं पहनी थी । उसका नाम मीना था शाम ढलने को थी में उसके साथ चलने लगा । थोड़ी देर बाते करते हुए में उसके साथ उसके घर आ गया। उसका घर काफी बड़ा था जैसा गांव में कच्चा मगर आलीशान घर था। उसने कहा आप बैठो में कागज में आती हूं और वो कागज़ लेने चली गई । वो थोड़ी देर में कागज लाई और मेरे सामने नीचे बैठ कर कागज फेला दिए। मगर मेरा ध्यान तो उसके बड़े दूध पर ही था जिनको देखते हुए उसने देखलिया पर मुझे कुछ नहीं कहा ना ही उसने अपना आंचल सही किया। ये सब देख कर मेरा तो खड़ा होने लगा जिसका आभास मीना को भी शायद हो गया था । उसने कहा सोनू के पापा के मरने के बाद सारा घर में ही देखती हूं और सोनू की शादी भी करवाई मगर वो भी घर बैठी है उसका पति भी मरा आवारा निकला । सोनू उसकी बेटी का नाम था जो उस वक़्त वाहा नहीं थी। उसने मेरे हाथ में कागज थमा दिए तो में भी कुर्सी से नीचे उसके सामने बैठ गया और उसके साथ उसके कागज देखने लगा । कुछ कागज मैने के लिए ओर खा अब ने चलता हूं तो मीना बोली खाना खा कर चले जाना थोड़ा ओर रुक जाओ । मैने मना किया तो बोली में भी अकेली हूं थोड़ा रुक जाओ वाहा पंचायत में भी को आपका इंतज़ार कर रहा है सोनू भी आ जाएगी जब तक पास के गांव गई है मेरी बहन के । मीना का इतना बोलना था कि लाइट चली गई उसने कहा आप यही रहो में लाइट लाती हूं में वहीं खड़ा रहा । मेरे मन में उथल पुथल थी मगर एक सरीफ आदमी हूं डर भी था कहीं कोई अनहोनी ना हों जाए इसलिए हिम्मत नहीं हो रही थी। उधर। पप्पू महोदय अपना फन उठाए बैठे थे। इतने में मीना मुझे आती दिखाई दी सामने से आते हुए शायद उसके पांव में कुछ आया जिस से वो फिसली और अंधेरा हो गया मैने आगे बढ़कर उसे पकड़ा तो वो ओर में फर्स पर गिर पड़े वो नीचे ओर में उपर मेरा एक हाथ उसकी कमर पर ओर दूसरा उसकी दूध पर आ गया। अंधेरे में मैने उठने की कोशिश की तो उसने मुझे ओर का के पकड़ लिया और मैने अपनी हथेली की पकड़ उसके दूध पर तेज कर दी। मीना मुझसे लिपट गई मुझे ना जाने मेरा नाम राज वर्मा है में कोटा राजस्थान का रहने वाला हूं। मेरी उम्र 37 हो चुकी है में एक मध्यम वर्ग परिवार से हूं और खाते पीते घर का लगता हू । क्यू की एक अच्छे भारी जिस्म का मालिक को हूं । में आपको अपनी एक सच्ची कहानी बताने जा जा रहा हूं जिसके पात्र के नाम मैने बदल दिए है। में ये नहीं कहूंगा मेरा इतना बड़ा है या ऐसा है मगर आज तक जितना भी सेक्स किया है उन सभी को संतुष्ट ही किया है। में दिल्ली की एक कंपनी में था जो मुझे काम से कहीं भी भेज देती थी मगर जो सरकारी ठेका वो लेती थी वो राजस्थान का होता था जो कभी मुझे संभालने भेजा जाता था। मुझे एक बार पाली की तरफ किसी काम से भेजा गया जहां गांव में जाकर मेरे द्वारा सेलेक्ट की गई टीम को सर्वे करना होता था। जिसके लिए गांव के पंचायत में कैंप लगाया जाता था। पाली के किसी आदिवासी गांव में मैने कुछ महीनों का कैंप लगवाया। में वैसे तो काम सेटअप करके होटल में रुकता था मगर गाव सिटी से काफी दूर था