गाओं की गोरी चुत भाग 1

“आनंद भाई शहाब आप वाकई बहुत अक्च्छा चोदते हैं. मुझको अगर ये बात पहले ही मालूम होती कि आप के दिल मे भी मेरे लिए प्यार है तो मैं नरेंद्र के पास जा कर उससे कभी अपनी चूत ना चुद्वाती. मुझको अगर पहले से पता चलता कि आपका लंड इतना बड़ा और मज़बूत है तो बहुत पहले ही आपको अपनी बाहों मे बाँध लेती,” आशा आनंद से बोली. “अब मेरी चूत तुम्हारे लंड को चख चुकी है, पता नही अब उसको और कोई लंड पसंद आएगा कि नही. अब शायद मेरी चूत को नरेंद्र का लंड भी पसंद ना आए” आनद ने आशा को अपने हाथों मे बाँध कर अपने बगल मे बैठा दिया और उससे बोला, “आशा आज से ये लंड तुम्हारे चूत का गुलाम हो गया है, तुम्हे जब इसकी ज़रूरत हो तुम मुझे बुला लेना मैं और मेरा लंड हमेशा तुम्हारी सेवा के लिए तयार रहेगा.” उस दिन शाम को आनद अपने दोस्त अजीत के घर गया और दोनो नीम के पेड़ नीचे बैठ कर मिल कर इधर उधर की बातें करने लगे. आशा अपने घर के काम काज मे ब्यस्त थी और चोरी चोरी आनंद को देख रही थी. जैसे शाम होने लगी आनंद अजीत से बोला कि मैं चलता हूँ और अपने घर की तरफ चल पड़ा. आशा अपने घर के गेट के पास आनंद के लिए इंतेजार कर रही थी. जैसेही आनंद पास आया आशा धीरे से बोली, “आनंद आज रात को 10.00 बजे मेरे घर पर आना, पिछला दरवाजा खुला रहेगा और मैं तुम्हारा इन्तिजार करूँगी” और आशा अपने घर चली गयी. आनंद को आशा की बहादुरी पर ताज्जुब हुआ. उसको इसमे खतरा लगने लगा, लेकिन ये सोच करके कि आज रात वो फिर आशा को चोद पाएगा वो बहुत खुश हुआ और रात को आशा केघर जाने का निस्चय कर लिया. वो अपने घर गया और नहा धो कर एक साफ सुथरी धोती और कमीज़ पहन कर करीब 10.00 बजे रात को आशा के घर के पिछवाड़े पहुँच गया. आनंद वहाँ इन्तिजार करने लगा. उसको वहाँ कोई नही दिखा. अंदर एक माटी के तेल का दिया जल रहा था और पिछवाड़े का दरवाजा आधा खुला था लेकिन अंदर से कोई आवाज़ नही सुनाई पड़ रही थी. “आनंद भाई शहाब अंदर आ जाइए,” आनद को आशा की दबी जवान सुनाई दी. आशा अंदर से निकल कर आई वो आनंद को अपने साथ अंदर एक दूसरे कमरे ले गयी. दूसरे कमरे मे ज़मीन पर बहुत साफ सुथरा बिस्तर लगा हुआ था और उसपर दो तकिया भी लगे हुए थे. आनंद ने अपने दोस्त अजीत के बारे मे पूछा. “वो जल्दी सो जाता है और वो जब सोता है तो भूकंप भी उसको जगा नही पाता, मगर फिर भी हम लोगों को चुप चाप रहना चाहिए,” आशा धीरे से आनंद से बोली. फिर आशा माटी के तेल वाला दिया कमरे ले आई और धीरे से दरवाजा बंद कर दिया. आशा आनंद के पास आई और उसको अपने बाहों मे बाँधते हुए बोली, “आज सुबह हम लोगों ने जो कुछ भी किया जल्दी मे किया, फिर भी मुझे बहुत मज़ा आया. अब हम चाहते हैं कि हम तुमसे फिर से वही मज़ा लूटे और तुम मुझे रात भर धीरे धीरे चोदो, क्यों चोदोगे ना?” आनंद ने अपना सर हिला कर हामी भरी और बोला, “मैं भी तुम्हे पूराका पूरा चखना चाहता हूँ, सुबह जो भी हुआ वो बहुत जल्दी जल्दी हुआ”. आनंद ने आशा अपने पास खींच लिया और उसकी पीठ पर हाथ फेरने लगा. उसने आशा के होंठो पर चुम्मा दिया और उसकी ब्लाउस के बटन खोलने लगा. आनंद ने आशा की ब्लाउस और ब्रा उतार कर उसकी साड़ी उतरना शुरू कर दिया. आशा चुप चाप खड़ी हो कर अपनी साड़ी उतरवाने लगी. आनद ने आशा के पेटिकोट का नडा भी खोल दिया और आशा का पेटिकोट उतर कर उसके पैरों का पास गिर गया. अब आशा पूरी तरह से आनंद के सामने नंगी खड़ी थी. आनंद ने तब एक कदम पीछे हाथ कर आशा का नगञा रूप देखने लगा. हालंकी आशा का बदन भरा पूरा था, लेकिन उसका शरीर बहुत ही ठोस था. आशा की चूंची बड़ी बड़ी थी लेकिन लटकी नही थी. चूंची की निपल करीब 1″ लंबी थी और काली थी. . अनद तब धीरे धीरे चल कर आशा के ओईचे गया और आशा के गोल गोल शानदार भारी भारी चूतर और आशा की शानदार जांघों को देखने लगा. “तुम बहुत ही सुंदर हो,” आनद ने फिर से आशा अपने पास खींच लिया और उसको अपनी बाहों मे भर कर चूमने लगा. अब तक आनंद का लंड खड़ा हो चुक्का था और अपने लिए आशा की चूत को चाह रहा था. आशा ने आनंद की बाहों मे खड़े खड़े ही अपनी चूत को आनंद के लंड पर मलने लगी.

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