फूफी फरहीन के साथ कमुक्त भाग 4

“फूफी फ़रहीन लंड चूसें गी?” मैंने उनके पेट और मम्मों पर हाथ फेरते हुए पूछा. उन्होने कुछ कहा नही बस सीधी हो कर बैठ गईं और मेरे सीने पर अपना हाथ रख कर मेरा लंड मुँह में ले लिया. थोड़ी देर लंड चूसने से उनके मुँह में थूक भर गया जो सारा मेरे लंड पर लगने लगा. आज वो बड़ी चाबुक्ड़स्ती और महारत से मेरा लंड चूस रही थीं और में सोच रहा था के एक ही दिन में फूफी फ़रहीन लंड चूसने में इतनी माहिर कैसे हो गईं हैं. उनका अपना कहना था के उन्होने कभी भी फ़ूपा सलीम का लंड नही चूसा था और ये बात सॅकी भी लगती थी क्योंके फ़ूपा सलीम उन से हमेशा डाबते थे और उनकी मर्ज़ी के खिलाफ कुछ करने की जर’अट उन में नही थी. लेकिन अब एक ही दिन में फूफी फ़रहीन ने लंड चूसने में अच्छी ख़ासी महारत हासिल कर ली थी.

में बेड पर लेटा हुआ था और वो मेरे लंड के टोपे की गोलाई को चूमे और चूसे जा रही थीं . उन्होने अपनी ज़बान मुँह से बाहर निकाल कर मेरे लंड को ऊपर और नीचे से चाटा. वो मेरे सारे के सारे लंड को चाट रही थीं . उन्होने एक हाथ से मेरे टट्टों को सहलाना शुरू कर दिया. वो मेरे टट्टों को कभी ऊपर करतीं और कभी नीचे खैंचतीं. उनके इस तरह करने से मुझे बे-इंतिहा लज्ज़त महसूस हो रही थी. मेरा पूरा लंड उनके मुँह के अंदर चला जाता और उनकी नोकीली नाक मेरे पेट के निचले हिस्से में चुभने लगती.

फिर अचानक उन्हे ख्ँसी आने लगी और उन्होने थूक से लिथड़ा हुआ मेरा लंड अपने मुँह से निकाल दिया. शायद मेरा लंड उनके हलक़ में लगा था. खैर मैंने उठ कर फूफी फ़रहीन को कंधों से पकड़ कर उठाया और बेड पर लिटा दिया. फिर उनकी ताक़तवर टांगें खोलीं और उनकी तगड़ी चूत चाटने लगा. मेरी ज़बान उनकी चूत के मुख्तलीफ़ हिस्सों को चाटने लगी और फूफी फ़रहीन जैसे पागल हो गईं. मै उनकी सूजी हुई चूत को जैसे ही ज़बान लगाता वो अपने चूतरों को आगे धकेल कर अपनी चूत मेरे मुँह में घुसाने की कोशिश करतीं.

और कहानिया   नमिता बुआ की चुत मरने का मज़ा

“उफफफ्फ़….. कंजड़ी के बच्चे, तू ने फिर मुझे पागल करना शुरू कर दिया है. गश्ती के बच्चे, तेरी माँ की चूत में खोते का लूँ डून…..ऊऊओं…..उूउउफफफफफ्फ़. तेरी कुतिया माँ को चोदुं.” वो बे-खुदी के आलम में फिर गालियाँ देने लगी थीं .
“फ़रहीन तू भी तो किसी कंजड़ी से कम नही है. तेरी चूत मारूं. तेरा मोटा भोसड़ा मारूं, कुतिया. तेरी मोटी चूत में टट्टों तक अपना लंड डालूं. तेरी मोटी फुद्दियों वाली बहनों की चूत मारूं गश्ती औरत.” मैंने भी तुर्की-बा-तुर्की जवाब देते हुए कहा. “हन, हाँ मेरी बहनें भी गश्टियाँ हैं, हरमज़ाडियाँ.” उन्होने दाँत पीसते हुए कहा. “फ़रहीन तेरी बहनें रंडियाँ हैं सारी और तेरी तरह ही चूत मरवाती हूँ गी.” मैंने उनकी चूत पर ज़बान फेरने का अमल जारी रखा.
लज़्ज़त के शदीद एहसास ने उनके चेहरे को बदल कर रख दिया था. वो तेज़ी से अपने बदन को आगे पीछे कर के अपनी चूत चत्वाती रहीं.