इसलिए सरपंच ने हमें पंचायत समिति के ऑफिस में रुकने का इंतजाम कर दिया । में शाम को गाव के बाहर टहल रहा था तो एक औरत मुझे एट हुए दिखाई दी । उसने पास आते ही मुझे कहा तुम तो वही कैंप वाले हो ना उसने कहा तुम मेरा काम करवा दो में इतनी लंबी लाइन में नहीं लग सकती सारा दिन खेत पैर काम होता है मेरा आदमी भी नहीं है । मैने कहा करवा दुगा मगर आपके पास पूरे कागज हो तो मुझे दे दो अभी जक सुबह 10 बजे से पहले आकर पहले आप ही अपना कार्ड बनवा लेना । उसने कहा मेरा घर पास ही है चलो आप चल सको तो चलो । में आपको उस औरत के बारे में बताना भूल गया वो गांव की कोई 30 उम्र की गोरी गदराया जिस्म की मालकिन थी उसकी मासल जिस्म में उसकी दो घाटियां साफ नजर आ रही थी जो उसके ब्लाउज को फाड़कर बाहर आना चाह रही थी । ब्लाउज में से उसकी चूचियां नजर आ रही थी क्यों की एक तो उसका ब्लाउज तंग था ओर उसने ब्रा नहीं पहनी थी । उसका नाम मीना था शाम ढलने को थी में उसके साथ चलने लगा । थोड़ी देर बाते करते हुए में उसके साथ उसके घर आ गया। उसका घर काफी बड़ा था जैसा गांव में कच्चा मगर आलीशान घर था। उसने कहा आप बैठो में कागज में आती हूं और वो कागज़ लेने चली गई ।  वो थोड़ी देर में कागज लाई और मेरे सामने नीचे बैठ कर कागज फेला दिए। मगर मेरा ध्यान तो उसके बड़े दूध पर ही था जिनको देखते हुए उसने देखलिया पर मुझे कुछ नहीं कहा ना ही उसने अपना आंचल सही किया। ये सब देख कर मेरा तो खड़ा होने लगा जिसका आभास मीना को भी शायद हो गया था । उसने कहा सोनू के पापा के मरने के बाद सारा घर  में ही देखती हूं और  सोनू की शादी भी करवाई मगर वो भी घर बैठी है उसका पति भी मरा आवारा निकला । सोनू उसकी बेटी का नाम था जो उस वक़्त वाहा नहीं थी।  उसने मेरे हाथ में कागज थमा दिए तो में भी  कुर्सी से नीचे उसके सामने बैठ  गया और उसके साथ उसके कागज देखने लगा । कुछ कागज मैने  के लिए ओर खा अब ने चलता हूं तो मीना बोली खाना खा कर चले जाना थोड़ा ओर रुक जाओ । मैने मना किया तो बोली में भी अकेली हूं थोड़ा रुक जाओ वाहा पंचायत में भी को आपका इंतज़ार कर रहा है  सोनू भी आ जाएगी जब तक पास के गांव गई है मेरी बहन के । मीना का इतना बोलना था कि लाइट चली गई उसने कहा आप यही रहो में लाइट लाती हूं में वहीं खड़ा रहा । मेरे मन में  उथल पुथल थी मगर एक सरीफ आदमी हूं डर भी था कहीं कोई अनहोनी ना हों  जाए इसलिए हिम्मत नहीं हो रही थी। उधर। पप्पू महोदय अपना फन उठाए बैठे थे। इतने में  मीना मुझे आती दिखाई दी सामने से आते हुए शायद उसके पांव में कुछ आया जिस से वो फिसली और अंधेरा हो गया मैने आगे बढ़कर उसे पकड़ा तो वो ओर में फर्स पर गिर पड़े वो नीचे ओर में उपर मेरा एक हाथ उसकी कमर पर ओर दूसरा उसकी दूध पर आ गया। अंधेरे में मैने उठने की कोशिश की तो उसने मुझे ओर का के पकड़ लिया और मैने अपनी हथेली की पकड़ उसके दूध पर तेज कर दी। मीना मुझसे लिपट गई मुझे ना जाने

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