में फूफी फ़रहीन की मोटी ताज़ी गांड़ मारना चाहता था मगर लग रहा था के आज तो इस की नोबट नही आए गी क्योंके वो और में दोनो ही बहुत गरम हो चुके थे. ये वक़्त उनकी चूत मार कर उन्हे मज़ा देने का था. अच्छी तरह से उनकी चूत चाट लेने के बाद में उनके ऊपर आ गया और अपना लंड उनकी चूत के अंदर बे-दरदी से घुसेड़ दिया. उन्होने अपने बदन को थोड़ा बहुत हिला कर अपना ज़ाविया दरुस्त किया और मेरे लंड को पूरी तरह अपनी चूत के अंडे जगह देनी की कोशिश की. मेरा लंड सारा का सारा उनकी भूकि चूत में चला गया.

मैंने अब उनकी फुद्दी में घस्से मारने शुरू किये. घस्से मारते हुए मैंने नीचे देखा. जब में आगे को घस्सा मारता तो मेरा लंड पूरा का पूरा फूफी फ़रहीन की चूत के अंदर गुम हो जाता और वो अपने चूतर थोड़े से उठा कर अपनी चूत को और खोलतीं और लंड अंदर करने में मेरी मदद करतीं. हर घस्से के साथ वो अपनी मोटी रानों से मेरी कमर को सख्ती से पकड़ लेतीं. मैंने उन्हे चोदते हुए अपने बदन का वज़न उनके ऊपर डाल दिया और दोनो हाथों से उनके कंधे पकड़ लिये. वो बड़े तंदरुस्त बदन की मालिक थीं मगर इस वक़्त मेरे मीचे दबी हुई थीं.

और कहानिया   अमीर ठरकी अंकल, मॉम और अंजू आंटी भाग 1

उनकी चूत में घस्से मारते हुए अब मेरा मुँह उनकी गर्दन के अंदर घुसा हुआ था और में उनकी गर्दन, कंधे और बाज़ू चूम रहा था. मैंने उनके सीने पर अपना सर रखा तो मुझे उनके दिल की धडकनें साफ़ महसूस हुई जो बहुत तेज़ हो चुकी थी. इस तरह चुदने से फूफी फ़रहीन की फुद्दी बहुत ज़ियादा भीग चुकी थी. फिर वो तेज़ आवाज़ में कराहने लगीं और उनकी चूत मेरे लंड के गिर्द टाइट हो गई. उनके छूटने का वक़्त क़रीब था.
देखते ही देखते उन्होने सख्ती से मुझे दबोच लिया और बड़े ज़बरदस्त अंदाज़ में खलास होने लगीं. मैंने देखा के उनकी आँखें घूम कर ऊपर चढ़ गईं और चेहरा टमाटर की तरह सुर्ख हो गया. उनका मुँह खुला हुआ था और वो ऐसे साँस ले रही थीं जैसे कमरे में ऑक्सिजन की कमी हो. शायद वो अभी पूरी तरह खलास नही हुई थीं क्योंके अचानक उन्होने अपने हाथ मेरी कमर में डाल कर अपने लंबे नाख़ून मेरे जिसम में गार्र दिये और अपने बदन को ऊपर कर के मेरे घस्सों का जवाब देने लगीं. उस वक़्त फूफी फ़रहीन यक़ीनन अपने खलास होने का पूरा पूरा मज़ा ले रही थीं .

चन्द मिनिट तक मज़ीद घस्से मारने के बाद मैंने अपना लंड उनकी चूत में से निकाल लिया.
“फूफी फ़रहीन अब आप मेरे लंड पर बैठाइं प्लीज़.” मैंने उनकी टाँगों में हाथ डालते हुए कहा. वो उखरर उखरर साँसें लेतीं हुई उठीं और मेरे ऊपर आ कर दोनो टांगें मेरे जिसम के दोनो तरफ् कर लीं. अब उन्होने अपनी चूत मेरे लंड के टोपे से क़रीब कर दी. मैंने अपना लंड उनकी चूत के मुँह पर रखा तो उन्होने अपने भारी भर्कूं चूतर आहिस्तगी से नीचे किये और मेरे लंड को अपने अंदर ले लिया. मैंने उनकी मज़बूत कमर को दोनो हाथों से पकड़ा और उन्हे अपने लंड पर उठाने बिठाने लगा. फूफी फ़रहीन के मम्मे इस उठक बैठक की वजह से बुरी तरह उछल रहे थे जिन पर में नज़रायण जमा कर उन्हे चोद रहा था.

Pages: 1 2 3

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *